Share Market: ट्रंप का प्रहार, फिर भी दहाड़ा शेयर बाजार, सेंसेक्स में 775 अंकों का उछाल....IT स्टॉक्स में दमदार तेजी
डालर के मुकाबले रुपये की चाल, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक राजनीति में हो रहे बड़े बदलावों के बीच भारतीय शेयर बाजार ने एक बार फिर अपनी अद्भुत मजबूती और आंतरिक ताकत का लोहा मनवा लिया है। अमेरिकी राजनीति के दिग्गजों और विशेष रूप से नवनिर्वाचित या प्रभावशाली नेता डोनाल्ड ट्रंप के हालिया तीखे बयानों तथा वैश्विक व्यापार नीतियों को लेकर की गई तीखी टिप्पणियों के बाद दुनिया भर के बाजारों में सुस्ती या बिकवाली का माहौल देखा जा रहा था। विश्लेषकों का मानना था कि ट्रंप की नीतियों और टैरिफ से जुड़े बयानों का असर भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार पर भी गहरा नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। लेकिन तमाम आशंकाओं और शुरुआती दबाव को दरकिनार करते हुए दलाल स्ट्रीट पर खरीदारों ने ऐसा जबरदस्त दमखम दिखाया कि बाजार ने सभी नकारात्मक अनुमानों को धड़ाम कर दिया। कारोबार के अंतिम सत्र में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही सूचकांकों ने जोरदार वापसी करते हुए निवेशकों के चेहरे पर मुस्कान ला दी और यह साबित कर दिया कि भारतीय बाजार विदेशी झटकों को झेलने के लिए पूरी तरह सक्षम है।
सेंसेक्स में 775 अंकों का भारी-भरकम उछाल, निवेशकों की संपत्ति में हुई बंपर बढ़ोतरी
सप्ताह के एक महत्वपूर्ण कारोबारी सत्र के दौरान जब बाजार की शुरुआत हुई थी, तो निवेशकों के मन में एक प्रकार की अनिश्चितता और घबराहट का माहौल था। वैश्विक संकेतों के कमजोर होने की वजह से बाजार लाल निशान के आसपास कारोबार करता नजर आ रहा था। हालांकि, जैसे-जैसे कारोबार आगे बढ़ा, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) और चुनिंदा दिग्गज शेयरों में हुई भारी लिवाली ने बाजार की कायापलट कर दी। देखते ही देखते बंबई स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 775 अंकों की शानदार और ऐतिहासिक तेजी के साथ बंद हुआ। इस भारी-भरकम उछाल ने न केवल निवेशकों के पिछले नुकसान की भरपाई की, बल्कि एक ही दिन में निवेशकों की कुल संपत्ति यानी मार्केट कैप में खरबों रुपये का इजाफा कर दिया। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी सूचकांक भी इस तूफानी तेजी में पीछे नहीं रहा और उसने भी महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तरों को पार करते हुए एक मजबूत बढ़त दर्ज की। बाजार की इस शानदार चाल ने यह बता दिया कि भारत की आर्थिक फंडामेंटल्स कितने मजबूत हैं और वैश्विक बयानों का अब भारतीय निवेशकों के हौसलों पर कोई स्थायी असर नहीं पड़ता है।
आईटी (IT) स्टॉक्स में आई दमदार तेजी, सूचकांक को मिला सबसे बड़ा सहारा
इस पूरे कारोबारी दिन में यदि किसी एक सेक्टर ने सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरीं और बाजार को आसमान पर पहुंचाने में सबसे अहम भूमिका निभाई, तो वह भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी यानी आईटी (IT) सेक्टर था। पिछले कुछ महीनों से वैश्विक मांग में नरमी और अमेरिकी तकनीकी कंपनियों के रुख को लेकर आईटी शेयरों पर थोड़ा दबाव बना हुआ था, लेकिन इस बार तस्वीर पूरी तरह से बदली हुई नजर आई। इंफोसिस, टीसीएस, एचसीएल टेक्नोलॉजीज और टेक महिंद्रा जैसे देश के तमाम बड़े आईटी दिग्गजों के शेयरों में जबरदस्त लिवाली देखने को मिली। विश्लेषकों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर तकनीकी खर्च बढ़ने की उम्मीद और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये के समीकरणों ने आईटी कंपनियों के शेयरों में निवेशकों का भरोसा फिर से जगा दिया है। जब बाजार के बाकी सेक्टर मिले-जुले रुझान दिखा रहे थे, तब अकेले आईटी शेयरों में आई इस दमदार तेजी ने सूचकांक को ऊपर खींचने में मुख्य इंजन का काम किया, जिससे निवेशकों ने इस क्षेत्र में जमकर मुनाफा कमाया।
डोनाल्ड ट्रंप के बयानों का भारतीय अर्थव्यवस्था पर क्यों नहीं पड़ा गहरा असर?
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति या वैश्विक राजनीति के प्रभावशाली चेहरे डोनाल्ड ट्रंप द्वारा समय-समय पर आयात शुल्क, आउटसोर्सिंग और व्यापारिक समझौतों को लेकर दिए जाने वाले बयान अक्सर अंतरराष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में रहते हैं। इस बार भी उनके बयानों से यह अंदेशा लगाया जा रहा था कि उभरते बाजारों, विशेष रूप से भारत और चीन के निर्यात पर इसका असर पड़ सकता है। हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था अब पहले की तुलना में कहीं अधिक आत्मनिर्भर और घरेलू खपत पर आधारित हो चुकी है। भारत का मजबूत कॉर्पोरेट गवर्नेंस, बढ़ता हुआ मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर और खुदरा निवेशकों की बढ़ती भागीदारी ने अब बाजार को वैश्विक हवा के झोंकों से काफी हद तक सुरक्षित बना दिया है। यही कारण है कि जहां एक तरफ वैश्विक विश्लेषक ट्रंप के बयानों के नफे-नुकसान का आकलन कर रहे थे, वहीं दूसरी तरफ भारतीय शेयर बाजार ने अपनी घरेलू ताकत के दम पर एक नया इतिहास रच दिया।
बैंकिंग, मेटल और ऑटो सेक्टर का भी मिला भरपूर साथ, चौतरफा खरीदारी से चमका बाजार
सिर्फ आईटी सेक्टर ही नहीं, बल्कि इस शानदार तेजी के दौरान बाजार के अन्य प्रमुख सेक्टरों ने भी सेंसेक्स को 775 अंक तक पहुंचाने में पूरा सहयोग दिया। बैंकिंग सेक्टर के दिग्गज शेयरों में हुई लोवर लेवल पर खरीदारी ने बाजार को स्थिरता प्रदान की। इसके अलावा, बुनियादी ढांचे, मेटल और ऑटोमोबाइल सेक्टर के शेयरों में भी निवेशकों ने गहरी दिलचस्पी दिखाई। त्योहारों के सीजन को देखते हुए ऑटो कंपनियों के बेहतर बिक्री आंकड़ों की उम्मीदों ने बाजार में और अधिक जोश भर दिया। जानकारों का कहना है कि जब बाजार में चौतरफा खरीदारी (Broad-based buying) देखने को मिलती है, तो वह तेजी अधिक टिकाऊ और भरोसेमंद मानी जाती है। आज के सत्र में निवेशकों ने हर गिरावट पर खरीदारी करने की रणनीति अपनाई, जिससे यह साफ जाहिर होता है कि बाजार का मध्यम और दीर्घकालिक दृष्टिकोण अभी भी बेहद सकारात्मक बना हुआ है।
आगे कैसी रहेगी बाजार की चाल? निवेशकों के लिए क्या हैं एक्सपर्ट्स की सलाह
सेंसेक्स में 775 अंकों की इस जोरदार वापसी के बाद अब निवेशकों और ट्रेडर्स के मन में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या यह तेजी आगे भी जारी रहेगी या बाजार में फिर से उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। वित्तीय विशेषज्ञों का सुझाव है कि भले ही भारतीय बाजार ने वैश्विक नकारात्मकताओं को दरकिनार कर अपनी ताकत दिखाई है, लेकिन निवेशकों को अभी भी बहुत अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल के दाम और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों पर आने वाले फैसलों पर पैनी नजर बनाए रखना बेहद जरूरी है। निवेशकों को किसी भी अफवाह या सनसनीखेज बयान से घबराने के बजाय अपनी वित्तीय स्थिति और लॉन्ग-इज्जत लक्ष्यों के आधार पर चुनिंदा और मजबूत फंडामेंटल्स वाले शेयरों में ही निवेश करना चाहिए। यदि आप एक अनुशासित निवेशक की तरह सही रणनीति अपनाते हैं, तो बाजार की यह चाल आपके लिए धन कमाने का सबसे बेहतरीन अवसर साबित हो सकती है।