25 साल पुराना सोन नदी जल विवाद खत्म: बिहार-झारखंड के बीच ऐतिहासिक समझौता, किसानों को मिलेगा भरपूर पानी

25 साल पुराना सोन नदी जल विवाद खत्म: बिहार-झारखंड के बीच ऐतिहासिक समझौता, किसानों को मिलेगा भरपूर पानी

बिहार और झारखंड के बीच सोन नदी और बाणसागर परियोजना के जल बंटवारे को लेकर पिछले ढाई दशक से चला आ रहा विवाद आखिरकार पूरी तरह समाप्त हो गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में दोनों राज्यों के बीच एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।

नई दिल्ली में आयोजित इस उच्चस्तरीय बैठक में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल, बिहार के उपमुख्यमंत्री, केंद्रीय गृह सचिव सहित केंद्र और दोनों राज्यों के शीर्ष अधिकारी मौजूद रहे। इसे दोनों पड़ोसी राज्यों में सिंचाई और पेयजल संकट के स्थायी समाधान की दिशा में एक युगांतरकारी कदम माना जा रहा है।

गृह मंत्री अमित शाह ने सराहा, बताया 'टीम भारत' और सहकारी संघवाद का मॉडल

संबोधन के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि 25 वर्षों से लंबित इस जटिल विवाद का हल यह सिद्ध करता है कि सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) और आपसी संवाद के जरिए किसी भी अंतरराज्यीय समस्या को सुलझाया जा सकता है। उन्होंने इस सफलता को 'टीम भारत' की भावना का उत्कृष्ट उदाहरण बताया और कहा कि यह समझौता दोनों राज्यों के विशाल भौगोलिक क्षेत्रों, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, किसानों के हितों और आम जनता की पेयजल जरूरतों को हमेशा के लिए सुरक्षित करेगा।

1973 के समझौते से लेकर राज्य विभाजन तक: क्यों अटका था सोन जल विवाद?

इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि वर्ष 1973 में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और तत्कालीन अविभाजित बिहार के बीच हुए त्रिपक्षीय समझौते से जुड़ी है, जिसमें सोन नदी के जल बंटवारे और मध्य प्रदेश स्थित बाणसागर बांध परियोजना की लागत साझेदारी तय की गई थी। हालांकि, वर्ष 2000 में बिहार से अलग होकर झारखंड के गठन के बाद जल वितरण पर नया गतिरोध पैदा हो गया। झारखंड का तर्क था कि बाणसागर का बड़ा कैचमेंट एरिया उसके अधिकार क्षेत्र में आता है इसलिए उसे अधिक हिस्सा मिलना चाहिए, जबकि बिहार 1973 के मूल समझौते के तहत अपने जल आवंटन पर अडिग था। यह असहमति पिछले 25 वर्षों से अनसुलझी बनी हुई थी।

बिहार के 8 जिलों को संजीवनी: पटना, भोजपुर, रोहतास समेत बड़े इलाके को लाभ

इस नए समझौते से बिहार के शाहाबाद और मगध प्रमंडल के कृषि क्षेत्रों को व्यापक लाभ मिलेगा। केंद्रीय गृह मंत्री के अनुसार, बिहार के भोजपुर, बक्सर, रोहतास, कैमूर, औरंगाबाद, अरवल, गया और पटना जिलों के किसानों को अब खेती के लिए पर्याप्त सिंचाई जल और आम जनता को निर्बाध पेयजल उपलब्ध होगा। इससे राज्य के ग्रामीण इलाकों में जल संकट दूर होगा और कृषि उत्पादकता में सुधार आएगा।

झारखंड के पलामू और गढ़वा के किसानों के लिए वरदान

समझौते से झारखंड के सूखा प्रभावित पलामू और गढ़वा जिलों की तस्वीर भी बदलेगी। राज्य गठन के बाद से ही इन इलाकों में सोन नदी के पानी की हिस्सेदारी की मांग उठती रही थी। अब इन क्षेत्रों में कृषि सिंचाई के साथ-साथ गंभीर पेयजल समस्याओं का स्थायी निराकरण हो सकेगा, जिससे दोनों राज्यों के बीच जल आवंटन का ढांचा पूरी तरह स्पष्ट हो गया है।