शिक्षकों के ट्रांसफर-पोस्टिंग से लेकर सैलरी तक... 29 एजेंडों पर होगा मंथन

शिक्षकों के ट्रांसफर-पोस्टिंग से लेकर सैलरी तक... 29 एजेंडों पर होगा मंथन

उत्तर प्रदेश के शिक्षक वर्ग और लाखों सरकारी कर्मचारियों के लिए इस वक्त की सबसे बड़ी और बेहद राहत भरी खबर राजधानी लखनऊ से सामने आ रही है। राज्य के परिषदीय और माध्यमिक विद्यालयों में तैनात शिक्षकों की बहुप्रतीक्षित ट्रांसफर-पोस्टिंग नीति (Transfer-Posting Policy), आपसी तबादलों, सैलरी स्ट्रक्चर, प्रमोशन और सेवा शर्तों से जुड़े कुल 29 अत्यंत महत्वपूर्ण एजेंडों पर मुहर लगाने के लिए उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल की एक उच्चस्तरीय महाबैठक बुलाई गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में होने वाली इस कैबिनेट बैठक में शिक्षा विभाग के इन सुलगते मुद्दों पर ठोस और नीतिगत फैसले लिए जाने की पूरी संभावना है। पिछले कई महीनों से अपने तबादलों और वेतन संबंधी विसंगतियों को दूर करवाने के लिए शिक्षा निदेशालय और शासन के चक्कर काट रहे लाखों शिक्षकों की सांसें इस बैठक के नतीजों पर टिकी हुई हैं। आइए जानते हैं 29 एजेंडों वाली इस महाबैठक में शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए क्या-क्या बड़े फैसले आने वाले हैं।

शिक्षकों के ट्रांसफर-पोस्टिंग और ऑनलाइन स्थानांतरण नीति पर लगेगी अंतिम मुहर

उत्तर प्रदेश के बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभागों में ट्रांसफर और पोस्टिंग हमेशा से एक पेचीदा और संवेदनशील मुद्दा रहा है। हर साल हजारों शिक्षक अपने गृह जनपदों या सुगम विद्यालयों में आने के लिए वर्षों से आवेदन करते रहे हैं, लेकिन पारदर्शी नीति के अभाव में कई बार मामले अटक जाते हैं। इस बार कैबिनेट के 29 एजेंडों में शिक्षकों की सुगम-दुर्गम तबादला नीति, पारस्परिक (Mutual) ट्रांसफर के नियमों को और अधिक सरल बनाने तथा ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया को पूरी तरह से भ्रष्टाचार-मुक्त करने का प्रस्ताव शामिल किया गया है। नए प्रस्ताव के तहत अब शिक्षकों को मानवीय आधार पर (जैसे गंभीर बीमारियां, महिला शिक्षकों की प्राथमिकता और पति-पत्नी दोनों के सरकारी सेवा में होने पर नजदीकी जिला आवंटन) विशेष प्राथमिकता दिए जाने की पुख्ता व्यवस्था की जा रही है।

सैलरी विसंगतियों, एरियर भुगतान और वित्तीय लाभों पर भी होगी बड़ी चर्चा

शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के वेतन (Salary) और भत्तों से जुड़ी कई फाइलें पिछले काफी समय से वित्त और शिक्षा विभाग के बीच अटकी हुई थीं। नए एजेंडे के मुताबिक, सातवें वेतन आयोग के बचे हुए एरियर, चयन वेतनमान (Selection Pay Scale), प्रोन्नत वेतनमान और पुरानी पेंशन योजना (OPS) से जुड़े तकनीकी पेंचों को सुलझाने के लिए विशेष निर्देश जारी किए जा सकते हैं। इसके साथ ही, समय पर वेतन भुगतान न होने की समस्या से निपटने के लिए मानव संपदा पोर्टल (Manav Sampada Portal) के जरिए वेतन आहरण की प्रक्रिया को पूरी तरह से ऑटोमेटेड और पारदर्शी बनाने का खाका भी इस बैठक में खींचा जाएगा, जिससे किसी भी शिक्षक को महीने की शुरुआत में सैलरी के लिए दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।

परिषदीय स्कूलों के कायाकल्प और शिक्षकों के अकादमिक प्रमोशन पर भी रहेगा फोकस

केवल तबादलों और सैलरी ही नहीं, बल्कि राज्य के परिषदीय विद्यालयों में शिक्षा के स्तर को सुधारने और शिक्षकों के प्रशासनिक प्रमोशन (जैसे सहायक अध्यापकों से प्रधानाध्यापक और बीएसए कार्यालयों से जुड़े प्रशासनिक पदों पर पदोन्नति) के मामलों पर भी इस बैठक में मुहर लग सकती है। उत्तर प्रदेश सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य के दूरदराज के ग्रामीण इलाकों में तैनात शिक्षक पूरी निष्ठा और उत्साह के साथ शिक्षण कार्य करें, इसके लिए उनकी जायज मांगों और सर्विस से जुड़ी अड़चनों को समयबद्ध तरीके से दूर किया जाए। शिक्षकों के प्रमोशन न होने के कारण जो पद सालों से खाली पड़े थे, उन्हें भरने के लिए इस कैबिनेट बैठक में रास्ते साफ किए जाने की उम्मीद है।

राज्य कर्मचारियों और सहायता प्राप्त (Aided) विद्यालयों के शिक्षकों के लिए भी राहत के संकेत

इस कैबिनेट बैठक के दायरे में केवल बेसिक और माध्यमिक शिक्षा के शिक्षक ही नहीं, बल्कि सहायता प्राप्त (Aided) जूनियर और उच्च माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षक तथा शिक्षणेत्तर कर्मचारी भी शामिल हैं। एडेड स्कूलों में प्रबंध समितियों के हस्तक्षेप को कम करने और शिक्षकों के सेवा संरक्षण के नियमों को और अधिक सख्त तथा पारदर्शी बनाने के प्रस्ताव पर भी विचार किया जा रहा है। सरकार यह चाहती है कि प्रदेशभर में शिक्षा का माहौल पूरी तरह से सुगम और तनावमुक्त हो, ताकि शिक्षक बिना किसी प्रशासनिक दबाव के बच्चों के भविष्य को संवारने में अपना शत-प्रतिशत योगदान दे सकें।

बैठक के बाद कभी भी आ सकता है आधिकारिक शासनादेश (GO), शिक्षकों में भारी उत्सुकता

जैसे ही यह खबर मीडिया और शिक्षक संघों के बीच फैली है, पूरे उत्तर प्रदेश के शिक्षक संगठनों और कर्मचारी संघों में हलचल तेज हो गई है। विभिन्न शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों ने उम्मीद जताई है कि इस बार कैबिनेट बैठक में उनके पक्ष में ठोस निर्णय आएंगे और सालों से लंबित पड़ी ट्रांसफर-पोस्टिंग व सैलरी की फाइलें हमेशा के लिए निस्तारित हो जाएंगी। बैठक समाप्त होने के ठीक बाद शासन द्वारा इन 29 एजेंडों पर मुहर लगने के बाद विस्तृत शासनादेश (Government Order) जारी किए जाने की उम्मीद है। लाखों शिक्षकों की निगाहें अब पूरी तरह से लखनऊ के इस ऐतिहासिक फैसले पर टिकी हुई हैं।