मोतिहारीः एक साल पुरानी तस्वीर का सहारा, दलालों ने रचा षड्यंत्र! जानें पिपरा थानाध्यक्ष निलंबन कांड का पूरा सच

मोतिहारीः एक साल पुरानी तस्वीर का सहारा, दलालों ने रचा षड्यंत्र! जानें पिपरा थानाध्यक्ष निलंबन कांड का पूरा सच

बिहार के पूर्वी चंपारण यानी मोतिहारी जिले में इन दिनों पुलिस प्रशासन के भीतर और आम चर्चाओं में पिपरा थानाध्यक्ष के निलंबन का मामला सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है। किसी भी पुलिस अधिकारी पर जब गाज गिरती है, तो उसके पीछे आमतौर पर प्रशासनिक लापरवाही या भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप माने जाते हैं, लेकिन मोतिहारी के पिपरा थाना क्षेत्र में घटी इस घटना ने पूरे पुलिस विभाग को भी चौंका कर रख दिया है। शुरुआती दौर में जब यह खबर सामने आई कि एक मामले में थानाध्यक्ष को निलंबित कर दिया गया है, तो हर कोई हैरान रह गया कि आखिर ऐसा क्या हो गया जो इतनी कड़ी कार्रवाई करनी पड़ी। हालांकि, जैसे-जैसे इस पूरे प्रकरण की परतें खुलनी शुरू हुईं और आंतरिक जांच का दायरा आगे बढ़ा, तो दूध का दूध और पानी का पानी सामने आ गया। पता चला कि जिस मामले को आधार बनाकर उस पुलिस अधिकारी के खिलाफ एक्शन लिया गया था, वह असल में न्याय की मांग नहीं बल्कि एक सुनियोजित और खतरनाक आपराधिक षड्यंत्र का हिस्सा था, जिसे इलाके के सक्रिय दलालों और भू-माफियाओं ने मिलकर अंजाम दिया था।

एक साल पुरानी तस्वीर का सहारा लेकर दलालों ने रचा था झूठा और मनगढ़ंत षड्यंत्र

इस सनसनीखेज खुलासे के सबसे चौकाने वाले पहलू के रूप में यह बात सामने आई है कि थानाध्यक्ष को फंसाने और उनके खिलाफ उच्चाधिकारियों तक झूठी शिकायतें पहुंचाने के लिए दलालों ने एक साल पुरानी तस्वीर का बेशर्मी से इस्तेमाल किया था। पिपरा इलाके में अवैध जमीन के कब्जे, बालू के अवैध कारोबार और अन्य आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त रहने वाले कुछ दलाल और आपराधिक प्रवृत्ति के लोग इस ईमानदार पुलिस अधिकारी के सख्त रवैये से बेहद परेशान थे, क्योंकि थानाध्यक्ष ने उनके अवैध धंधों पर पूरी तरह से नकेल कस रखी थी। अपने काले कारोबार को फिर से शुरू करने और अधिकारी को रास्ते से हटाने के लिए इन दलालों ने काफी समय पहले की एक ऐसी तस्वीर को हथियार बनाया, जिसका वर्तमान घटनाक्रम या किसी भी अवैध गतिविधि से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं था। उस पुरानी तस्वीर को पूरी तरह से एडिट या गलत संदर्भ के साथ पेश करके सोशल मीडिया और उच्च अधिकारियों के पास वायरल किया गया, ताकि यह झूठा नैरेटिव गढ़ा जा सके कि थानाध्यक्ष किसी गलत गतिविधियों में संलिप्त हैं। इस शातिर चाल के जरिए दलाल पुलिस प्रशासन की आंखों में धूल झोंकने और अपने नापाक मंसूबों को पूरा करने में कुछ समय के लिए सफल भी रहे, लेकिन सच ज्यादा दिनों तक छिप नहीं सका।

जांच में हुआ दूध का दूध और पानी का पानी, दोषी दलालों पर कसेगा शिकंजा

जब इस पूरे मामले की गहन और उच्च स्तरीय तकनीकी जांच कराई गई, तो यह पूरा काला सच उजागर हो गया कि किस तरह से एक साल पुरानी तस्वीर का दुरुपयोग करके एक ईमानदार पुलिसकर्मी की छवि को धूमिल किया गया और उन्हें झूठे आरोप में निलंबित कराया गया। जांच रिपोर्ट में यह साफ हो गया कि थानाध्यक्ष के खिलाफ लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह से बेबुनियाद, मनगढ़ंत और दलालों द्वारा रची गई एक दुर्भावनापूर्ण साजिश का नतीजा थे। इस खुलासे के बाद मोतिहारी पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है और उन सभी दलालों तथा षड्यंत्रकारियों की पहचान की जा रही है जिन्होंने इस गंदी खेल के पीछे अपनी रोटियां सेकी थीं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वर्दी की गरिमा को ठेस पहुंचाने और फर्जी दस्तावेजों तथा तस्वीरों के आधार पर प्रशासनिक व्यवस्था को गुमराह करने वाले इस गिरोह को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि कैसे असामाजिक तत्व अपने स्वार्थ के लिए सिस्टम का दुरुपयोग करते हैं, लेकिन सच्चाई की जीत हमेशा होती है।