40 लाख स्कूली बच्चों की बल्ले-बल्ले! सरकार बांटेगी 1.20 करोड़ मुफ्त किताबें, खर्च होंगे 250 करोड़

40 लाख स्कूली बच्चों की बल्ले-बल्ले! सरकार बांटेगी 1.20 करोड़ मुफ्त किताबें, खर्च होंगे 250 करोड़

बिहार के सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले नौनिहालों की शुरुआती शिक्षा को रोचक और सुलभ बनाने के लिए राज्य शिक्षा विभाग ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। विभाग ने पहली और दूसरी कक्षा के लगभग 40 लाख नन्हे विद्यार्थियों को पूरी तरह मुफ्त पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराने का विस्तृत खाका तैयार किया है। इस नई पहल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि अब बच्चों को मानक हिंदी के साथ-साथ उनकी अपनी क्षेत्रीय मातृभाषा में भी सीखने और समझने का अवसर मिलेगा। नई व्यवस्था के तहत राज्य की छह प्रमुख आंचलिक भाषाओं- मैथिली, भोजपुरी, मगही, सुरजापुरी, बज्जिका और अंगिका—में विशेष पाठ्य सामग्री तैयार की जा रही है, जिसके लिए पाठ्यक्रम निर्धारण और प्रकाशन की प्रक्रिया को तेज करने के आधिकारिक निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

इस महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत कक्षा 1 और 2 के विद्यार्थियों के लिए कुल 1.20 करोड़ पुस्तकें छापने का विशाल लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिस पर राज्य सरकार लगभग 250 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट खर्च करेगी। प्राथमिक स्तर पर मुख्य रूप से हिंदी, गणित और अंग्रेजी विषय शामिल रहेंगे। गणित और अंग्रेजी के मूलभूत पाठ जहां यथावत बने रहेंगे, वहीं हिंदी की किताबों में क्षेत्रीय बोली-भाषा का समावेश किया जाएगा ताकि बच्चों के सामने भाषा की दीवार खड़ी न हो सके।

अक्सर देखा जाता है कि ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले मासूम बच्चे घर-परिवार में स्थानीय बोलियां बोलते हैं, लेकिन स्कूल की दहलीज पर कदम रखते ही जब उन्हें केवल मानक हिंदी में पढ़ाया जाता है तो वे सहम जाते हैं और पढ़ाई में पिछड़ने लगते हैं। अपनी ही जानी-पहचानी भाषा में पाठ्य सामग्री मिलने से बच्चे न सिर्फ विषयों को तेजी से आत्मसात कर सकेंगे, बल्कि कक्षा के वातावरण में खुलकर अपनी बात भी रख पाएंगे। शिक्षा विभाग की मंशा बच्चों के परिवेश और उनकी स्वाभाविक बोली को स्कूली शिक्षा की नींव बनाना है। इसके लिए नई किताबों में स्थानीय लोककथाओं, पारंपारिक बालगीतों, मनोरंजक पहेलियों और सांस्कृतिक रीति-रिवाजों को प्रमुखता से शामिल किया जा रहा है।

क्षेत्रीय विविधता को ध्यान में रखते हुए भौगोलिक आधार पर किताबों का वितरण और मुद्रण तय किया जाएगा। मिथिलांचल के जिलों के लिए मैथिली, शाहाबाद व सारण इलाके के लिए भोजपुरी, मगध प्रमंडल के लिए मगही, कोसी-सीमांचल के लिए सुरजापुरी, तिरहुत बेल्ट के लिए बज्जिका और भागलपुर-बांका के अंग क्षेत्र के लिए अंगिका भाषा पर आधारित पुस्तकें पहुंचाई जाएंगी। बच्चों के मानसिक विकास और सीखने की ललक जगाने के लिए इन किताबों को आकर्षक रंगीन चित्रों, कार्टून और खेल-आधारित गतिविधियों से सजाया जा रहा है ताकि पढ़ाई उनके लिए किसी बोझ के बजाय खेल-कूद का आनंद बन सके। फिलहाल शिक्षा विभाग पाठ्यक्रम को अंतिम रूप देने और प्रिंटिंग की टेंडर प्रक्रिया को निपटाने में जुटा है, जिसके बाद स्कूलों में वितरण की आधिकारिक तारीख घोषित की जाएगी।