किसानों के लिए 2,700 करोड़ का बड़ा तोहफा: 54 बाजार समितियां बनेंगी हाईटेक, मिलेंगी ये 5 जबरदस्त सुविधाएं
बिहार में किसानों की कृषि उपज को सुरक्षित रखने और उन्हें उनकी मेहनत का उचित मूल्य दिलाने के लिए नीतीश सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य भर की 54 बाजार समितियों के कायाकल्प और आधुनिकीकरण के लिए लगभग 2,700 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट खर्च किया जा रहा है।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना का सीधा मकसद राज्य के अन्नदाताओं को बिचौलियों के चंगुल से मुक्त कराकर सीधे बड़े बाजारों, खरीदारों और राष्ट्रीय स्तर के व्यापारिक नेटवर्क से जोड़ना है। इसके तहत परंपरागत मंडियों को बहुमंजिला आधुनिक कृषि परिसरों में बदला जा रहा है, जहां फल, हरी सब्जियों, अनाज, दूध, मछली और फूलों की बिक्री के लिए सर्वसुविधायुक्त अलग-अलग जोन तैयार किए जा रहे हैं ताकि किसानों और थोक खरीदारों दोनों को एक ही छत के नीचे पारदर्शी माहौल मिल सके।
इस आधुनिक परियोजना से बिहार के किसानों को पांच बड़े स्तरों पर सीधा फायदा मिलेगा। पहला, बहुमंजिला हाईटेक मंडियों में व्यवस्थित व्यापारिक ढांचे से खरीद-फरोख्त आसान होगी। दूसरा, बड़े पैमाने पर बनाए जा रहे अत्याधुनिक वेयरहाउस और कोल्ड स्टोरेज की मदद से फसल खराब होने का डर खत्म होगा और किसानों को मजबूरी में औने-पौने दामों पर उपज बेचने से राहत मिलेगी। तीसरा, दूर-दराज से आने वाले किसानों और व्यापारियों के ठहरने के लिए 40 बेड वाले वातानुकूलित गेस्ट हाउस, सस्ती कैंटीन तथा महिला किसानों के लिए अलग विश्राम गृह व स्वच्छता सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।
चौथा, इन सभी समितियों को नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट यानी ई-नाम (e-NAM) के डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जा रहा है, जिससे किसान देश के किसी भी कोने से सीधे ऑनलाइन बोली लगवा सकेंगे। पांचवां, परिसर के भीतर चौड़ी पक्की सड़कें, 24 घंटे सौर ऊर्जा, जलनिकासी और सुरक्षा के लिए हाई-डेफिनिशन सीसीटीवी कैमरों का मजबूत बुनियादी ढांचा तैयार किया जा रहा है।
कृषि विभाग से प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार, परियोजना तेजी से धरातल पर उतर रही है। गया की चंदौती और वैशाली जिले की बाजार समिति में आधुनिक निर्माण कार्य पूरी तरह संपन्न हो चुका है, जबकि पूर्वी चंपारण और पश्चिमी चंपारण की समितियों में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट का काम अपने अंतिम चरण में है। सरकार के इस कदम से राज्य के कृषि व्यापार को नए पंख लगने की पूरी उम्मीद है, हालांकि किसानों की आमदनी में असल बढ़ोतरी इस बात पर निर्भर करेगी कि इन हाईटेक सुविधाओं का स्थानीय स्तर पर संचालन कितना प्रभावी और पारदर्शी बना रहता है।