दिवाली की रात सिर्फ 1 बार कर लें यह अचूक उपाय, राहु-केतु की क्रूर दृष्टि हमेशा के लिए होगी शांत
देशभर में 8 नवंबर 2026 को रोशनी का महापर्व दीपावली पूरे श्रद्धाभाव से मनाया जा रहा है। इस पावन अवसर पर माता लक्ष्मी और भगवान गणेश के विधि-विधान से पूजन के साथ ही ज्योतिषीय दृष्टिकोण से भी यह रात बेहद शक्तिशाली मानी जाती है। कार्तिक अमावस्या की यह घनी निशा छाया ग्रह राहु और केतु की शांति तथा उनकी प्रतिकूलता समाप्त करने के लिए सर्वोत्तम अवसर मानी गई है। ज्योतिष शास्त्र के जानकारों के अनुसार, जिन जातकों की कुंडली में राहु-केतु अशुभ भावों में स्थित हैं या जो इनकी कष्टकारी महादशा और अंतर्दशा से जूझ रहे हैं, वे दिवाली की रात कुछ खास और अचूक उपाय कर अपने जीवन से नकारात्मकता को पूरी तरह मिटा सकते हैं।
कुंडली में छाया ग्रहों के दुष्प्रभाव को खत्म करने के लिए दिवाली की शाम या रात में जरूरतमंदों को विशिष्ट वस्तुओं का दान करना बेहद फलदायी माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, इस रात किसी असहाय या निर्धन व्यक्ति को लोहे से बनी वस्तुएं, काली उड़द की दाल और नीले रंग के वस्त्र दान करने से राहु और केतु दोनों की क्रूर दृष्टि शांत होती है। इस गुप्त और निस्वार्थ दान से जातक की कुंडली के ग्रह दोष धीरे-धीरे समाप्त होने लगते हैं और रुके हुए कार्यों में अचानक सकारात्मक गति दिखाई देने लगती है।
राहु-केतु के अशुभ प्रकोप से रक्षा के लिए देवों के देव महादेव की शरण में जाना सबसे अचूक समाधान माना गया है। दिवाली की रात भगवान शिव की आराधना और उनके महामंत्रों का जप करने से छाया ग्रहों का दुष्प्रभाव तुरंत क्षीण होने लगता है। इस रात किसी नजदीकी शिवालय में जाकर गंगाजल अथवा शुद्ध जल में थोड़ा कच्चा दूध और काले तिल मिलाकर शिवलिंग का विधिवत अभिषेक करना चाहिए। मान्यता है कि कार्तिक अमावस्या पर काले तिल मिश्रित जल से किया गया रुद्राभिषेक राहु की वक्र दृष्टि और केतु की पीड़ा को हमेशा के लिए शांत कर देता है।
ज्योतिष में राहु और केतु की शांति के लिए बेजुबानों, विशेष रूप से काले या आवारा कुत्तों की सेवा को सर्वोपरि उपाय माना गया है। दिवाली की रात तेल लगी रोटी या ब्रेड कुत्तों को खिलाने से आकस्मिक दुर्घटनाओं और अज्ञात भय से मुक्ति मिलती है। इसके साथ ही इस पावन रात कर्मफलदाता भगवान शनि देव के मंत्रों का विधिवत जप करना भी राहु-केतु के दुष्प्रभाव को कम करने में अचूक माना जाता है, क्योंकि शनि की कृपा प्राप्त होते ही दोनों छाया ग्रहों की अशुभता स्वतः ही समाप्त हो जाती है।