लखनऊ से बहराइच अब सिर्फ 90 मिनट में, केंद्र सरकार ने दी 7,000 करोड़ के महा-हाईवे को मंजूरी

लखनऊ से बहराइच अब सिर्फ 90 मिनट में, केंद्र सरकार ने दी 7,000 करोड़ के महा-हाईवे को मंजूरी

उत्तर प्रदेश के सड़क नेटवर्क को आधुनिक रफ्तार देने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को हरी झंडी दिखा दी है। बाराबंकी से बहराइच के बीच लगभग 101 किलोमीटर लंबे नए एक्सेस-कंट्रोल्ड नेशनल हाईवे-927 (NH-927) के निर्माण को आधिकारिक मंजूरी मिल गई है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए करीब 6,969.04 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत तय की गई है। शुरुआती चरण में इस ग्रीनफील्ड कॉरिडोर को 4-लेन का तैयार किया जाएगा, जिसके डिजाइन में भविष्य के ट्रैफिक दबाव को देखते हुए इसे 6-लेन तक चौड़ा करने का पूरा प्रावधान रखा गया है।

इस नए एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे के अस्तित्व में आने के बाद राजधानी लखनऊ से बहराइच की दूरी और समय में भारी कटौती दर्ज होगी। वर्तमान में पुराने मार्ग पर संकरे रास्तों और कई तीखे मोड़ों के चलते अक्सर जाम की गंभीर स्थिति बनी रहती है, जिससे यात्रियों को लंबा वक्त लग जाता है। नया कॉरिडोर घनी आबादी और भीड़भाड़ वाले कस्बों से पूरी तरह बाहर निकाला जाएगा, जिससे लखनऊ से बहराइच का सफर सिमटकर महज एक से डेढ़ घंटे का रह जाएगा। इस परियोजना के अंतर्गत स्थानीय ट्रैफिक को मुख्य हाईवे से अलग रखने के लिए करीब 48.28 किलोमीटर लंबे बाईपास और दोनों तरफ सर्विस लेन का निर्माण भी प्रस्तावित है, जिससे राष्ट्रीय राजमार्ग-27, 330एन और 730 से भी सीधा और सुगम संपर्क स्थापित हो सकेगा।

इस एक्सप्रेसवे का सबसे सीधा फायदा बाराबंकी, रामनगर, जरवल, कैसरगंज, कुंडासर और फखरपुर जैसे कस्बाई व ग्रामीण इलाकों को मिलेगा। इसके अलावा देवीपाटन मंडल के प्रमुख जिलों जैसे गोंडा, बलरामपुर और श्रावस्ती के लाखों लोगों के लिए राजधानी लखनऊ आना-जाना बेहद आसान और सुरक्षित हो जाएगा। चूंकि यह मार्ग सीधे तौर पर नेपाल सीमा से जुड़े तराई क्षेत्र को जोड़ता है, इसलिए सीमावर्ती व्यापार, स्थानीय पर्यटन और कृषि अर्थव्यवस्था को जबर्दस्त बूस्ट मिलेगा। किसान अपनी हरी सब्जियों और फलों को सीधे लखनऊ और अन्य महानगरों की बड़ी मंडियों तक बिना समय गंवाए पहुंचा सकेंगे, वहीं निर्माण और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में स्थानीय युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।

परियोजना को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए भूमि अधिग्रहण का खाका भी तैयार कर लिया गया है। अनुमान के मुताबिक, किसानों और भूस्वामियों से जमीन अधिग्रहण और मुआवजा वितरण पर लगभग 1,574 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके साथ ही पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए परियोजना के रास्ते में आने वाली वन भूमि के एवज में नियमानुसार सघन पौधरोपण (कैम्पा) और क्षतिपूर्ति की विस्तृत व्यवस्था की गई है। प्रशासनिक स्तर पर भूमि अधिग्रहण की प्राथमिक प्रक्रियाओं को तेजी से निपटाने के निर्देश दिए गए हैं ताकि निर्माण कार्य को जल्द रफ्तार दी जा सके।