4 लाख का आईफोन भारत में हाथोंहाथ बिक गया, उधर कंगाल पाकिस्तान में देश छोड़कर क्यों भाग रहे ब्यूरोक्रेट्स?

4 लाख का आईफोन भारत में हाथोंहाथ बिक गया, उधर कंगाल पाकिस्तान में देश छोड़कर क्यों भाग रहे ब्यूरोक्रेट्स?

एशियाई उपमहाद्वीप के दो पड़ोसी देशों—भारत और पाकिस्तान—की अर्थव्यवस्था, सामाजिक व्यवस्था और भविष्य की तस्वीर इस समय दुनिया भर के विश्लेषकों के लिए एक बड़ा अध्ययन का विषय बनी हुई है। एक ओर जहां दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र और भारत जैसी उभरती हुई महाशक्ति आर्थिक समृद्धि के नए आयाम छू रही है, वहीं दूसरी ओर लंबे समय से राजनीतिक अस्थिरता, आतंकवाद और कुप्रबंधन के दलदल में फंसा पाकिस्तान बर्बादी के उस मुहाने पर खड़ा है जहां से वापसी की उम्मीदें लगभग समाप्त हो चुकी हैं। इस विरोधाभास का सबसे ताजा और जीवंत उदाहरण हाल ही में देखने को मिला, जब टेक बाजार में धूम मचाने वाले दुनिया के सबसे महंगे और प्रीमियम श्रेणी के लगभग चार लाख रुपये कीमत वाले अत्याधुनिक आईफोन (iPhone) भारत के महानगरों से लेकर टियर-2 शहरों तक में पलक झपकते ही हाथोंहाथ बिक गए। दूसरी तरफ, उसी भौगोलिक क्षेत्र में मौजूद पाकिस्तान में स्थिति इतनी बदतर हो चुकी है कि देश की रीढ़ कहे जाने वाले वरिष्ठ ब्यूरोक्रेट्स, सरकारी अधिकारी और डॉक्टर तक अपनी जान और भविष्य बचाने के लिए चुपचाप देश छोड़कर भागने की जुगत में लगे हुए हैं। यह दोनों घटनाएं दो अलग-अलग व्यवस्थाओं के पतन और उत्थान की पूरी कहानी खुद-ब-खुद बयां कर देती हैं।

भारत में लक्जरी और प्रीमियम उत्पादों की रिकॉर्ड मांग, बढ़ती क्रय शक्ति का प्रमाण

भारतीय उपभोक्ता बाजार में पिछले कुछ वर्षों में एक अभूतपूर्व बदलाव देखने को मिला है, जहां लोगों की केवल बुनियादी जरूरतें ही पूरी नहीं हो रही हैं, बल्कि उनकी क्रय शक्ति (Purchasing Power) और जीवनशैली का स्तर भी आसमान छू रहा है। जब दुनिया के सबसे महंगे और तकनीकी रूप से उन्नत प्रीमियम स्मार्टफोन, जिनकी कीमत लगभग चार लाख रुपये तक पहुंचती है, भारतीय बाजार में लॉन्च हुए, तो टेक प्रेमियों और संपन्न वर्ग ने बिना किसी हिचकिचाहट के इन्हें तुरंत खरीद लिया। एप्पल के इन सुपर-प्रीमियम मॉडल्स की एडवांस बुकिंग और पहले दिन की बिक्री ने सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए, जिससे यह साबित होता है कि भारत का मध्यम और उच्च वर्ग अब खर्च करने से पीछे नहीं हट रहा है। देश में बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था, फिनटेक क्रांति, स्टार्टअप बूम और कॉर्पोरेट सेक्टर में मिल रहे बेहतर पैकेजों के कारण युवाओं के पास डिस्पोजेबल इनकम (Disposable Income) में जबरदस्त इजाफा हुआ है। विश्लेषकों का मानना है कि यह ट्रेंड इस बात का स्पष्ट संकेत है कि भारतीय अर्थव्यवस्था केवल आंकड़ों में ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों के हाथों में मौजूद नकदी और वित्तीय आत्मविश्वास के स्तर पर भी बेहद मजबूत स्थिति में है।

पाकिस्तान में आर्थिक तंगी और चरमराती व्यवस्था, देश छोड़ने को मजबूर ब्यूरोक्रेट्स

एक तरफ जहां भारत में उपभोक्ता अपनी पसंद की सबसे महंगी और लग्जरी चीजें खरीदने में गर्व महसूस कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ठीक बगल में स्थित पाकिस्तान में हालात इस कदर भयानक हो चुके हैं कि वहां का पढ़ा-लिखा और संभ्रांत वर्ग भी देश में एक पल रुकने को तैयार नहीं है। पाकिस्तान की जर्जर अर्थव्यवस्था, बेतहाशा महंगाई, विदेशी मुद्रा भंडार के लगभग शून्य होने और अंतरराष्ट्रीय कर्ज के बोझ तले दबने के कारण पूरा प्रशासनिक ढांचा चरमरा चुका है। स्थिति इतनी वीभत्स हो चुकी है कि देश की नौकरशाही यानी ब्यूरोक्रेट्स, जो किसी भी राष्ट्र की प्रशासनिक व्यवस्था की रीढ़ होते हैं, वे अब अपनी नौकरियां छोड़कर और अपने परिवारों को सुरक्षित ठिकानों पर भेजकर चुपचाप देश से फरार हो रहे हैं। पाकिस्तानी मीडिया और खुफिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कई वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, सिविल सेवा के ट्रेनी और तकनीकी विशेषज्ञ वैध या अवैध मार्गों से यूरोप, खाड़ी देशों और उत्तरी अमेरिका में शरण लेने के लिए मजबूर हैं। सरकार द्वारा समय पर वेतन न मिल पाना, भारी भ्रष्टाचार, राजनीतिक हस्तक्षेप और चरम कानून-व्यवस्था की स्थिति ने इन अधिकारियों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि पाकिस्तान का भविष्य अब पूरी तरह अंधकारमय हो चुका है।

दो अलग रास्ते और दो विपरीत भविष्य: एक तरफ विकास तो दूसरी तरफ पलायन

इन दोनों पड़ोसी देशों के विरोधाभासी परिदृश्य को यदि वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक चश्मे से देखा जाए, तो यह स्पष्ट हो जाता है कि नीयत, नीति और नेतृत्व किसी भी देश के भाग्य का फैसला करने में कितनी बड़ी भूमिका निभाते हैं। भारत ने पिछले एक दशक में जिस प्रकार से बुनियादी ढांचे, मैन्युफैक्चरिंग, डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर (DPI) और वित्तीय अनुशासन पर ध्यान केंद्रित किया है, उसने देश को दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना दिया है और अब यह तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर तेजी से अग्रसर है। इसके विपरीत, पाकिस्तान ने अपनी ऊर्जा और संसाधनों को क्षेत्रीय अस्थिरता और आंतरिक कलह में झोंक दिया, जिसका परिणाम आज यह है कि वहां का आम नागरिक दो जून की रोटी के लिए संघर्ष कर रहा है और जो लोग देश चलाने की जिम्मेदारी उठाए हुए थे, वे खुद अपनी जान बचाकर भागने में लगे हैं। चार लाख रुपये का आईफोन खरीदना केवल एक गैजेट का शौक नहीं है, बल्कि यह उस भरोसे का प्रतीक है जो एक नागरिक को अपनी अर्थव्यवस्था पर होता है, जबकि पाकिस्तान से ब्यूरोक्रेट्स का पलायन इस बात की अंतिम मुहर है कि जब नीतियां विफल हो जाती हैं, तो राज्य का पूरा सिस्टम ढह जाता है। आने वाले समय में यह खाई और अधिक चौड़ी होने वाली है, क्योंकि भारत वैश्विक मंच पर अपनी नई ऊंचाइयां छू रहा है और पाकिस्तान इतिहास के सबसे गहरे संकट से जूझ रहा है।