एशियन गेम्स में गोल्ड जीतने वाली झारखंड की हॉकी बेटियों से मिले CM हेमंत सोरेन, अंगवस्त्र देकर खिलाड़ियों को किया सम्मानित

एशियन गेम्स में गोल्ड जीतने वाली झारखंड की हॉकी बेटियों से मिले CM हेमंत सोरेन, अंगवस्त्र देकर खिलाड़ियों को किया सम्मानित

भारतीय खेल जगत के इतिहास में जब-जब एशियन गेम्स का जिक्र होगा, तब-तब झारखंड की माटी से निकली इन प्रतिभावान बेटियों का नाम गर्व के साथ लिया जाएगा। हाल ही में संपन्न हुए प्रतिष्ठित एशियन गेम्स में भारतीय महिला हॉकी टीम ने अपने शानदार और आक्रामक प्रदर्शन के दम पर देश के लिए स्वर्ण पदक जीतकर पूरे भारत का मस्तक गर्व से ऊंचा कर दिया है। इस ऐतिहासिक और गौरवशाली जीत में झारखंड की बेटियों की भूमिका सबसे अहम और सराहनीय रही है। राज्य के दूरदराज और आदिवासी अंचलों से निकलकर अंतरराष्ट्रीय फलक तक का यह सफर तय करना किसी संघर्ष गाथा से कम नहीं है। इन बेटियों ने अपनी कड़ी मेहनत, अटूट लगन और असाधारण खेल कौशल के बल पर दुनिया भर में देश और अपने गृह राज्य झारखंड का नाम रोशन किया है। जब ये जांबाज बेटियां स्वर्ण पदक अपने गले में लटकाकर अपने वतन और गृह राज्य लौटीं, तो पूरे राज्य में जश्न का माहौल बन गया। हर किसी की जुबान पर बस इन्हीं होनहार खिलाड़ियों की चर्चा थी, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों से लड़कर यह मुकाम हासिल किया है।

मुख्यमंत्री आवास पर हुआ खास आयोजन, CM हेमंत सोरेन ने की शिरकत

झारखंड की इन खेल प्रतिभाओं के इस ऐतिहासिक और अभूतपूर्व प्रदर्शन का सम्मान करने के लिए राज्य सरकार ने पहल करते हुए एक विशेष और भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया। राजधानी रांची स्थित मुख्यमंत्री आवास पर एक गरिमामय समारोह रखा गया, जहां राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने खुद आगे बढ़कर इन विजेता खिलाड़ियों का स्वागत किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने अपनी इन लाडली बेटियों से मुलाकात की और उनके साथ समय बिताते हुए उनके खेल के अनुभवों को बेहद गौरवान्वित होकर सुना। मुख्यमंत्री ने न सिर्फ खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाया, बल्कि पूरे राज्य की सवा करोड़ जनता की तरफ से उन्हें इस महान सफलता के लिए बधाई दी। इस दौरान मुख्यमंत्री आवास का पूरा माहौल उत्सव जैसा नजर आ रहा था, जहां खेल के प्रति समर्पण और सम्मान की एक अनोखी मिसाल देखने को मिली। सरकार की ओर से इस तरह का राजकीय सम्मान मिलना इन खिलाड़ियों के वर्षों के कड़े संघर्ष और बलिदान का सबसे बड़ा सिला साबित हुआ।

अंगवस्त्र और पारंपरिक प्रतीकों के साथ खिलाड़ियों का हुआ अभिनंदन

जब बात अपनों के सम्मान की हो, तो झारखंड की संस्कृति और परंपरा हमेशा आगे रहती है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने वाली झारखंड की इन हॉकी बेटियों को अंगवस्त्र ओढ़ाकर और पारंपरिक प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। सम्मान समारोह के दौरान जब खिलाड़ियों को एक-एक करके मंच पर बुलाया गया, तो पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। मुख्यमंत्री ने खुद अपने हाथों से खिलाड़ियों को सम्मानित करते हुए उनकी पीठ थपथपाई और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। इस पल की गवाह बनीं वे तमाम युवा खेल प्रतिभाएं भी थीं जो इन खिलाड़ियों को अपना आदर्श मानती हैं। सम्मान पाने वाली इन बेटियों के चेहरे पर एक अलग ही चमक और संतोष का भाव साफ झलक रहा था, जो यह बयां कर रहा था कि देश और राज्य के लिए मेडल जीतना उनके लिए दुनिया की सबसे बड़ी खुशी है। यह अभिनंदन समारोह सिर्फ एक औपचारिकता नहीं था, बल्कि यह राज्य सरकार की तरफ से खेल और खिलाड़ियों के प्रति प्रतिबद्धता का एक मजबूत संदेश था।

संघर्षों की भट्ठी से तपकर निकला है झारखंड की इन बेटियों का सोना

झारखंड के जंगलों और गांवों की पगडंडियों से निकलकर ओलंपिक और एशियन गेम्स जैसे दुनिया के सबसे बड़े मंचों तक पहुंचना इन बेटियों के लिए कभी भी आसान नहीं रहा है। राज्य के कई इलाकों में आज भी बुनियादी सुविधाओं का भारी अभाव है, बावजूद इसके यहां के बच्चों के भीतर खेल के प्रति जो जुनून और जज्बा है, वह उन्हें किसी भी परिस्थिति में टूटने नहीं देता। इन हॉकी खिलाड़ियों ने अपने शुरुआती दिनों में संसाधनों की भारी कमी का सामना किया है, फटे जूतों और बिना महंगी ट्रेनिंग के हॉकी स्टिक थामने से लेकर एस्ट्रो टर्फ तक का यह सफर उनके त्याग और अदम्य साहस की कहानी कहता है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी मुलाकात के दौरान इन खिलाड़ियों के इसी संघर्ष को सराहा और कहा कि झारखंड की बेटियां आज अपनी मेहनत के दम पर पूरे देश के लिए प्रेरणा स्रोत बन चुकी हैं। उनकी यह सफलता उन तमाम रूढ़ियों और बाधाओं का करारा जवाब है जो अक्सर ग्रामीण इलाकों की प्रतिभाओं के रास्ते में दीवार बनकर खड़ी होती हैं।

खेल और खिलाड़ियों के विकास के लिए सरकार उठा रही है कड़े कदम

झारखंड सरकार पिछले कुछ समय से खेल और खिलाड़ियों को बढ़ावा देने के लिए लगातार नए और महत्वाकांक्षी कदम उठा रही है। राज्य की खेल नीति के तहत ओलंपिक, एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में मेडल जीतने वाले खिलाड़ियों को करोड़ों रुपये के नगद पुरस्कार, सरकारी नौकरियां और उच्च स्तरीय खेल सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस मुलाकात के दौरान दोहराया कि झारखंड सरकार राज्य के हर एक कोने से निकलकर आ रही खेल प्रतिभा को निखारने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। ग्रामीण स्तर पर खेल अकादमियों का निर्माण किया जा रहा है, ताकि प्रतिभावान बच्चों को बचपन से ही आधुनिक तकनीक और कोचिंग मिल सके। एशियन गेम्स की इन स्वर्ण पदक विजेता बेटियों को भी सरकार द्वारा नियमानुसार उचित वित्तीय सहायता और सम्मानजनक पदों से नवाजा जा रहा है, ताकि वे बिना किसी आर्थिक चिंता के केवल अपने खेल पर पूरा ध्यान केंद्रित कर सकें और आने वाले अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट्स में देश के लिए और भी कई स्वर्ण पदक जीत सकें।

आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बनीं झारखंड की ये खेल नायिकाएं

आज झारखंड के छोटे-छोटे गांवों और कस्बों में रहने वाली लाखों बेटियां इन महिला हॉकी खिलाड़ियों को अपनी प्रेरणा मान रही हैं। पहले जहां बेटियों को घर की चारदीवारी तक सीमित रखने की मानसिकता समाज में हावी थी, वहीं अब इन खिलाड़ियों की सफलता ने उस रूढ़िवादी सोच को पूरी तरह से बदलने का काम किया है। जब एक आदिवासी परिवार की बेटी देश के लिए स्वर्ण पदक जीतकर अपने राज्य लौटती है, तो वह पूरे समाज के लिए एक नई उम्मीद की किरण बन जाती है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा किया गया यह सम्मान समारोह इन बेटियों के हौसलों को तो पंख दे ही रहा है, साथ ही राज्य के अन्य युवाओं को भी यह संदेश दे रहा है कि अगर इरादे मजबूत हों और मेहनत पूरी ईमानदारी से की जाए, तो सफलता निश्चित रूप से आपके कदम चूमती है। झारखंड का यह स्वर्ण युग अब खेल के मैदानों में अपनी एक अलग ही अमिट छाप छोड़ रहा है, और पूरा देश आने वाले समय में इन बेटियों से और भी बड़ी उपलब्धियों की उम्मीद लगाए बैठा है।