Cyclone Arnab: चक्रवात अर्नब की दहाड़, किन राज्यों में कल बंद रहेंगे स्कूल?
बंगाल की खाड़ी से उठे भीषण चक्रवाती तूफान 'अर्नब' (Cyclone Arnab) ने तटीय राज्यों में तबाही मचाते हुए जनजीवन को बुरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। 125 से 140 किलोमीटर प्रति घंटे की खौफनाक रफ्तार वाली हवाओं और मूसलाधार बारिश के साथ तटों से टकराए इस साइक्लोन ने आंध्र प्रदेश, ओडिशा और पड़ोसी राज्यों में भारी तबाही मचाई है। चक्रवात के विकराल रूप और तेज मूसलाधार बारिश के खतरे को देखते हुए भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने कई जिलों के लिए रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। आपातकालीन परिस्थितियों, जलभराव और भारी तबाही की आशंका को देखते हुए राज्य प्रशासनों ने बच्चों और छात्रों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए प्रभावित इलाकों और राज्यों में शैक्षणिक संस्थानों व स्कूलों को बंद (School Holiday) रखने का आधिकारिक फरमान जारी कर दिया है।
आंध्र प्रदेश और ओडिशा में कुदरत का महाप्रकोप, संवेदनशील जिलों में स्कूल और आंगनवाड़ी केंद्र पूरी तरह बंद
चक्रवात 'अर्नब' के सबसे सीधे प्रभाव का सामना कर रहे आंध्र प्रदेश के 10 से अधिक जिलों में जिला प्रशासनों ने एहतियातन तौर पर सभी सरकारी, प्राइवेट स्कूलों और कॉलेजों में अवकाश घोषित कर दिया है। विशाखापत्तनम, अनाकापल्ली, काकीनाडा, बापटला और गोदावरी क्षेत्रों में चक्रवाती तूफानी हवाओं और समुद्र की तूफानी लहरों के चलते अगले आदेश तक शैक्षणिक गतिविधियां निलंबित रहेंगी। वहीं दूसरी तरफ, ओडिशा सरकार ने भी तटीय और दक्षिण-पूर्वी जिलों जैसे रायगड़ा, कोरापुट, नबरंगपुर, गंजाम, पुरी और खोर्धा में सभी सरकारी व निजी स्कूलों तथा आंगनवाड़ी केंद्रों को बंद रखने के कड़े निर्देश जारी किए हैं। ओडिशा के मुख्यमंत्री और आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (OSDMA) ने स्थिति का जायजा लेते हुए निचले इलाकों से हजारों लोगों को राहत शिविरों में पहुंचा दिया है।
झारखंड, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल तक पहुंचा चक्रवात का असर, भारी बारिश की चेतावनी के बीच छुट्टी का ऐलान
चक्रवात 'अर्नब' का असर केवल तटीय राज्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर अंतर्देशीय राज्यों में भी देखा जा रहा है। झारखंड में चक्रवात के प्रभाव से हो रही मूसलाधार बारिश और तेज तूफानी हवाओं को देखते हुए राजधानी रांची, पश्चिम सिंहभूम, खूंटी, सिमडेगा और पूर्वी सिंहभूम जिलों में कक्षा केजी से 12वीं तक के सभी सरकारी व निजी स्कूल 28 और 29 अक्टूबर को पूरी तरह बंद रखने का आदेश जारी किया गया है। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ के बस्तर, सुकमा और दंतेवाड़ा जिलों में भी आंध्र-ओडिशा सीमा से सटे इलाकों में एहतियातन स्कूलों और आंगनवाड़ियों को बंद कर दिया गया है। पश्चिम बंगाल के दिघा और मेदिनीपुर जैसे तटीय इलाकों में भी अलर्ट जारी करते हुए जिला अधिकारियों को स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर निर्णय लेने के लिए अधिकृत किया गया है।
रेलवे ट्रेनें रद्द, उड़ानें प्रभावित और एनडीआरएफ की टीमें तैनात
तूफान की भीषणता को देखते हुए दक्षिण पूर्व रेलवे और तटीय रेलवे मंडलों ने एहतियात के तौर पर दर्जनों ट्रेनों को रद्द या उनके रूट डायवर्ट कर दिए हैं। विशाखापत्तनम और भुवनेश्वर हवाई अड्डों से कई उड़ानों के परिचालन पर असर पड़ा है। चक्रवात के खतरे से निपटने और किसी भी आपातकालीन स्थिति से राहत पहुंचाने के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) की दर्जनों टीमों को संवेदनशील इलाकों में अत्याधुनिक नौकाओं और कटर मशीनों के साथ मुस्तैद रखा गया है। प्रशासन ने सभी नागरिकों और बच्चों के अभिभावकों को यह हिदायत दी है कि वे बिना वजह घरों से बाहर न निकलें और केवल आधिकारिक घोषणाओं व मौसम समाचार पर ही भरोसा करें।
अभिभावकों और छात्रों के लिए मौसम विभाग और शिक्षा विभाग की अहम सलाह
आपातकालीन आपदा प्रबंधन अधिकारियों ने कहा है कि भारी बारिश, तेज आंधी, बिजली की लाइनों के टूटने और सड़कों पर जलभराव के कारण छोटे बच्चों को स्कूल भेजना जोखिम भरा साबित हो सकता है। मौसम विभाग ने अगले 24 से 48 घंटों के दौरान चक्रवात के धीरे-धीरे कमजोर होने का अनुमान जताया है, लेकिन तब तक विभिन्न जिलों के जिला कलेक्टर (DM) स्थिति की लगातार निगरानी कर रहे हैं। छात्रों और अभिभावकों को सलाह दी गई है कि वे अपने संबंधित स्कूल ग्रुप्स और जिला प्रशासन द्वारा जारी किए जाने वाले बुलेटिन से अपडेट रहें। सुरक्षा के इस कड़े इंतजाम का मुख्य उद्देश्य यही है कि चक्रवात 'अर्नब' के दौरान होने वाली संभावित जनहानि और दुर्घटनाओं से मासूमों और आम जनता को पूरी तरह सुरक्षित रखा जा सके।