116 करोड़ बहाए फिर भी नहीं आया पानी का एक कतरा, झारखंड सरकार का बड़ा एक्शन
झारखंड के ग्रामीण इलाकों में हर घर तक नल से जल पहुंचाने के दावों को बड़ा झटका लगा है। पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने राज्य के पांच प्रमंडलों में चल रही करीब 1,680 करोड़ रुपये की 10 बहुग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं (एमवीएस) पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। वर्षों बीत जाने के बावजूद काम अधूरा छोड़ने के चलते यह कठोर कदम उठाया गया है। महाधिवक्ता (एडवोकेट जनरल) की कानूनी राय और सिफारिश के बाद विभाग ने चेन्नई की निर्माण एजेंसी मेसर्स श्रीराम ईपीसी से काम वापस लेने और बचे हुए कार्यों के लिए नए सिरे से टेंडर जारी करने का फैसला किया है।
यह पूरी कार्रवाई चाईबासा, चतरा, हजारीबाग, धनबाद और मधुपुर प्रमंडल की योजनाओं से जुड़ी है। इन 10 परियोजनाओं में से 5 का वित्तपोषण डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) फंड से, 4 का राज्य योजना मद से और 1 का निर्माण केंद्र के जल जीवन मिशन के तहत किया जाना था। तय डेडलाइन खत्म होने के वर्षों बाद भी एजेंसी बुनियादी ढांचा खड़ा करने में नाकाम रही।
नेपाल हाउस स्थित सचिवालय में विभागीय मंत्री योगेंद्र प्रसाद की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में यह निर्णय लिया गया। बैठक में विभाग के सचिव अबु इमरान और जल जीवन मिशन के निदेशक शशि रंजन सहित आला अधिकारी मौजूद रहे। समीक्षा के दौरान मंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा कि जनता को पीने का पानी मुहैया कराना सरकार की पहली प्राथमिकता है और किसी भी स्तर पर लेटलतीफी या लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। इसके साथ ही विभाग ने ढिलाई बरतने वाली अन्य निर्माण कंपनियों की पहचान भी शुरू कर दी है। सभी को अल्टीमेटम दिया गया है कि वे दिसंबर 2026 तक हर हाल में अपना काम पूरा करें, अन्यथा उन्हें सीधे ब्लैकलिस्ट कर दिया जाएगा।
चाईबासा में 2022 की डेडलाइन, काम अब भी अधूरा
विभाग की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, चाईबासा आइता एवं पुराना चाईबासा जलापूर्ति योजना अगस्त 2022 में ही पूरी होनी थी। 94.38 करोड़ रुपये की इस स्वीकृत परियोजना में 88.09 करोड़ रुपये आवंटित किए गए और 36.40 करोड़ रुपये खर्च भी हुए, मगर तीन साल से ज्यादा समय बीतने पर भी भौतिक प्रगति सिर्फ 30 से 95 प्रतिशत के बीच अटकी रही। इसी तरह तांतनगर फुल ब्लॉक कवरेज योजना की मियाद भी अगस्त 2022 में समाप्त हो चुकी थी, लेकिन 92.75 करोड़ के बजट और 59.77 करोड़ रुपये के खर्च के बावजूद केवल 67 फीसदी काम ही धरातल पर उतर सका।
धनबाद के गोविंदपुर-निरसा में 116 करोड़ बहाए, एक भी घर नहीं पहुंचा पानी
परियोजनाओं की सबसे खस्ता हालत धनबाद और मधुपुर प्रमंडल में देखने को मिली। धनबाद के प्रमंडल 1 और 2 के तहत गोविंदपुर-निरसा ब्लॉक मल्टी विलेज स्कीम की स्थिति बेहद चिंताजनक रही। डीएमएफटी मद से पोषित 616.93 करोड़ रुपये की इस भारी-भरकम योजना में 116.63 करोड़ रुपये आवंटित हुए और करीब 116.28 करोड़ रुपये खर्च भी कर दिए गए। कागजों पर भौतिक प्रगति 75 फीसदी दिखाई गई, लेकिन तय समय-सीमा बीतने के बाद भी धरातल पर शून्य परिणाम रहा। योजना का मुख्य लक्ष्य 77,875 ग्रामीण परिवारों के घरों में नल का पानी पहुंचाना था, मगर कड़वी हकीकत यह रही कि एक भी घर में जलापूर्ति शुरू नहीं हो सकी। इसी विफलता को देखते हुए सरकार ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए नई एजेंसियों के जरिए काम पूरा कराने का रास्ता चुना है।