'सीक्रेट विदेश दौरे छोड़ें, ये 7 शर्तें मानें तो बढ़ेंगे सांसद': किरेन रिजिजू की राहुल गांधी को सलाह

'सीक्रेट विदेश दौरे छोड़ें, ये 7 शर्तें मानें तो बढ़ेंगे सांसद': किरेन रिजिजू की राहुल गांधी को सलाह

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ खुली बहस की बार-बार उठाई जा रही मांग पर केंद्र सरकार की ओर से जोरदार पलटवार सामने आया है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर देर रात एक पोस्ट साझा करते हुए राहुल गांधी को सात सीधी शर्तें गिना दीं। केंद्रीय मंत्री ने तंज कसते हुए कहा कि अगर कांग्रेस पार्टी भविष्य के आम चुनावों में अपनी सीटों का आंकड़ा बढ़ाना चाहती है और अधिक सांसद जिताना चाहती है, तो राहुल गांधी को इन बुनियादी नियमों का पालन करना ही होगा।

रिजिजू ने अपने सुझावों में सबसे पहला वार राहुल गांधी के लगातार होने वाले विदेश दौरों पर किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कांग्रेस नेता को भारत में ज्यादा समय बिताना चाहिए और अपनी बार-बार होने वाली गुप्त विदेशी छुट्टियों से पूरी तरह बचना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने विदेशी धरती पर देश विरोधी ताकतों से दूरी बनाने की सख्त नसीहत दी। संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि राहुल गांधी को उन लोगों से मिलना तुरंत बंद कर देना चाहिए जो भारत विरोधी एजेंडे को हवा देते हैं।

संसदीय व्यवस्था और राजनीतिक शिष्टाचार का जिक्र करते हुए केंद्रीय मंत्री ने राहुल गांधी को संसद को अधिक गंभीरता से लेने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि संसद की कार्यवाही में सांसदों को सार्थक बहस और चर्चा में हिस्सा लेने की पूरी आजादी मिलनी चाहिए। रिजिजू ने विपक्षी नेता से आग्रह किया कि वे अपनी पार्टी के भीतर बुजुर्गों और वरिष्ठ नेताओं का सम्मान करें और भारतीय परंपरा के अनुसार उनके अनुभव और ज्ञान से सीखें।

राजनीतिक कटुता पर बात रखते हुए रिजिजू ने कहा कि राहुल गांधी को भारतीय जनता पार्टी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति अपने मन में बैठी गहरी नफरत को खत्म करना चाहिए। उन्होंने साफ किया कि स्वस्थ लोकतंत्र में बीजेपी को एक राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी माना जाना चाहिए, न कि कोई निजी दुश्मन।

अपने आखिरी सुझावों में रिजिजू ने भारतीय संविधान और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति सच्ची निष्ठा दिखाने की बात कही। इसके साथ ही उन्होंने कांग्रेस की आंतरिक कार्यप्रणाली पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि पार्टी को वंशवादी राजनीति के साए से बाहर निकाला जाए और एक स्वतंत्र व लोकतांत्रिक दल के रूप में काम करने दिया जाए, तभी पार्टी का जनाधार लौट सकता है।