करतारपुर गुरुद्वारा का नियंत्रण अब पाकिस्तान सरकार के हाथ में, व्यापारिक रूप में विकसित होगा धार्मिक स्थान

इसके विकास में धन खर्च करने को लेकर सरकार पर उठे थे सवाल

पाकिस्तान सरकार ने करतारपुर स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारा दरबार साहिब का नियंत्रण आधिकारिक तौर पर अपने हाथ में ले लिया है। अभी तक इसका नियंत्रण पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पास था। अब ये नियंत्रण एक मुस्लिम बॉडी ‘ प्रोजेक्ट बिज़नेस प्लान ‘ को दे दिया गया है।

imran khan

यानि सीधे तौर पर पाकिस्तान सरकार ने गुरुद्वारा दरबार साहिब को व्यापारिक रूप में ले लिया है। पाकिस्तान की एवाकी ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड ने एक नौ सदस्यीय कमेटी का गठन किया है, जिसके अध्यक्ष मुहम्मद तारिक खान हैं। पाकिस्तान सरकार पाकिस्तान से गुरुद्वारा दरबार साहिब में आने वाले श्रद्धालुओं से प्रति व्यक्ति 200 पाकिस्तानी रुपये और भारत से आने वाले श्रद्धालुओं से 20 डॉलर फीस लेती है।

पाकिस्तान सरकार गुरुद्वारा करतारपुर साहिब से शुल्क के रूप में प्रति वर्ष 555 करोड़ रुपये (पाकिस्तानी रुपये और भारतीय करेंसी के रूप में 259 करोड़ रुपये ) की आय के रूप में देख रही थी। पाकिस्तान सरकार ने जो करतारपुर गलियारा और गुरुद्वारा साहिब पर राशि खर्च की थी, उसे लेकर वहां की सरकार पर प्रश्न उठने लगे थे।

पाकिस्तान की इमरान खान सरकार ने इसके लिए पाकिस्तान मंत्रिमंडल की इसी 23 अक्टूबर को हुई बैठक में लिए निर्णय का हवाला दिया है। पाकिस्तान सरकार ने इस बाबत अधिसूचना जारी कर दी है। करतारपुर गलियारे के माध्यम से भारत से सीधे जुड़े गुरुद्वारा करतारपुर साहिब को कोरोना काल के बाद पाकिस्तान सरकार द्वारा गत अक्टूबर माह के प्रथम सप्ताह में खोलने के ऐलान किया गया था। सरकार के इस नए निर्णय कि गुरुद्वारा करतारपुर साहिब को व्यापारिक रूप में लिया जा रहा है,को लेकर तीखी प्रतिक्रिया उठने लगी है।

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