यूनेस्को के नाम पर ₹60 करोड़ का खेल! ED दफ्तर से निकलते ही TMC के पूर्व मंत्री इंद्रनील अरेस्ट
पश्चिम बंगाल की राजनीति और भ्रष्टाचार के गलियारों से एक बार फिर बहुत बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। राज्य की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के पूर्व मंत्री और वरिष्ठ नेता इंद्रनील सेन को केंद्रीय प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भ्रष्टाचार के एक बेहद गंभीर मामले में लंबी पूछताछ के बाद आखिरकार गिरफ्तार कर लिया है। यह पूरा हाई-प्रोफाइल मामला अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक संगठन यूनेस्को (UNESCO) के नाम पर सरकारी फंड और भारी-भरकम राशि के फर्जीवाड़े से जुड़ा हुआ है। कोलकाता स्थित ईडी कार्यालय से बाहर निकलते ही केंद्रीय जांच एजेंसी के अधिकारियों ने उन्हें हिरासत में ले लिया, जिसके बाद बंगाल के राजनीतिक हलकों में भूचाल आ गया है। इस नाटकीय गिरफ्तारी ने एक बार फिर विपक्षी दलों को ममता बनर्जी सरकार पर हमलावर होने का बड़ा मौका दे दिया है, जबकि टीएमसी खेमे में इस कार्रवाई से भारी हड़कंप मच गया है।
क्या है यूनेस्को के नाम पर 60 करोड़ रुपये की हेराफेरी का पूरा मनी लॉन्ड्रिंग मामला
जांच एजेंसियों के मुताबिक, यह पूरा घोटाला उस समय का है जब इंद्रनील सेन पश्चिम बंगाल सरकार में कला और संस्कृति विभाग या संबंधित महकमों से जुड़े पदों की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। आरोप है कि कोलकाता की दुर्गा पूजा को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (Intangible Cultural Heritage) सूची में शामिल किए जाने के जश्न और अंतरराष्ट्रीय प्रचार-प्रसार के नाम पर सरकारी खजाने से लगभग 60 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि का आबंटन किया गया था। इस धन का उपयोग कायदे से सांस्कृतिक आयोजनों और वैश्विक स्तर पर ब्रांडिंग के लिए होना चाहिए था, लेकिन आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर इस विशाल फंड को फर्जी कंपनियों, चहेते इवेंट मैनेजमेंट फर्मों और शेल कंपनियों के जरिए ठिकाने लगाया गया। ईडी पिछले कई महीनों से इस फंड के वित्तीय लेनदेन और मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) के सबूत जुटाने में लगी हुई थी।
ईडी दफ्तर में लंबी पूछताछ, असहयोग और बयानों में विरोधाभास के बाद लिया गया कड़ा एक्शन
केंद्रीय प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पिछले कुछ दिनों में इंद्रनील सेन को कई बार समन भेजकर पूछताछ के लिए अपने सॉल्ट लेक स्थित दफ्तर में तलब किया था। बुधवार को जब वे अपने वकीलों के साथ ईडी के सवालों का सामना करने पहुंचे, तो जांच अधिकारियों द्वारा पूछे गए वित्तीय दस्तावेजों और बैंक खातों के ट्रांजैक्शन से जुड़े तीखे सवालों के वे संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। सूत्रों का कहना है कि पूछताछ के दौरान उनके बयानों में भारी विरोधाभास पाया गया और उन्होंने जांच में सहयोग करने से इनकार कर दिया। प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के प्रावधानों के तहत जब एजेंसी को यह पुख्ता सबूत मिल गए कि घोटाले की कड़ियां सीधे तौर पर पूर्व मंत्री से जुड़ती हैं, तो दफ्तर से बाहर निकलते ही उन्हें तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में आया उबाल, बीजेपी ने टीएमसी पर बोला तीखा हमला
इंद्रनील सेन की इस सनसनीखेज गिरफ्तारी के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति पूरी तरह से गरमा गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) और अन्य विपक्षी दलों ने ममता बनर्जी सरकार और टीएमसी पर निशाना साधते हुए कहा है कि तृणमूल कांग्रेस सरकार भ्रष्टाचार का पर्याय बन चुकी है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि यूनेस्को जैसे वैश्विक संगठन के नाम पर भी सरकारी पैसे को लूटने से ये लोग बाज नहीं आए। वहीं, दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता ने ईडी की इस कार्रवाई को पूरी तरह से राजनीतिक बदले की भावना और केंद्र सरकार की एजेंसियों का दुरुपयोग करार दिया है। टीएमसी का दावा है कि विपक्षी ताकतों की लोकप्रियता घटने के कारण केंद्रीय एजेंसियों को आगे करके उनकी पार्टी की छवि को धूमिल करने का सुनियोजित षड्यंत्र रचा जा रहा है।
कोर्ट में पेशी और आने वाले दिनों में हो सकते हैं और भी कई बड़े खुलासे
गिरफ्तारी के बाद केंद्रीय एजेंसी अब इंद्रनील सेन को विशेष पीएमएलए अदालत में पेश करके उनकी लंबी रिमांड की मांग करेगी, ताकि इस 60 करोड़ रुपये के घोटाले में शामिल अन्य बड़े चेहरों, बिचौलियों और कंपनियों के मालिकों तक पहुंचा जा सके। इस मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, वैसे-वैसे कई और चौंकाने वाले नाम सामने आने की पूरी संभावना जताई जा रही है। पश्चिम बंगाल के प्रशासनिक और राजनीतिक इतिहास में यह एक और ऐसा मामला बन गया है, जो भ्रष्टाचार के खिलाफ केंद्रीय जांच एजेंसियों की सख्ती और राज्य की सियासत में मचे घमासान को बयां करता है। आने वाले दिनों में यह कानूनी लड़ाई अदालत के भीतर और बाहर दोनों जगह और अधिक तेज होने वाली है।