हार्ट अटैक आते ही पहले 1 घंटे में क्या करें और क्या नहीं, तुरंत ये करें और बचाएं जान
अचानक किसी अपने का सीने पर हाथ रखकर दर्द से तड़पना, चेहरा पीला पड़ जाना और कुछ ही पलों में बेसुध होकर गिर पड़ना किसी भी परिवार के लिए सबसे भयावह मंजर होता है।
कार्डियक अरेस्ट रजिस्ट्री टू एनहांस सर्वाइवल (CARES) की मेडिकल रिपोर्ट के मुताबिक, दिल की आपात स्थिति में तुरंत दिया गया सही सीपीआर (CPR) मरीज के बचने की संभावना को दो से तीन गुना तक बढ़ा देता है। इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी के विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पताल और डॉक्टरों तक पहुंचने से पहले हार्ट अटैक के शुरुआती 'गोल्डन ऑवर' यानी पहले 60 मिनट में दी गई प्राथमिक चिकित्सा (फर्स्ट एड) मायोकार्डियम की इलास्टिसिटी को बरकरार रखते हुए सीधे जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर तय करती है।
क्या हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट दोनों एक ही बीमारी हैं?
अक्सर लोग हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट को एक ही समझ लेते हैं, जबकि दोनों की प्रकृति में बुनियादी अंतर होता है। हार्ट अटैक मूल रूप से दिल के रक्त संचार (सर्कुलेशन) की खराबी है, जो तब होता है जब धमनियों में ब्लॉकेज के कारण दिल की मांसपेशियों तक खून की सप्लाई अचानक रुक जाती है।
दूसरी तरफ, कार्डियक अरेस्ट दिल की 'इलेक्ट्रिकल' खराबी है, जिसमें दिल अचानक धड़कना और काम करना पूरी तरह बंद कर देता है। कार्डियक अरेस्ट होते ही मरीज की सांस थम जाती है और वह तत्काल अचेत (बेहोश) हो जाता है। गंभीर स्थिति में एक जानलेवा हार्ट अटैक भी कार्डियक अरेस्ट की मुख्य वजह बन सकता है।
इन शुरुआती संकेतों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज
हार्ट अटैक की पहचान समय रहते करना सबसे अहम कदम है। हालांकि हर व्यक्ति में इसके लक्षण अलग हो सकते हैं, लेकिन कुछ सामान्य चेतावनी संकेत तुरंत सतर्क करते हैं:
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सीने में तीव्र जकड़न, असहनीय दर्द या भारीपन का दबाव महसूस होना, जो कुछ मिनटों के अंतराल पर आता-जाता रहे
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दर्द का छाती से फैलते हुए बाएं हाथ, दोनों कंधों, पीठ, गर्दन, जबड़े या पेट के ऊपरी हिस्से तक पहुंचना
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सीने में दर्द के साथ अथवा बिना दर्द के भी अचानक तेज सांस फूलने लगना
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बिना किसी भारी मेहनत के अचानक ठंडा पसीना आना, तेज चक्कर आना और जी मिचलाना
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असामान्य और अत्यधिक कमजोरी या थकान महसूस होना, जो विशेष रूप से महिलाओं में प्राथमिक लक्षण के रूप में देखा जाता है
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दिल की धड़कनों का अचानक अनियमित, असामान्य या बहुत तेज (एरिदमिया) हो जाना
हार्ट अटैक के पहले 60 मिनट में तुरंत उठाएं ये 7 कदम
आपात स्थिति पैदा होते ही बिना घबराए क्रमबद्ध तरीके से इन प्राथमिक उपायों को अपनाना चाहिए:
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इमरजेंसी सर्विस को तुरंत कॉल करें: बिना एक भी सेकंड गंवाए स्थानीय एम्बुलेंस और नजदीकी कार्डियक इमरजेंसी अस्पताल को फोन करें।
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मरीज को सही मुद्रा में बैठाएं: मरीज को सीधा लेटाने के बजाय सहारा देकर आराम से बिठाएं (हाफ-सिटिंग पोजीशन) और पीठ को पीछे से टेक दें, जिससे दिल पर दबाव कम हो, धड़कन स्थिर रहे और फेफड़ों को सांस लेने में आसानी हो।
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टाइट कपड़े तुरंत ढीले करें: छाती, गर्दन के कॉलर, टाई या बेल्ट जैसे कसे हुए कपड़ों को तुरंत खोलें ताकि ऑक्सीजन का प्रवाह बाधित न हो।
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मरीज को मानसिक रूप से शांत रखें: मरीज में घबराहट बढ़ने से दिल की धड़कन और बीपी तेजी से बढ़ता है, इसलिए उसे भरोसा दिलाएं कि मदद रास्ते में है और उसे लगातार शांत रखने का प्रयास करें।
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डॉक्टरी परामर्श व एस्पिरिन का प्रयोग: यदि मरीज को एस्पिरिन से एलर्जी या गैस्ट्रिक ब्लीडिंग का इतिहास नहीं है, तो उसे एक 300mg (non-enteric coated) एस्पिरिन टैबलेट तुरंत चबाने को दें, जिससे रक्त के थक्के (ब्लड क्लॉट) को बढ़ने से रोकने में मदद मिलती है।
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केवल डॉक्टर द्वारा सुझाई गई दवा दें: यदि व्यक्ति पहले से हृदय रोगी है और डॉक्टर ने उसे छाती के दर्द (एंजाइना) के लिए नाइट्रोग्लिसरीन प्रिस्क्राइब की हुई है, तभी उसे जीभ के नीचे रखने दें; बिना पूर्व पर्चे के यह दवा किसी नए व्यक्ति को कभी न दें।
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CPR और AED का इस्तेमाल: यदि मरीज सांस लेना बंद कर दे और नब्ज न मिले, तो तुरंत हैंड्स-ऑन सीपीआर शुरू करें (हथेलियों को छाती के ठीक बीच रखकर प्रति मिनट 100 से 120 की गति से 2 से 2.5 इंच गहरा दबाव डालें) या पास में ऑटोमेटेड एक्सटर्नल डिफिब्रिलेटर (AED) उपलब्ध हो तो उसके वॉइस प्रॉम्प्ट्स का पालन कर शॉक दें।
आपात स्थिति में भूलकर भी न करें ये 3 गलतियां
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एम्बुलेंस बुलाने में तनिक भी देरी न करें: यह मानकर बैठ जाना कि दर्द गैस, अपच या सामान्य मांसपेशियों का खिंचाव है, सबसे घातक साबित होता है; खुद गाड़ी चलाकर अस्पताल जाने या घरेलू नुस्खों में समय बर्बाद न करें।
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बिना जानकारी के कोई भी पेनकिलर न दें: सीने के दर्द को दबाने के लिए मरीज को अपनी मर्जी से कोई भी नार्कोटिक पेनकिलर, पैरासिटामोल या एंटीबायोटिक गोली न खिलाएं, क्योंकि इससे रक्तचाप गिर सकता है या गंभीर साइड इफेक्ट हो सकते हैं।
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दर्द अपने आप ठीक होने का इंतजार न करें: यदि लक्षण थोड़े समय के लिए धीमे भी पड़ जाएं, तब भी इसे हल्के में न लें और फौरन कार्डियोलॉजिस्ट से संपर्क कर ईसीजी व जरूरी जांच करवाएं।