सोना महंगा: 22 नहीं 18 कैरेट गोल्ड का बनवाएंगे हार तो 2 तोले पर बचेंगे इतने पैसे
त्योहारी सीजन और सर्राफा बाजार में सोने की आसमान छूती कीमतों ने आम खरीदारों के पसीने छुड़ा दिए हैं। 24 कैरेट और 22 कैरेट सोने के दाम लगातार नए ऐतिहासिक रिकॉर्ड बना रहे हैं, जिससे आम मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए भारी भरकम गहने खरीदना काफी चुनौतीपूर्ण हो गया है। हालांकि, इस आर्थिक दबाव के बीच सर्राफा बाजार के जानकारों और ज्वेलर्स ने भारतीय उपभोक्ताओं के लिए एक बेहद व्यावहारिक और स्मार्ट विकल्प पेश किया है। यदि आप भी शादी-ब्याह या त्यौहारों के लिए सोने का भारी हार या गहने बनवाने की योजना बना रहे हैं, तो 22 कैरेट के बजाय 18 कैरेट गोल्ड का चयन करना आपके बजट को बिगड़ने से बचा सकता है। 2 तोले यानी लगभग 20 ग्राम वजन के सोने के हार पर 18 कैरेट चुनने से आपको सीधे तौर पर हजारों रुपये की भारी-भरकम बचत हो सकती है, जिससे आपके जेब पर पड़ा दबाव काफी हद तक कम हो जाएगा।
जानिए कैसे होती है 22 कैरेट और 18 कैरेट सोने के गणित में बंपर बचत
भारतीय सर्राफा बाजार में 22 कैरेट सोने में 91.6 प्रतिशत शुद्ध सोना होता है, जबकि 18 कैरेट गोल्ड में 75 प्रतिशत शुद्ध सोना और 25 प्रतिशत अन्य धातुएं जैसे तांबा, चांदी या जिंक मिलाई जाती हैं। जब आप 2 तोले (20 ग्राम) का हार बनवाते हैं, तो 22 कैरेट सोने की प्रति ग्राम दर और 18 कैरेट सोने की प्रति ग्राम दर में काफी बड़ा अंतर आ जाता है। मौजूदा बाजार दरों के गणित को समझें तो 22 कैरेट सोने के 20 ग्राम की कीमत के मुकाबले 18 कैरेट सोने का 20 ग्राम हार खरीदने पर आपको केवल शुद्ध सोने की कीमत में ही लगभग 20,000 रुपये से लेकर 30,000 रुपये तक की सीधी बचत होती है। इसके अलावा, 18 कैरेट सोने पर लगने वाला जीएसटी (GST) और मेकिंग चार्जेस भी कुल कम कीमत पर आकलित होते हैं, जिससे कुल बिल पर आपकी बचत का यह आंकड़ा और भी अधिक बढ़ जाता है।
मजबूती और टिकाऊपन में 18 कैरेट ज्वेलरी का नहीं है कोई मुकाबला
बहुत से उपभोक्ताओं के मन में यह आशंका होती है कि 18 कैरेट सोना कम शुद्ध होने के कारण कमजोर या गुणवत्ता में खराब हो सकता है, लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत है। 18 कैरेट सोने में 25 प्रतिशत अन्य मजबूत धातुओं का मिश्रण होने के कारण यह 22 या 24 कैरेट सोने की तुलना में काफी ज्यादा सख्त, टिकाऊ और खरोंच-रोधी (Scratch-Resistant) होता है। यदि आप अपने हार में हीरे (Diamonds), पोल्की, कुंदन या कीमती रंगीन पत्थर (Gemstones) जड़वा रहे हैं, तो ज्वेलरी एक्सपर्ट्स हमेशा 18 कैरेट सोने का ही इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं। 22 कैरेट सोना अत्यधिक मुलायम होता है जिससे उसमें जड़े हुए कीमती पत्थरों के गिरने का खतरा बना रहता है, जबकि 18 कैरेट सोना पत्थरों को मजबूती से पकड़ कर रखता है और दैनिक उपयोग में भी जल्दी मुड़ता या खराब नहीं होता।
हॉलमार्किंग और रीसेल वैल्यू: क्या 18 कैरेट सोना बेचना आसान है?
बचत और मजबूती के अलावा 18 कैरेट सोने की ज्वेलरी की शुद्धता और पारदर्शिता को लेकर भी अब कोई भ्रम नहीं रह गया है। भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) द्वारा 18 कैरेट सोने के गहनों पर भी BIS हॉलमार्क अनिवार्य कर दिया गया है। 18 कैरेट के हर गहने पर 750 का हॉलमार्क अंक अंकित होता है, जो इसकी 75 प्रतिशत शुद्धता की शत-प्रतिशत सरकारी गारंटी देता है। रीसेल वैल्यू की बात करें तो जब भी आप भविष्य में 18 कैरेट के गहने को बेचने या एक्सचेंज करने बाजार में जाते हैं, तो आपको उस समय मौजूद 18 कैरेट सोने की तत्कालीन बाजार दर के हिसाब से ही पूरा पैसा वापस मिलता है। इसलिए, 18 कैरेट सोना खरीदने में न तो शुद्धता का कोई नुकसान है और न ही भविष्य में इसे बेचते समय कोई घाटा होता है।
निष्कर्ष: महंगे सोने के दौर में 18 कैरेट गोल्ड ज्वेलरी ही है सबसे समझदारी भरा फैसला
संक्षेप में कहें तो सोने की बढ़ती कीमतों के इस दौर में 18 कैरेट गोल्ड का चुनाव करना एक दूरदर्शी और आर्थिक रूप से बेहद समझदारी भरा कदम है। 22 कैरेट के बजाय 18 कैरेट का 2 तोले का हार बनवाकर आप न केवल लुक और डिजाइन में बिना कोई समझौता किए हजारों रुपये की सीधी बचत कर सकते हैं, बल्कि आपको एक अधिक मजबूत, टिकाऊ और स्टाइलिश आभूषण भी प्राप्त होता है। सर्राफा विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक दौर में हर वर्ग के ग्राहक अब 18 कैरेट की तरफ तेजी से आकर्षित हो रहे हैं।