एग्जॉस्ट फैन के आगे ये चीज लगाकर बनाई मुफ्त बिजली; 11 हजार यूनिट के दावे का हुआ पोस्टमार्टम, जानिए हकीकत
इंटरनेट की दुनिया में आए दिन ऐसे देसी जुगाड़ वायरल होते हैं जो पहली नजर में किसी बड़े चमत्कार से कम नहीं लगते। हाल ही में सोशल मीडिया पर एक ऐसा ही वीडियो तेजी से सुर्खियां बटोर रहा है, जिसमें दावा किया गया है कि एक शख्स ने अपने डेयरी फार्म में भारी बिजली बिल की समस्या से निपटने के लिए एक अनोखा फॉर्मूला खोज निकाला। फार्म में मवेशियों को ठंडक और ताजी हवा देने के लिए दिन-रात चलने वाले बड़े-बड़े एग्जॉस्ट फैन अच्छी-खासी बिजली खींच रहे थे।
इस खपत की भरपाई करने के लिए शख्स ने एग्जॉस्ट फैन के मुंह से निकलने वाली तेज हवा के ठीक सामने एक मिनी पवन चक्की (विंड टरबाइन) फिट कर दी और दावा किया जाने लगा कि इससे सालाना 11,000 यूनिट तक मुफ्त बिजली बन रही है। लेकिन क्या वास्तव में पंखे की हवा से फ्री बिजली बनाई जा सकती है या यह सिर्फ इंटरनेट का एक भ्रम है?
किस तकनीक और पवन चक्की का किया गया इस्तेमाल?
वायरल वीडियो में नजर आ रही डिवाइस दरअसल 1 किलोवाट (1kW) क्षमता वाली हॉरिजॉन्टल एक्सिस विंड टरबाइन है। इस तरह की पवन चक्की की बनावट ऐसी होती है कि यह सामने से सीधे टकराने वाली हवा की गतिज ऊर्जा (काइनेटिक एनर्जी) को बिजली में बदल देती है। वीडियो में दिखाए गए सेटअप के तहत इस पवन चक्की को एक लोहे के मजबूत स्टैंड पर कसकर एग्जॉस्ट फैन के आउटलेट के ठीक सामने लगा दिया गया है। जब अंदर से एग्जॉस्ट फैन तेज गति से हवा बाहर फेंकता है, तो उस झोंके से टरबाइन के ब्लेड्स अत्यधिक तेजी से घूमने लगते हैं। वीडियो में इसे अपनी सामान्य क्षमता से भी अधिक बिजली पैदा करने वाला क्रांतिकारी समाधान बताकर पेश किया गया है।
11 हजार यूनिट्स का दावा: गणित और विज्ञान में कितना झोल?
पहली नजर में यह जुगाड़ भले ही प्रभावित करे, लेकिन आंकड़ों की पड़ताल करते ही 11 हजार यूनिट सालाना बिजली उत्पादन का दावा पूरी तरह खोखला साबित होता है। व्यावहारिक परिस्थितियों में 1 किलोवाट की ऐसी पवन चक्की यदि सामान्य गति से पूरे दिन चले, तो यह 24 घंटे में लगभग 10 से 12 यूनिट बिजली ही बना पाती है। वीडियो में यह तर्क दिया गया है कि एग्जॉस्ट की तेज हवा से लगातार घूमने पर यह रोजाना 15 से 16 यूनिट बनाएगी। यदि इस बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए गए आंकड़े को भी मान लिया जाए, तब भी सालभर का कुल उत्पादन मात्र 5,500 से 5,800 यूनिट के आसपास ही पहुंचता है।
यदि भौतिकी के सबसे आदर्श नियम लागू करें और मान लें कि यह 1kWh की टरबाइन बिना एक सेकंड रुके साल के 365 दिन अपनी 100% अधिकतम क्षमता (24 घंटे में 24 यूनिट) पर चले, तो भी सालभर में अधिकतम 8,760 यूनिट ही बन सकती है। ऐसे में किसी भी वैज्ञानिक गणना के तहत 11,000 यूनिट का आंकड़ा छूना असंभव है।
देसी जुगाड़ में छिपी तकनीकी खामियां और बैकप्रेशर का खतरा
इंजीनियरिंग के नजरिए से देखें तो एग्जॉस्ट फैन के ठीक सामने विंड टरबाइन लगाना एक गंभीर तकनीकी गलती है। किसी भी एग्जॉस्ट फैन का प्राथमिक काम कमरे या शेड के अंदर की गर्म और दूषित हवा को बिना किसी रुकावट के पूरी ताकत से बाहर फेंकना होता है। जब उसके आउटलेट के ठीक सामने टरबाइन के ब्लेड्स लगा दिए जाते हैं, तो हवा के प्राकृतिक निकास में गंभीर बाधा उत्पन्न होती है। इससे 'बैकप्रेशर' (हवा का उल्टा दबाव) पैदा होता है, जिसका सीधा असर एग्जॉस्ट फैन की मोटर पर पड़ता है। मोटर पर अतिरिक्त लोड बढ़ने से वह सामान्य से कहीं ज्यादा बिजली खींचने लगती है और ज्यादा गर्म होकर समय से पहले फुंक भी सकती है।
मुफ्त बिजली नहीं, बल्कि घाटे का सौदा साबित होगा यह प्रयोग
थर्मोडायनामिक्स और भौतिकी का बुनियादी नियम कहता है कि ऊर्जा न तो पैदा की जा सकती है और न ही नष्ट की जा सकती है, केवल उसका रूप बदला जा सकता है। दुनिया की कोई भी मोटर, फैन या जनरेटर 100% दक्ष (Efficient) नहीं होता। इस पूरे चक्र में घर्षण, गर्मी और हवा के फैलाव के कारण भारी मैकेनिकल और थर्मल एनर्जी का नुकसान होता है। एग्जॉस्ट फैन के मुंह पर टरबाइन लगाने से रुकावट के कारण पंखे की मोटर जितनी अतिरिक्त बिजली बर्बाद करेगी, सामने लगी टरबाइन उससे बहुत कम बिजली वापस ग्रिड या इनवर्टर को दे पाएगी। लिहाजा, जो चीज वीडियो में 'फ्री बिजली' का वरदान लग रही है, वह हकीकत में फार्म मालिक के लिए बिजली बिल बढ़ाने और उपकरणों को खराब करने वाला घाटे का सौदा ही है।