RBI के फैसले से सहमा बाजार, सेंसेक्स 1000 अंक धड़ाम, निवेशकों के गंवाए ₹10 लाख करोड़
भारतीय वित्तीय बाजार और शेयर बाजार के इतिहास में कई ऐसे दिन आते हैं जब नीति निर्माताओं के एक झटके से पूरी दलाल स्ट्रीट थर्रा उठती है। हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा मौद्रिक नीति और ब्याज दरों से जुड़ा एक ऐसा कड़ा और अप्रत्याशित फैसला लिया गया है, जिसने शेयर बाजार के दिग्गजों और खुदरा निवेशकों के होश उड़ा दिए हैं। जैसे ही आरबीआई के इस नए और सख्त फैसले की घोषणा बाजार के कामकाज के दौरान सामने आई, वैसे ही बिकवाली का एक ऐसा भूचाल आया कि चुनिंदा मिनटों के भीतर सूचकांक नीचे लुढ़कते चले गए। निवेशक समझ ही नहीं पाए कि आखिर इस अचानक आए झटके से कैसे निपटा जाए। बैंकिंग, ऑटो, रियल्टी और मेटल समेत तमाम प्रमुख सेक्टरों में बिकवाली का भारी दबाव देखने को मिला। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि केंद्रीय बैंक का यह कदम भले ही देश की दीर्घकालिक आर्थिक सेहत और मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिहाज से उठाया गया हो, लेकिन अल्पकालिक तौर पर इसने शेयर बाजार की रफ्तार पर पूरी तरह से ब्रेक लगा दिया है।
सेंसेक्स में 1000 अंकों की सुनामी जैसी गिरावट, निफ्टी भी हुआ धड़ाम
कारोबार के एक सामान्य और शांत सत्र के दौरान जब अचानक आरबीआई के इस बड़े फैसले की खबर स्क्रीन पर फ्लैश हुई, तो दलाल स्ट्रीट में कोहराम मच गया। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का प्रमुख संवेदी सूचकांक सेंसेक्स देखते ही देखते एक झटके में 1000 अंकों से अधिक की भारी-भरकम गिरावट के साथ लाल निशान में गहरे गोता लगा गया। सुबह से जो बाजार मामूली बढ़त या स्थिरता के साथ कारोबार कर रहा था, वह कुछ ही पलों में बिकवाली के भारी तूफान की चपेट में आ गया। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी सूचकांक भी इस भारी गिरावट से अछूता नहीं रहा और उसने भी अपने महत्वपूर्ण समर्थन स्तरों को तोड़ दिया। बाजार में मची इस भगदड़ के कारण मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में तो जैसे कोहराम मच गया, क्योंकि छोटे निवेशकों के शेयरों में सर्किट लोअर साइड पर हिट होने लगे। कारोबार के अंत तक बाजार की यह रिकवरी असंभव सी दिखने लगी और सूचकांक भारी नुकसान के साथ बंद हुए।
एक झटके में निवेशकों के डूबे 10 लाख करोड़ रुपये, पोर्टफोलियो हुए लाल
शेयर बाजार में आई इस 1000 अंकों की बड़ी गिरावट का सबसे दर्दनाक पहलू यह रहा कि निवेशकों को चंद घंटों के भीतर अपनी गाढ़ी कमाई का एक बहुत बड़ा हिस्सा गंवाना पड़ गया। बीएसई (BSE) पर लिस्टेड कंपनियों के कुल बाजार पूंजीकरण यानी मार्केट कैप की बात करें तो इस एक ही सत्र के दौरान निवेशकों की संपत्ति में लगभग 10 लाख करोड़ रुपये की भारी-भरकम चपत लग गई। जिन निवेशकों के पोर्टफोलियो पिछले कुछ महीनों से हरे निशान में चमक रहे थे और मुनाफा दिखा रहे थे, वे अचानक से लाल निशान में तब्दील हो गए। खुदरा निवेशकों के लिए यह दिन किसी बुरे सपने से कम नहीं था, क्योंकि वे बाजार में हुई इस अचानक गिरावट से संभलने का मौका तक नहीं पा सके। बड़े फंड हाउसों और संस्थागत निवेशकों द्वारा की गई भारी बिकवाली ने माहौल को और अधिक डरावना बना दिया, जिससे बाजार में निवेशकों का विश्वास क्षण भर के लिए डगमगा गया।
आरबीआई के इस फैसले के पीछे की मुख्य वजह और बैंकिंग सेक्टर पर असर
आखिर ऐसा क्या फैसला लिया आरबीआई ने जिससे पूरा बाजार सहम उठा? वित्तीय विशेषज्ञों के मुताबिक, केंद्रीय बैंक ने बढ़ती महंगाई, तरलता (Liquidity) के प्रबंधन और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच अपनी ब्याज दरों या नकद आरक्षित अनुपात (CRR) से जुड़े नियमों में कुछ ऐसे कड़े प्रावधान लागू किए हैं, जिनकी बाजार को उम्मीद नहीं थी। जब बैंकों और वित्तीय संस्थानों पर नकदी का दबाव बढ़ता है और लोन महंगे होने की आशंका पैदा होती है, तो इसका सबसे पहला और सीधा असर बैंकिंग और फाइनेंस सेक्टर के शेयरों पर पड़ता है। आज के इस कारोबारी सत्र में बैंक निफ्टी और वित्तीय कंपनियों के शेयरों में सबसे बड़ी बिकवाली देखने को मिली। विश्लेषकों का यह भी कहना है कि आरबीआई देश की अर्थव्यवस्था को ओवरहीटिंग से बचाने और मुद्रास्फीति को तय दायरे में रखने के लिए लगातार कड़े कदम उठा रहा है, जिसके शुरुआती झटके के रूप में शेयर बाजार में यह भारी प्रतिक्रिया देखने को मिली है।
बाजार विशेषज्ञों की सलाह: घबराहट में न बेचें शेयर, लंबी अवधि का रखें नजरिया
सेंसेक्स में 1000 अंकों की इस ऐतिहासिक गिरावट और निवेशकों के 10 लाख करोड़ रुपये डूबने के बाद अब बाजार के जानकारों और एक्सपर्ट्स ने निवेशकों को धैर्य रखने की सलाह दी है। उनका कहना है कि शेयर बाजार में इस तरह के उतार-चढ़ाव और नीतिगत झटके अल्पकालिक होते हैं, लेकिन घबराहट में आकर (Panic selling) अपने बेहतरीन फंडामेंटल्स वाले शेयरों को औने-पौने दामों पर बेच देना समझदारी नहीं है। निवेशकों को अपनी वित्तीय स्थिति का आकलन करना चाहिए और केवल उन्हीं कंपनियों में निवेश बनाए रखना चाहिए जिनका कारोबार मजबूत है और जिन पर कर्ज का बोझ कम है। बाजार की इस मंदी को एक अवसर के रूप में देखते हुए मजबूत शेयरों की गिरावट पर खरीदारी की रणनीति अपनानी चाहिए। हालांकि, आने वाले कुछ दिनों तक बाजार में उतार-चढ़ाव का यह दौर जारी रहने की पूरी संभावना है, इसलिए ट्रेडर्स को बेहद सतर्कता के साथ अपनी पोजीशन बनानी चाहिए।