दिल्ली की ट्रेनें कैंसिल, क्या टिकट का पूरा पैसा वापस मिलेगा, तत्काल बुकिंग का क्या? रेलवे के फैसले से एयरलाइंस की 'चांदी'
देश की राजधानी दिल्ली और उसके आसपास के रेलवे स्टेशनों से यात्रा करने वाले लाखों यात्रियों के लिए एक बार फिर बड़ी खबर सामने आई है। तकनीकी कारणों, पटरियों की मरम्मत, सुरक्षा रखरखाव या विभिन्न रूटों पर चल रहे भारी निर्माण कार्यों के चलते रेलवे प्रशासन ने दिल्ली आने-जाने वाली दर्जनों महत्वपूर्ण ट्रेनों को अचानक रद्द (कैंसिल) कर दिया है। इसके अलावा कई गाड़ियों के रूट बदले गए हैं और कई ट्रेनों को उनके निर्धारित समय से काफी देरी से संचालित किया जा रहा है। ट्रेनें रद्द होने की इस खबर के सामने आते ही दिल्ली के नई दिल्ली, पुरानी दिल्ली, आनंद विहार और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की भारी भीड़ जमा हो गई। जिन लोगों ने महीनों पहले अपने परिवार के साथ छुट्टियों या त्योहारों के लिए रिजर्वेशन करा रखा था, उनका पूरा शेड्यूल धराशायी हो गया है। रेलवे के इस अचानक आए फैसले से यात्रियों में जहां भारी आक्रोश और निराशा देखने को मिल रही है, वहीं स्टेशन पर फंसे लोग अगली वैकल्पिक व्यवस्था की तलाश में भटकने को मजबूर हैं।
क्या कैंसिल ट्रेनों के टिकट का पूरा पैसा वापस मिलेगा? जानिए रेलवे के नियम
भारतीय रेलवे के नियमों के अनुसार यदि किसी यात्री की ट्रेन रेलवे प्रशासन द्वारा पूरी तरह से रद्द कर दी जाती है, तो उस स्थिति में यात्रियों को परेशान होने की बिल्कुल जरूरत नहीं होती है, क्योंकि रेलवे द्वारा पूरा रिफंड यानी फुल फेयर वापस किया जाता है। यदि आपने काउंटर से टिकट बुक कराया है, तो आप तय समय सीमा के भीतर किसी भी रिजर्वेशन काउंटर पर जाकर अपना पूरा पैसा नकद वापस ले सकते हैं। इसके विपरीत, यदि आपने ऑनलाइन यानी आईआरसीटीसी (IRCTC) की वेबसाइट या मोबाइल ऐप के जरिए टिकट बुक किया है, तो आपको किसी भी प्रकार का टीडीआर (TDR) फाइल करने की आवश्यकता नहीं होती है। रेलवे का सिस्टम खुद-ब-खुद उस कैंसिलेशन को प्रोसेस करके आपके बैंक खाते, यूपीआई या क्रेडिट कार्ड में पूरा पैसा बिना किसी कटौती के स्वतः रिफंड कर देता है। यह प्रक्रिया आमतौर पर 3 से 7 कार्यদিप के भीतर पूरी हो जाती है, जिससे यात्रियों को आर्थिक नुकसान से बड़ी राहत मिलती है।
तत्काल टिकट बुकिंग और वेटिंग लिस्ट वाले यात्रियों की बढ़ी टेंशन
ट्रेनें रद्द होने और रूट डायवर्ट किए जाने के कारण उन यात्रियों की मुश्किलें सबसे ज्यादा बढ़ गई हैं जिन्हें किसी जरूरी काम से तुरंत यात्रा करनी है। जो लोग पहले से आरक्षित सीटों पर सफर करने वाले थे, वे अब तत्काल टिकट बुकिंग का सहारा ले रहे हैं, जिसके कारण एसी और स्लीपर क्लास की तत्काल सीटों पर भारी मारामारी देखने को मिल रही है। तत्काल काउंटर या ऑनलाइन बुकिंग शुरू होते ही कुछ ही सेकंड में सीटें फुल हो जाती हैं, और जो यात्री वेटिंग लिस्ट में रह जाते हैं, उन्हें अपनी यात्रा रद्द करनी पड़ रही है। रेलवे के इस बड़े फेरबदल के कारण टिकटिंग प्रणाली पर भारी दबाव आ गया है। एजेंटों और दलालों की चांदी कट रही है, जबकि आम और गरीब मुसाफिर अपनी जेब ढीली करने के बाद भी कन्फर्म सीट पाने के लिए दर-दर भटकने को विवश हैं। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि स्थिति को सामान्य बनाने के लिए अतिरिक्त स्पेशल ट्रेनें चलाने पर विचार किया जा रहा है, लेकिन तब तक यात्रियों को भारी कठिनाइयों का सामना करना ही पड़ेगा।
रेलवे के इन बड़े फैसलों से अचानक एयरलाइंस कंपनियों की हुई 'चांदी'
जब भी भारतीय रेलवे लंबी दूरी या मुख्य महानगरों की ट्रेनों को बड़े पैमाने पर रद्द करता है, तो उसका सीधा और सबसे बड़ा फायदा विमानन कंपनियों यानी एयरलाइंस को मिलता है। दिल्ली रूट की ट्रेनें कैंसिल होने और तत्काल टिकट न मिलने के कारण जिन यात्रियों के पास पैसे की कोई कमी नहीं है या जिन्हें हर हाल में अपने गंतव्य तक समय पर पहुंचना है, उन्होंने अब रेल यात्रा का विचार छोड़कर हवाई जहाज का रुख करना शुरू कर दिया है। स्थिति का फायदा उठाते हुए इंडिगो, एयर इंडिया, अकासा एयर और स्पाइसजेट जैसी प्रमुख एयरलाइंस कंपनियों ने दिल्ली से आने-जाने वाली उड़ानों के किराए में भारी उछाल कर दिया है। जो फ्लाइट टिकट सामान्य दिनों में बेहद सस्ते दामों पर मिल जाते थे, वे अब कई गुना महंगे बिक रहे हैं। इसके बावजूद मजबूरी में यात्रियों को महंगे हवाई टिकट खरीदने पड़ रहे हैं, जिससे विमानन कंपनियों की तिजोरियां भर रही हैं और उनकी इस स्थिति को देखकर बाजार में कहा जा रहा है कि रेलवे की बदहाली से एयरलाइंस की 'चांदी' हो गई है।
भारतीय रेलवे की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल और यात्रियों का दर्द
आम जनता और यात्री संघों का कहना है कि रेलवे द्वारा बिना किसी पूर्व और ठोस सूचना के इस तरह अचानक ट्रेनें रद्द कर देना यात्रियों के मौलिक अधिकारों के साथ खिलवाड़ है। लोग अपनी छुट्टियां महीनों पहले प्लान करते हैं, होटल बुक करते हैं और अपने ऑफिस से छुट्टी लेते हैं, लेकिन ऐन वक्त पर ट्रेन कैंसिलेशन का मैसेज आने से उनकी सारी योजनाएं पानी में मिल जाती हैं। रेलवे को अपनी मेंटेनेंस और ट्रैक सुधार की नीतियों में इस तरह का बदलाव करना चाहिए जिससे यात्रियों को कम से कम असुविधा हो। वैकल्पिक ट्रेनों की घोषणा रिफंड से पहले की जानी चाहिए ताकि लोगों को तुरंत राहत मिल सके। बहरहाल, दिल्ली की ट्रेनें रद्द होने के इस मौजूदा संकट से यह साफ हो गया है कि भारतीय परिवहन व्यवस्था में अभी भी समन्वय और यात्रियों की सुविधा के मामले में बहुत कुछ सुधार किए जाने की आवश्यकता है।