देश के दिग्गज उद्योगपति हर्ष गोयनका के इस तीखे बयान ने भारतीय कारोबार जगत में मचाया हड़कंप
भारतीय उद्योग जगत, कॉरपोरेट गलियारों और आर्थिक नीतियों के पटल से इस वक्त एक बहुत बड़ी, विचारणीय और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है, जिसने देश के व्यापारिक और राजनीतिक खेमे में हलचल पैदा कर दी है। देश के जाने-माने और प्रतिष्ठित उद्योगपति, आरपीजी ग्रुप (RPG Group) के चेयरमैन हर्ष गोयनका (Harsh Goenka) अपने बेबाक बयानों और सोशल मीडिया पर देश के आर्थिक विकास तथा भविष्य के विजन पर खुलकर अपनी राय रखने के लिए जाने जाते हैं। हाल ही में उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था, व्यापारिक नीतियों और बुनियादी ढांचे की तुलना वैश्विक महाशक्ति चीन (China) के साथ करते हुए एक ऐसा तीखा बयान दिया है, जिसने हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दिया है। हर्ष गोयनका ने दो टूक शब्दों में यह कहा है कि "चीन आज से 20 साल आगे की प्लानिंग और सोच के साथ काम कर रहा है, जबकि हम आज भी तात्कालिक मुद्दों और पुरानी नीतियों में ही उलझे हुए हैं।" उनके इस बयान के सामने आते ही देश भर के अर्थशास्त्रियों, उद्योगपतियों और नीति निर्माताओं के बीच बहस छिड़ गई है। इस विशेष रिपोर्ट के माध्यम से हम विस्तार से जानेंगे कि हर्ष गोयनका के इस बयान के पीछे के मुख्य कारण क्या हैं, चीन की रणनीतिक सोच भारत से किस प्रकार अलग है और भारतीय कारोबार जगत को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में टिके रहने के लिए किन बड़े बदलावों की जरूरत है।
भारतीय कारोबार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा: क्या वाकई चीन हमसे दो दशक आगे निकल चुका है?
वैश्विक अर्थव्यवस्था के वर्तमान परिदृश्य में जब हम दुनिया की दो सबसे बड़ी उभरती हुई एशियाई अर्थव्यवस्थाओं—भारत और चीन—की तुलना करते हैं, तो कई मोर्चों पर एक स्पष्ट अंतर दिखाई देता है। हर्ष गोयनका ने अपने इस बयान में इसी कड़वी सच्चाई को उजागर किया है। चीन ने पिछले तीन दशकों में जिस प्रकार से अपनी विनिर्माण क्षमता (Manufacturing Capability), अत्याधुनिक तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर हब और बुलेट ट्रेन जैसे विशाल बुनियादी ढांचे का विकास किया है, उसने पूरी दुनिया को पीछे छोड़ दिया है। चीनी हुक्मरान और उद्योगपति आने वाले 20 से 50 साल के विजन को ध्यान में रखकर योजनाएं बनाते हैं और उन पर तेजी से अमल करते हैं। इसके विपरीत, भारत में आज भी कई नीतियां, लालफीताशाही (Red Tapism), कानूनी जटिलताएं और बुनियादी ढांचे की कमियां ऐसी हैं जो निवेशकों और लंबी अवधि की परियोजनाओं के रास्ते में रुकावट पैदा करती हैं। हालांकि भारत तेजी से डिजिटल क्रांति और स्टार्टअप इकोसिस्टम में आगे बढ़ रहा है, लेकिन ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग के मोर्च पर चीन की गति को पकड़ना अभी भी एक बहुत बड़ी चुनौती बना हुआ है।
हर्ष गोयनका के इस तीखे बयान के पीछे की मुख्य वजहें और कॉरपोरेट जगत की चिंताएं
हर्ष गोयनका जैसे अनुभवी उद्योगपति जब इस प्रकार की सार्वजनिक टिप्पणी करते हैं, तो उसके पीछे देश के भविष्य और व्यापारिक माहौल को लेकर गहरी चिंता छिपी होती है। भारतीय कॉरपोरेट जगत लंबे समय से यह मांग करता आ रहा है कि देश में इज ऑफ डूइंग बिजनेस (Ease of Doing Business) को और अधिक सरल बनाया जाए, कर ढांचे (Tax Structure) को पारदर्शी किया जाए और भूमि अधिग्रहण तथा श्रम कानूनों में ऐसे सुधार किए जाएं जो निवेशकों को आकर्षित कर सकें। चीन ने अपने देश में जिस प्रकार से 'मेड इन चाइना 2025' और अन्य भविष्यवादी मिशनों के तहत अनुसंधान और विकास (R&D) पर भारी निवेश किया है, वैसा विजन अभी भी कई विकासशील देशों में देखने को नहीं मिलता है। गोयनका का यह कहना कि चीन लंबी अवधि की सोच पर काम कर रहा है, इस बात की ओर इशारा करता है कि यदि भारत को वैश्विक सप्लाई चेन का सिरमौर बनना है, तो उसे अपनी पारंपरिक सोच से बाहर निकलकर भविष्य की तकनीकों और दूरदर्शी नीतियों पर युद्ध स्तर पर काम करना होगा।
भारत के पास अपार युवा शक्ति और अवसर, लेकिन गति और विजन को देने होंगे नए पंख
इसका यह कतई मतलब नहीं है कि भारत के पास संभावनाओं की कमी है; आज भारत दुनिया का सबसे युवा देश है, जहां टैलेंट, स्टार्टअप्स और तकनीकी विशेषज्ञों का अंबार लगा हुआ है। सरकार की 'मेक इन इंडिया', 'प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव' (PLI) स्कीम और डिजिटल इंडिया जैसी पहलों ने पिछले कुछ वर्षों में देश के औद्योगिक विकास को एक नई रफ्तार जरूर दी है। दुनिया की कई बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियां अब चीन के विकल्प के रूप में भारत की ओर देख रही हैं (China Plus One Strategy)। लेकिन हर्ष गोयनका का यह संदेश इस बात की याद दिलाता है कि हमें केवल छोटी सफलताओं से संतुष्ट होने की बजाय अपनी कार्यशैली में और अधिक तेजी, इनोवेशन और भविष्यवादी दृष्टिकोण लाने की जरूरत है। यदि हमें चीन या अन्य विकसित देशों को पछाड़कर दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक महाशक्ति बनना है, तो हमें नीतियां बनाने से लेकर उनके क्रियान्वयन तक की गति को कई गुना बढ़ाना होगा।
भविष्य की राह और भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा सबक
हर्ष गोयनका का यह बयान भारतीय व्यापार और नीति निर्माताओं के लिए एक वेक-अप कॉल (Wake-up Call) की तरह है। आने वाले दशक वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होने वाले हैं, जहां वही देश राज करेगा जो समय से पहले भविष्य की चुनौतियों को भांपकर अपनी तैयारी पूरी रखेगा। भारत सरकार और निजी क्षेत्र दोनों को मिलकर एक ऐसा मजबूत और सहयोगात्मक इकोसिस्टम तैयार करना होगा, जहां लालफीताशाही खत्म हो और इनोवेशन को बढ़ावा मिले। जनता और युवा वर्ग भी अब यह उम्मीद कर रहा है कि भारत ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी का ग्लोबल हब बने। आने वाले समय में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि उद्योग जगत के इन दिग्गजों की सलाह और चेतावनियों पर नीति निर्माता किस प्रकार के कदम उठाते हैं, ताकि भारत भी लंबी छलांग लगाकर दुनिया के अग्रणी देशों के समकक्ष खड़ा हो सके।