ट्रेन में भूलकर भी न बजाएं तेज आवाज में गाना, वरना लगेगा जुर्माना; जाना पड़ सकता है जेल

ट्रेन में भूलकर भी न बजाएं तेज आवाज में गाना, वरना लगेगा जुर्माना; जाना पड़ सकता है जेल

भारतीय रेलवे को देश की जीवन रेखा कहा जाता है, जिसमें रोजाना करोड़ों लोग अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए सफर करते हैं। जब आप ट्रेन में यात्रा करते हैं, तो आपका यह सफर आरामदायक और शांतिपूर्ण हो, इसके लिए रेलवे प्रशासन ने कई तरह के कड़े नियम और कानून बनाए हैं। लेकिन अक्सर देखने में आता है कि कुछ यात्री अपनी यात्रा के दौरान इन नियमों को ताक पर रख देते हैं और अपनी हरकतों से सहयात्रियों के लिए बड़ी परेशानी का सबब बन जाते हैं। खासकर मोबाइल फोन पर तेज आवाज में गाने बजाने, वीडियो देखने या बिना इयरफोन के लाउडस्पीकर पर रील्स देखने का चलन तेजी से बढ़ गया है। सार्वजनिक परिवहन में सफर करते समय इस तरह का गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार न केवल ट्रेन में बैठे अन्य यात्रियों की शांति को भंग करता है, बल्कि रेलवे के तय नियमों का खुला उल्लंघन भी माना जाता है। यदि आप भी ट्रेन में सफर करते समय इस तरह की लापरवाही बरतने के आदी हैं, तो अपनी इस आदत को तुरंत बदल लीजिए, क्योंकि अब रेलवे बोर्ड और आरपीएफ (RPF) ऐसे यात्रियों के खिलाफ बेहद सख्त रुख अपनाने जा रही है।

तेज आवाज में म्यूजिक और वीडियो चलाने से सहयात्रियों को होती है भारी मानसिक परेशानी

अक्सर लंबी दूरी की ट्रेनों या दैनिक लोकल ट्रेनों में सफर के दौरान कुछ लोग यह भूल जाते हैं कि वे किसी निजी कमरे में नहीं बल्कि एक सार्वजनिक और साझा जगह पर यात्रा कर रहे हैं। वे अपने स्मार्टफोन या ब्लूटूथ स्पीकर पर बेहद ऊंची आवाज में गाने, फिल्में या सोशल मीडिया रील्स बजाने लगते हैं। सोचिए, एक थका-हारा यात्री जो ट्रेन में सुकून की नींद लेने की कोशिश कर रहा है या कोई विद्यार्थी जो अपनी पढ़ाई में व्यस्त है, उसे यदि इस तरह के कर्कश शोर का सामना करना पड़े, तो उसकी मानसिक स्थिति पर कितना बुरा असर पड़ेगा। कई बार जब सहयात्री इस बात का विरोध करते हैं, तो बात तीखी बहस और झगड़े तक पहुंच जाती है। ट्रेन के भीतर इस तरह का माहौल न केवल अनुशासनहीनता को बढ़ावा देता है, बल्कि ट्रेन की बोगियों में आपसी तनाव का कारण भी बनता है। रेलवे प्रशासन को लगातार इस संबंध में यात्रियों की ओर से अनगिनत शिकायतें मिल रही थीं, जिसके बाद रेलवे ने इस पर कड़ा एक्शन लेने का मन बना लिया है।

रेलवे बोर्ड के सख्त निर्देश और कोर्ट के आदेश का कड़ाई से पालन

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि रेलवे अधिनियम और रेलवे बोर्ड के नियमों के अनुसार ट्रेनों में इस प्रकार की अशांति फैलाने वाले यात्रियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का प्रावधान पहले से ही मौजूद है। कुछ समय पहले एक मामले की सुनवाई करते हुए न्यायालय ने भी इस बात पर गहरी नाराजगी जताई थी कि सार्वजनिक परिवहन में सफर करने वाले नागरिकों को शांति से यात्रा करने का मौलिक अधिकार है। अदालत के निर्देशों और रेलवे की नई गाइडलाइंस के तहत अब ट्रेन के अंदर बिना इयरफोन के तेज आवाज में गाने बजाना, चिल्लाकर बात करना या मोबाइल पर तेज वॉल्यूम में वीडियो देखना दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है। ट्रेन के टीटीई (TTE), कोच अटेंडेंट और आरपीएफ के जवानों को यह विशेष निर्देश दिए गए हैं कि वे बोगियों में लगातार गश्त करें और ऐसे नियमों का उल्लंघन करने वाले यात्रियों की तुरंत पहचान करें।

लगेगा भारी-भरकम जुर्माना और जेल जाने तक की हो सकती है नौबत

यदि कोई यात्री ट्रेन के अंदर समझाने के बावजूद तेज आवाज में गाने बजाना बंद नहीं करता है या रेलवे स्टाफ के साथ बहस करता है, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। रेलवे नियमों के तहत ऐसे मामलों में मौके पर ही भारी-भरकम आर्थिक जुर्माना यानी फाइन वसूला जा सकता है। इसके अलावा, यदि मामला रेलवे सुरक्षा बल (RPF) या राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) तक पहुंच जाता है, तो यात्री को लोक शांति भंग करने और रेलवे अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत गिरफ्तार भी किया जा सकता है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अदालत द्वारा ऐसे मामलों में जेल भेजने की सजा का प्रावधान भी किया गया है। ट्रेन का सफर आपके लिए आनंददायक होना चाहिए, न कि किसी कानूनी मुकदमे या पुलिस थाने का चक्कर काटने का जरिया। इसलिए अपनी छोटी सी नासमझी के कारण अपनी पूरी यात्रा और भविष्य को संकट में न डालें।

रेलवे यात्रा के दौरान इन अन्य नियमों का पालन करना भी है अनिवार्य

तेज आवाज में गाने बजाने की पाबंदी के अलावा भी भारतीय रेलवे के कई ऐसे नियम हैं जिनके बारे में हर मुसाफिर को पूरी जानकारी होनी चाहिए। ट्रेन के डिब्बों में किसी भी प्रकार की ज्वलनशील सामग्री, पटाखे या खतरनाक केमिकल लेकर चलना पूरी तरह वर्जित है। सफर के दौरान बोगी या टॉयलेट में गंदगी फैलाना, खिड़की से बाहर कचरा फेंकना या धूम्रपान करना भी कानूनी जुर्म है। कई लोग ट्रेन के गेट पर खड़े होकर सफर करते हैं या चलती ट्रेन से उतरने-चढ़ने की कोशिश करते हैं, जो जानलेवा साबित हो सकता है। रेलवे ने इन तमाम सुरक्षा मानकों को यात्रियों की भलाई के लिए ही बनाया है। यदि हम एक जिम्मेदार नागरिक की तरह इन सभी नियमों का पालन करेंगे, तो हमारा अपना सफर तो सुरक्षित होगा ही, साथ ही हमारे सहयात्रियों की यात्रा भी सुखद और आरामदायक बन सकेगी।

सफर को बनाएं सुगम: इयरफोन का करें इस्तेमाल और दूसरों का रखें सम्मान

अंत में यही कहा जा सकता है कि स्वतंत्रता का अर्थ यह कतई नहीं है कि हम दूसरों की आजादी और सुकून में खलल डालें। यदि आपको ट्रेन में सफर के दौरान गाने सुनने का या फिल्में देखने का शौक है, तो आप अपने साथ हमेशा एक अच्छी क्वालिटी का इयरफोन या हेडफोन जरूर रखें। इयरफोन लगाकर अपनी पसंद का संगीत सुनने से न तो आपको कोई रोकेगा और न ही आपके किसी सहयात्री को कोई परेशानी होगी। भारतीय रेलवे हम सबकी अपनी संपत्ति है और इसकी व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने में हर एक यात्री का सहयोग बेहद जरूरी है। अगली बार जब भी आप ट्रेन में सफर करें, तो इन नियमों को अपनी गांठ बांध लें, ताकि आपको किसी भी तरह की शर्मिंदगी, जुर्माने या जेल की हवा खाने जैसी неприятक स्थिति का सामना न करना पड़े और आपकी यात्रा हमेशा मंगलमय रहे।