भारत में 'रेजीम चेंज' की साजिश! कौन हैं वो विदेशी ताकतें, जिन पर बीजेपी ने लगाए गंभीर आरोप?
भारतीय राजनीति के गलियारों में उस समय एक अभूतपूर्व भूचाल आ गया जब सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने देश की लोकतांत्रिक प्रणाली को अस्थिर करने और चुनी हुई सरकार को गिराने की एक गहरी अंतरराष्ट्रीय साजिश का खुलासा किया। बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं और प्रवक्ताओं ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बेहद गंभीर और चौंकाने वाले आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ शक्तिशाली विदेशी ताकतें और वैश्विक समूह भारत में 'रेजीम चेंज' (तख्तापलट या सरकार बदलने) की साज़िश में जी-जान से जुटे हुए हैं। पार्टी का दावा है कि ये विदेशी ताकतें भारत की तीव्र आर्थिक प्रगति, बढ़ती वैश्विक साख और मजबूत कूटनीतिक रुख से घबरा गई हैं, इसलिए वे भारतीय लोकतंत्र को कमजोर करने के लिए देश के भीतर मौजूद कुछ राजनीतिक दलों, एनजीओ और तथाकथित बौद्धिक वर्गों का इस्तेमाल कर रही हैं। इस सनसनीखेज खुलासे के बाद पूरे देश की राजनीति में एक नई तीखी बहस छिड़ गई है और राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियां भी इस मुद्दे को लेकर अलर्ट मोड पर आ गई हैं।
आखिर क्या होती है 'रेजीम चेंज' की साज़िश और बीजेपी ने किस पर साधा निशाना?
अंतरराष्ट्रीय राजनीति और कूटनीति की शब्दावली में 'रेजीम चेंज' का अर्थ किसी देश की वैध और लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकार को बाहरी दबाव, फर्जी आख्यानों (Fake Narratives), आर्थिक प्रतिबंधों या अंदरूनी असंतोष भड़काकर सत्ता से बेदखल करना होता है। बीजेपी ने आरोप लगाया है कि पश्चिमी देशों के कुछ ऐसे वैश्विक संस्थान और अरबपति बिजनेसमैन, जो भारत की स्वतंत्र विदेश नीति को पचा नहीं पा रहे हैं, वे देश के सामाजिक ताने-बाने को छिन्न-भिन्न करने की कोशिश कर रहे हैं। बीजेपी नेताओं ने इशारा किया कि जब भी देश में बड़े चुनाव करीब आते हैं या भारत वैश्विक मंचों पर कोई बड़ा मुकाम हासिल करता है, तभी अचानक अंतरराष्ट्रीय मीडिया, विदेशी रेटिंग एजेंसियों और कुछ मानवाधिकार संगठनों द्वारा भारत की छवि को खराब करने वाली पक्षपातपूर्ण रिपोर्टें जारी की जाने लगती हैं। पार्टी का कहना है कि यह सब एक सुनियोजित और सुनियोजित तरीके से तैयार किए गए टूलकिट (Toolkit) का हिस्सा है जिसका एकमात्र मकसद देश के मतदाताओं के मन में भ्रम और असंतोष पैदा करना है।
विदेशी फंडिंग, एनजीओ नेटवर्क और टूलकिट के जरिए लोकतंत्र पर हमले का आरोप
बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ताओं ने अपनी बात को मजबूती से रखते हुए कई ऐसे उदाहरण और वित्तीय आंकड़ों का जिक्र किया जो इस बात की ओर इशारा करते हैं कि किस प्रकार करोड़ों रुपये की विदेशी फंडिंग भारतीय नेटवर्क में पंप की जा रही है। आरोप है कि कुछ विदेशी एनजीओ और रिसर्च संगठन भारत के आंतरिक मामलों, जैसे कि कृषि नीति, न्यायपालिका के फैसले, आर्थिक नीतियों और सामाजिक मुद्दों पर जनता को भड़काने के लिए बेहिसाब पैसा पानी की तरह बहा रहे हैं। पार्टी ने कहा कि ये विदेशी आका देश के भीतर मौजूद कुछ भारत-विरोधी तत्वों और राजनीतिक महत्वाकांक्षा रखने वाले लोगों को अपना जरिया बना रहे हैं। इन विदेशी ताकतों का उद्देश्य भारत के भीतर राजनीतिक अस्थिरता पैदा करना है ताकि एक ऐसी कमजोर और पराश्रित सरकार को सत्ता में लाया जा सके जो विदेशी ताकतों के इशारों पर काम करे और भारत के राष्ट्रीय हितों का सौदा करने के लिए मजबूर हो जाए।
विपक्ष का तीखा पलटवार, आरोपों को बताया ध्यान भटकाने की नाकाम कोशिश
बीजेपी द्वारा लगाए गए इन सनसनीखेज आरोपों के बाद प्रमुख विपक्षी दलों ने भी मोर्चा खोल दिया है और सत्ता पक्ष के दावों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। विपक्ष के प्रमुख नेताओं का कहना है कि सरकार अपनी आर्थिक विफलताओं, बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई और सामाजिक तनाव जैसे असली और बुनियादी मुद्दों से देश की जनता का ध्यान भटकाने के लिए विदेशी साजिशों का काल्पनिक डर दिखा रही है। विपक्षी प्रवक्ताओं ने तर्क दिया कि लोकतंत्र में सरकार से सवाल पूछना, जनहित के मुद्दों पर आंदोलन करना और मीडिया की निष्पक्ष रिपोर्टिंग करना एक जीवंत लोकतंत्र की पहचान होती है, न कि कोई विदेशी साजिश। विपक्ष ने चुनौती दी कि यदि सरकार के पास वाकई ऐसे किसी अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क या विदेशी फंडिंग के ठोस और पुख्ता सबूत मौजूद हैं, तो वे केवल प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के बजाय देश के सामने उन सबूतों को रखें और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई करें।
राष्ट्रीय सुरक्षा, साइबर वॉरफेयर और भारत के सामने मौजूद नई चुनौतियां
इस पूरे राजनीतिक घमासान के बीच भारत के सुरक्षा विशेषज्ञों और कूटनीतिज्ञों का मानना है कि आधुनिक दौर में किसी भी देश को कमजोर करने के लिए केवल पारंपरिक युद्ध ही एकमात्र जरिया नहीं रह गया है। आज के समय में हाइब्रिड वॉरफेयर, साइबर हमले, फर्जी सूचनाओं का प्रसार (Disinformation Campaigns) और नैरेटिव बिल्डिंग जैसे नए और अदृश्य हथियारों का इस्तेमाल किसी भी देश को अंदर से खोखला करने के लिए किया जा रहा है। भारत जिस तरह से दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था से तीसरी बड़ी ताकत बनने की ओर तेजी से अग्रसर है, ऐसे में वैश्विक शक्तियों की नजरें भारत की इस अभूतपूर्व वृद्धि पर टिकी हुई हैं। यह बेहद आवश्यक हो गया है कि देश के नागरिक और राजनीतिक दल राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता के मामलों में एकमत रहें, ताकि कोई भी बाहरी ताकत भारत की लोकतांत्रिक बुनियाद और आंतरिक शांति को नुकसान न पहुंचा सके। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि यह राजनीतिक लड़ाई और क्या नया मोड़ लेती है।