बिहार में दौड़ेगी बुलेट ट्रेन: इन 8 जिलों से गुजरेगा हाई-स्पीड कॉरिडोर, 5 शहरों में स्टेशन की तैयारी

बिहार में दौड़ेगी बुलेट ट्रेन: इन 8 जिलों से गुजरेगा हाई-स्पीड कॉरिडोर, 5 शहरों में स्टेशन की तैयारी

बिहार में रेल यातायात के बुनियादी ढांचे को विश्वस्तरीय बनाने की दिशा में एक बड़ी और ऐतिहासिक शुरुआत होने जा रही है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी बुलेट ट्रेन परियोजना के तहत प्रस्तावित नॉर्दर्न हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर से बिहार को सीधे जोड़ने की रूपरेखा तेजी से आगे बढ़ रही है। इस अत्याधुनिक रेल नेटवर्क के धरातल पर उतरने के बाद राज्य के 8 प्रमुख जिलों को हाई-स्पीड कनेक्टिविटी का सीधा लाभ मिलेगा। इससे न केवल यात्रियों के सफर के घंटों में भारी कमी आएगी, बल्कि पश्चिमी बिहार से लेकर पूर्वोत्तर के प्रवेश द्वार सीमांचल तक व्यापार, उद्योग और नए रोजगार के बड़े अवसर खुलेंगे।

रूट पर एक नजर

नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) द्वारा तैयार किए जा रहे रूट अलाइनमेंट के मुताबिक, यह प्रस्तावित कॉरिडोर बिहार के बक्सर, भोजपुर, पटना, बेगूसराय, खगड़िया, कटिहार, पूर्णिया और किशनगंज जिलों की सीमाओं से होकर गुजरेगा। मौजूदा योजना में राज्य के पांच प्रमुख रणनीतिक स्थानों पर अत्याधुनिक बुलेट ट्रेन स्टेशन विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया है। इनमें बक्सर, पटना, बेगूसराय, खगड़िया और कटिहार के नाम शामिल हैं, हालांकि स्टेशनों की अंतिम लोकेशन और तकनीकी मंजूरी पर अंतिम मुहर विस्तृत सर्वे के बाद लगेगी। इसके अलावा आरा, पूर्णिया और किशनगंज में भी हॉल्ट या स्टॉपेज देने के विकल्पों पर काम चल रहा है। राजधानी पटना की बात करें तो यात्रियों की सुविधा को देखते हुए फुलवारीशरीफ स्थित एम्स (AIIMS) के आसपास मुख्य टर्मिनल स्टेशन बनाने की संभावना पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।

यह पूरा रेल प्रोजेक्ट प्रस्तावित 1550 किलोमीटर लंबे दिल्ली-वाराणसी-सिलीगुड़ी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का बेहद अहम हिस्सा है। इस महापरियोजना के जरिए देश की राजधानी दिल्ली को आगरा, कानपुर, लखनऊ, अयोध्या, प्रयागराज, वाराणसी, पटना और सिलीगुड़ी जैसे महानगरों और धार्मिक-आर्थिक केंद्रों से सीधी रफ्तार में पिरोया जाएगा, जिसका भविष्य में गुवाहाटी तक विस्तार होना तय माना जा रहा है। हालांकि, बिहार के भौगोलिक परिदृश्य को देखते हुए इस विशाल ट्रैक को बिछाने में उपजाऊ कृषि भूमि के अधिग्रहण और कई जिलों के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की तकनीकी चुनौतियां सामने आएंगी। साथ ही, गंगा समेत कई प्रमुख नदियों पर विशाल रेल पुलों का निर्माण भी इस प्रोजेक्ट का सबसे जटिल तकनीकी पहलू रहेगा, जिसे पूरा करने के लिए डीपीआर (DPR) स्तर पर विशेष इंजीनियरिंग योजनाएं तैयार की जा रही हैं।