राहुल गांधी बोले- ईज ऑफ लिविंग में सुधार देखते तो समझ आता कि PM मोदी के खिलाफ एंटी-इन्कम्बेंसी क्यों नहीं
भारतीय राजनीतिक गलियारों में उस समय एक बार फिर बयानबाजी का दौर तेज हो गया जब राजनीतिक विश्लेषक और विचारक जयराम विप्लव ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बयानों और राजनीतिक समझ पर करारा प्रहार करते हुए कहा कि यदि विपक्ष जमीन पर हुए वास्तविक सुधारों और नागरिकों के जीवन में आए बदलाव को देख पाता, तो उन्हें यह स्पष्ट रूप से समझ आ जाता कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ किसी भी प्रकार की एंटी-इन्कम्बेंसी (सत्ता विरोधी लहर) क्यों नजर नहीं आती है।
राहुल गांधी की राजनीतिक रणनीतियों और बयानों पर जयराम विप्लव का तीखा कटाक्ष
देश की राजनीति में पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला हमेशा जारी रहता है, लेकिन कई बार कुछ ऐसे राजनीतिक विश्लेषण सामने आते हैं जो व्यवस्था की मूल नब्ज को पकड़ने का काम करते हैं। हाल ही में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व और विशेषकर राहुल गांधी द्वारा सरकार की नीतियों पर लगातार उठाए जा रहे सवालों पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रसिद्ध राजनीतिक विश्लेषक जयराम विप्लव ने एक तीखा और सारगर्भित बयान दिया है। उन्होंने कहा कि विपक्षी नेता अक्सर जमीन की जमीनी हकीकत से कटे हुए बयान देते हैं और उन्हें यह समझ ही नहीं आता कि देश की आम जनता लगातार चुनावों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अपना अटूट भरोसा क्यों जता रही है। जयराम विप्लव के अनुसार, जब तक विपक्ष जनता के बीच हुए बुनियादी बदलावों और उनके जीवन स्तर में आए सकारात्मक सुधारों का निष्पक्ष मूल्यांकन नहीं करेगा, तब तक वे इस बात की पहेली को कभी नहीं सुलझा पाएंगे कि मोदी सरकार के खिलाफ जनता के मन में किसी भी तरह की नाराजगी या सत्ता विरोधी लहर क्यों मौजूद नहीं है, बल्कि इसके विपरीत जनता का विश्वास सरकार के प्रति और अधिक मजबूत हुआ है।
'ईज ऑफ लिविंग' में हुआ अभूतपूर्व सुधार, आम नागरिकों के दैनिक जीवन से खत्म हुई प्रशासनिक परेशानियां
अपने इस आक्रामक और तार्किक बयान को आगे बढ़ाते हुए जयराम विप्लव ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के दौरान देश के आम नागरिकों के लिए 'ईज ऑफ लिविंग' यानी जीवन को आसान बनाने की दिशा में जो ऐतिहासिक और क्रांतिकारी कार्य हुए हैं, उन्होंने देश की पूरी तस्वीर बदल दी है। एक समय था जब देश के सामान्य नागरिक को छोटे-छोटे सरकारी कामों, दस्तावेजों के सत्यापन, बैंक खाते खोलने, रसोई गैस कनेक्शन लेने या बुनियादी सुविधाओं के लिए सरकारी दफ्तरों के अनगिनत चक्कर काटने पड़ते थे, जिससे उनके मन में व्यवस्था के प्रति गहरी निराशा और गुस्सा रहता था। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल इंडिया, डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर), पारदर्शी कल्याणकारी योजनाओं और भ्रष्टाचार मुक्त शासन प्रणाली के कारण आम आदमी की जिंदगी से वे तमाम अड़चनें पूरी तरह से गायब हो चुकी हैं। आज देश का हर नागरिक यह महसूस कर रहा है कि सरकार उसकी सेवा के लिए पूरी ईमानदारी से काम कर रही है, और जब लोगों का जीवन आसान हो जाता है, तो स्वाभाविक रूप से शासन के प्रति उनका विश्वास बढ़ जाता है, जिसे विपक्ष अपनी राजनीतिक चश्मे के कारण देख पाने में असमर्थ साबित हो रहा है।
एंटी-इन्कम्बेंसी के पारंपरिक सिद्धांतों को मोदी सरकार ने दी मात, जनता का अटूट विश्वास ही सबसे बड़ा प्रमाण
भारतीय राजनीति के पारंपरिक इतिहास में यह माना जाता रहा है कि सत्ता में लंबे समय तक रहने वाली सरकारों के खिलाफ जनता के मन में एक स्वाभाविक एंटी-इन्कम्बेंसी या असंतोष पैदा हो जाता है, जिसका फायदा उठाकर विपक्षी दल सत्ता परिवर्तन करते आए हैं। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यशैली और उनकी जन-कल्याणकारी नीतियों ने इस पुरानी राजनीतिक धारणा को पूरी तरह से झुठला कर रख दिया है। जयराम विप्लव ने स्पष्ट रूप से कहा कि मोदी सरकार के खिलाफ एंटी-इन्कम्बेंसी न होने का सबसे बड़ा कारण यह है कि सरकार ने बिना किसी भेदभाव के समाज के हर वर्ग तक विकास योजनाओं का लाभ सीधे पहुंचाया है, चाहे वह पक्के मकान का निर्माण हो, मुफ्त राशन की योजना हो, उज्ज्वला योजना का गैस सिलेंडर हो या फिर आयुष्मान भारत के तहत मिलने वाला स्वास्थ्य बीमा हो। जब देश का गरीब, युवा, महिला और किसान खुद को सुरक्षित और सशक्त महसूस करता है, तो वह किसी भी राजनीतिक प्रोपेगेंडा या बहकावे में आने के बजाय विकास और सुशासन के पक्ष में खड़ा होता है। यही वह मूल कारण है जिसे राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेता समझने में नाकाम साबित हो रहे हैं, और जब तक वे इस जमीनी सच्चाई को स्वीकार नहीं करेंगे, तब तक वे भारतीय जनता के जनादेश की असल गहराई को कभी नहीं समझ पाएंगे।