विदेश में पढ़ाई के बाद भारत लौटने से इनकार, 13 फीसदी छात्र हमेशा के लिए छोड़ना चाहते हैं देश

विदेश में पढ़ाई के बाद भारत लौटने से इनकार, 13 फीसदी छात्र हमेशा के लिए छोड़ना चाहते हैं देश

उच्च शिक्षा के लिए सात समंदर पार जाने वाले भारतीय युवाओं के इरादों को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला अध्ययन सामने आया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी 'आईईएलटीएस वॉयस 2026 रिपोर्ट' के मुताबिक, विदेश में डिग्री लेने जा रहे भारतीय छात्र अब केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे संबंधित देश में लंबे समय तक या स्थायी तौर पर बसने का मजबूत मन बना रहे हैं।

वैश्विक स्तर पर वीजा और इमिग्रेशन नियमों में लगातार हो रही सख्ती के बावजूद भारतीय युवाओं में विदेश जाकर वहीं जिंदगी संवारने का आकर्षण कम होने के बजाय और ज्यादा गहराता दिख रहा है।

13% छात्र कभी नहीं लौटना चाहते भारत, चीन से आगे निकले भारतीय युवा

सर्वे में शामिल युवाओं के आंकड़े बताते हैं कि पढ़ाई पूरी करने के बाद स्वदेश लौटने के मामले में चीनी छात्रों की तुलना में भारतीय छात्र कहीं अधिक पीछे हैं। जहां चीनी छात्र डिग्री के बाद अपने मुल्क लौटने को प्राथमिकता देते हैं, वहीं भारतीय छात्र वहां टिके रहने के विकल्प तलाशते हैं।

  • 3 से 5 साल का प्रवास: अध्ययन में शामिल 41 फीसदी भारतीय छात्रों ने साफ किया कि वे पढ़ाई के बाद उसी देश में 3 से 5 साल तक रहकर काम करने की योजना बना चुके हैं, जबकि चीनी छात्रों में यह आंकड़ा केवल 26 फीसदी दर्ज किया गया।

  • अल्पकालिक रुकावट: लगभग 23 फीसदी भारतीय छात्रों की मंशा 1 से 2 साल विदेश में रुककर कार्य अनुभव लेने और फिर भारत वापस लौटने की है।

  • दीर्घकालिक प्रवास: करीब 10 फीसदी अभ्यर्थियों ने 5 साल या उससे अधिक समय तक वहां रुकने की इच्छा जताई है।

  • स्थायी नागरिकता (PR): सबसे हैरान करने वाला पहलू यह है कि 13 फीसदी भारतीय छात्रों ने दो टूक कहा कि वे वहीं स्थायी रूप से बसना (Permanent Residency) चाहते हैं और उनका भारत वापस लौटने का कोई इरादा नहीं है।

8400 से अधिक उम्मीदवारों पर हुआ 165 देशों का सर्वे

ये विस्तृत अध्ययन 19 मार्च से 17 अप्रैल 2026 के बीच आयोजित किया गया था। इसमें दुनिया के 165 देशों के लगभग 8,400 ऐसे अभ्यर्थियों को शामिल किया गया जो हाल ही में आईईएलटीएस की परीक्षा दे चुके थे या निकट भविष्य में परीक्षा देने की तैयारी कर रहे थे। इस रिपोर्ट को आईईएलटीएस के चार प्रमुख वैश्विक साझेदारों—ब्रिटिश काउंसिल, आईडीपी (IDP), आईईएलटीएस और कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस एंड असेसमेंट ने संयुक्त रूप से तैयार किया है।

भारतीय छात्रों की पहली पसंद बना कनाडा, यूके-ऑस्ट्रेलिया भी दौड़ में

ग्लोबल डेस्टिनेशन की बात करें तो भारतीय युवाओं के बीच कनाडा आज भी सबसे पसंदीदा देश बना हुआ है। सर्वे में शामिल कुल छात्रों में से 30 प्रतिशत अभ्यर्थियों ने कनाडा के शिक्षण संस्थानों से उच्च शिक्षा लेने की पहली प्राथमिकता जताई। इसके अलावा, 9-9 प्रतिशत छात्रों ने अपनी उच्च डिग्री और करियर निर्माण के लिए ब्रिटेन (UK) और ऑस्ट्रेलिया को अपनी शीर्ष पसंद के रूप में चुना।

आखिर क्यों मुल्क छोड़कर विदेशों में बसना चाहते हैं युवा?

रिपोर्ट के विश्लेषण के अनुसार, पढ़ाई के बाद छात्रों के स्वदेश न लौटने के पीछे कई अहम आर्थिक और सामाजिक कारण हैं। विदेशी धरती पर उच्च वेतन पैकेज, बेहतर और पारदर्शी जॉब मार्केट, आधुनिक लाइफस्टाइल और वर्क-लाइफ बैलेंस युवाओं को आकर्षित करता है। इसके अतिरिक्त, स्थायी निवास (पीआर) व विदेशी नागरिकता मिलने की आसान संभावना, अंतरराष्ट्रीय कार्य संस्कृति और ग्लोबल करियर एक्सपोजर युवाओं को भारत की तुलना में अधिक सुरक्षित और सुनहरे भविष्य का भरोसा दिलाता है।