BSP ने नसीमुद्दीन और उनके बेटे को निकाला, लगाया ये बड़ा आरोप…

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यूपी किरण ब्यूरो

लखनऊ।। बसपा के कद्दावर नेता नसीमुद्दीन स‍िद्दीकी और उनके बेटे को बुधवार को पार्टी से निकाल द‍िया गया। बसपा के नेशनल जनरल सेक्रेटरी सतीश चंद्र मिश्रा ने नसीमुद्दीन पर टिकट देने के बदले पैसा लेने, नुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया है। नसीमुद्दीन के बेटे ने कहा, प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे

नसीमुद्दीन के बेटे अफजल सिद्दीकी ने कहा, ”हमने पूरी निष्ठा के साथ काम किया है, ये सभी जानते हैं। इसके बावजूद ऐसा डिसीजन लिया गया है। हमें नहीं मालूम ऐसा क्यों हुआ। हम प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए अपनी बात सबके सामने रखेंगे।”

नसीमुद्दीन सिद्दीकी के बारे में

नसीमुद्दीन का जन्म यूपी के बांदा जिले के सेवरा गांव में हुआ था। शुरुआत में उनका खेलों की तरफ काफी झुकाव था। वे वॉलीबॉल के नेशनल लेवल के प्लेयर रह चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने रेलवे के एक कॉन्ट्रैक्टर के रूप में भी काम किया।

1988 में नसीमुद्दीन ने अपने राजनीतिक कर‍ियर की शुरुआत की, बांदा नगर निगम के अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। इसके बाद उसी साल वे बसपा में शामिल हो गए। 1991 में उन्होंने चुनाव लड़ा जिसमें उन्हें सफलता मिली। हालांक‍ि दो साल बाद 1993 में हुए चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

रह चुके है कैबिनेट मंत्री

जब मायावती 1995 में पहली बार सीएम बनीं, तब नसीमुद्दीन को कैबिनेट मंत्री बनाया गया। इसके बाद 21 मार्च 1997 से 21 सितंबर 1997 तक मायावती की शॉर्ट टर्म गवर्नमेंट में भी वे मंत्री बने। 3 मई 2002 से 29 अगस्त 2003 तक एक साल के लिए वे कैबिनेट का भी हिस्सा रहे। इसके बाद 13 मई 2007 से 7 मार्च 2012 तक मायावती की फुल टाइम गवर्नमेंट में भी मंत्री रहे।

कुछ विवादो में फसे

प‍िछले साल नसीमुद्दीन को बीजेपी नेता दयाशंकर की पत्नी और बच्चों के खिलाफ अभद्र भाषा के इस्तेमाल के चलते काफी विरोध का सामना करना पड़ा था। दयाशंकर की पत्नी स्वाती सिंह ने उनके खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज कराया था।

वेस्ट यूपी की कमान सौंपी थी बेटे को

इसी साल हुए यूपी विधानसभा चुनाव में नसीमुद्दीन ने अपने बड़े बेटे अफजल को चुनावी मैदान में उतारा था। अफजल को वेस्ट यूपी में चुनाव के कैम्पेन‍िंग की कमान दी गई थी, ताकि वे वहां पर मुस्लिम वोटों की लामबंदी कर सकें।

इससे पहले अफजल 2014 में फतेहपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़े थे। इसके बाद वह अपने पिता के साथ पार्टी के प्रोग्राम में ही नजर आते थे।

फोटोः फाइल

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