शेयर बाजार में फ्रॉड, व्हाट्सऐप ग्रुप्स के जरिए फर्जीवाड़ा करने वालों पर ED का शिकंजा, 6 शहरों के 29 ठिकानों पर छापे
शेयर बाजार में निवेश के नाम पर आम लोगों और सीधे-साधे निवेशकों को झांसा देकर करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले साइबर अपराधियों और फर्जी ब्रोकरों के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अब तक की सबसे बड़ी और निर्णायक कार्रवाई शुरू कर दी है। डिजिटल फ्रॉड और फर्जी ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म्स के जरिए देश भर में जारी इस बड़े रैकेट का पर्दाफाश करने के लिए केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी ने देश के 6 प्रमुख शहरों में एक साथ 29 विभिन्न ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह अंतरराष्ट्रीय और अंतरराज्यीय गिरोह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म विशेषकर व्हाट्सऐप (WhatsApp) और टेलीग्राम ग्रुप्स का इस्तेमाल करके लोगों को गारंटीड और भारी-भरकम रिटर्न का लालच देता था और फिर उनके खून-पसीने की गाढ़ी कमाई को अपने फर्जी बैंक खातों में ट्रांसफर करा लेता था। ईडी की इस बड़े पैमाने पर हुई सर्जिकल स्ट्राइक से वित्तीय अपराध करने वाले सिंडिकेट में हड़कंप मच गया है।
व्हाट्सऐप ग्रुप्स से शुरू होता था ठगी का खेल: जानिए कैसे जाल में फंसते थे निर्दोष निवेशक
ईडी और साइबर क्राइम सेल की शुरुआती जांच में इस बात का बड़ा खुलासा हुआ है कि ठगों का यह गिरोह बेहद ही शातिराना अंदाज में अपने पूरे ऑपरेशन को अंजाम देता था। अपराधी सबसे पहले सोशल मीडिया विज्ञापनों और फर्जी प्रोफाइल के जरिए व्हाट्सऐप और टेलीग्राम ग्रुप बनाते थे, जिनमें खुद को सेबी (SEBI) से पंजीकृत दिग्गज स्टॉक मार्केट एनालिस्ट, पोर्टफोलियो मैनेजर या विदेशी निवेश फर्मों का प्रतिनिधि बताकर शामिल होते थे। इन ग्रुप्स में सैकड़ों फर्जी मेंबर्स भी जोड़े जाते थे जो हर दिन फर्जी स्क्रीनशॉट पोस्ट करके यह दावा करते थे कि उन्होंने इस प्लेटफॉर्म से लाखों रुपये का मुनाफा कमाया है। जब कोई आम निवेशक इस ग्रुप में शामिल होता था, तो उसे शुरुआत में छोटे निवेश पर फर्जी मुनाफा दिखाकर उसका विश्वास हासिल कर लिया जाता था। इसके बाद जैसे ही निवेशक अपनी जिंदगी की पूरी जमापूंजी या बड़ा फंड लगा देता था, वैसे ही उसका अकाउंट ब्लॉक कर दिया जाता था और पैसे हड़प लिए जाते थे।
6 शहरों के 29 ठिकानों पर ED की छापेमारी, कई फर्जी बैंक खाते और डिजिटल दस्तावेज बरामद
वित्तीय धोखाधड़ी के इस विशाल तंत्र को ध्वस्त करने के लिए ईडी की दर्जनों टीमों ने मुंबई, दिल्ली-एनसीआर, बेंगलुरु, कोलकाता, अहमदाबाद और हैदराबाद जैसे बड़े व्यापारिक और आईटी शहरों में एक साथ छापेमारी की कार्रवाई को अंजाम दिया। सुबह तड़के शुरू हुई इस छापेमारी में जांच अधिकारियों ने कई शेल कंपनियों (Shell Companies), बेनामी बैंक खातों, भारी मात्रा में डिजिटल डिवाइस, हार्ड डिस्क, मोबाइल फोन और संदिग्ध दस्तावेजों को अपने कब्जे में ले लिया है। जांच एजेंसी को शक है कि इस फ्रॉड के जरिए जुटाए गए सैकड़ों करोड़ रुपये को हवाला नेटवर्क और क्रिप्टो करेंसी के माध्यम से विदेशों में भी भेजा गया है। कई ठिकानों से करोड़ों रुपये की नकदी और सोने-चांदी के आभूषण भी बरामद किए गए हैं, जिनका संबंध सीधे तौर पर इस फर्जी शेयर बाजार ट्रेडिंग स्कैम से जुड़ा हुआ पाया गया है।
सेबी और रिजर्व बैंक की सख्त चेतावनी: अनधिकृत ग्रुप्स और ऐप्स से रहें पूरी तरह सावधान
शेयर बाजार में बढ़ते इस डिजिटल फ्रॉड को देखते हुए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भी देश के आम नागरिकों और निवेशकों के लिए समय-समय पर एडवाइजरी जारी की है। नियामक संस्थाओं का स्पष्ट कहना है कि कोई भी पंजीकृत ब्रोकर या वित्तीय संस्थान किसी भी निवेशक को व्हाट्सऐप या टेलीग्राम ग्रुप के जरिए निजी खातों में पैसे जमा करने या गारंटीड रिटर्न का वादा नहीं करता है। यदि कोई व्यक्ति या संस्था आपको किसी ट्रेडिंग ऐप को डाउनलोड करने और उसके माध्यम से कम समय में पैसा दोगुना करने का झांसा देती है, तो वह पूरी तरह से फर्जीवाड़ा है। ईडी की इस ताजा और बड़ी कार्रवाई से यह साफ संकेत गया है कि कानून व्यवस्था ऐसे डिजिटल लुटेरों पर नकेल कसने के लिए हर संभव कड़ा रुख अपनाने जा रही है।
साइबर सुरक्षा और निवेश में सतर्कता: क्या करें जब आपके साथ हो जाए ऐसा कोई फ्रॉड?
ईडी अधिकारियों ने आम जनता से अपील की है कि वे शेयर बाजार में निवेश हमेशा केवल सेबी द्वारा अधिकृत और पंजीकृत मध्यस्थों तथा आधिकारिक ब्रोकिंग ऐप्स के माध्यम से ही करें। किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर अपने बैंक विवरण या किसी ऐप में पैसे जमा न करें। यदि गलती से कोई व्यक्ति इस प्रकार के व्हाट्सऐप फ्रॉड या साइबर क्राइम का शिकार हो जाता है, तो उसे बिना किसी देरी के तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर (1930) पर संपर्क करना चाहिए और अपनी शिकायत दर्ज करानी चाहिए। ईडी की यह बड़ी और बहु-स्तरीय कार्रवाई न केवल अपराधियों को उनके अंजाम तक पहुंचाएगी, बल्कि भविष्य में वित्तीय बाजार की साख और आम जनता के पैसों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने में भी अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।