चीन-पाक की छाती पर सांप लोटा! मुस्लिम देशों में मची भारत के 'ब्रह्मास्त्र' ब्रह्मोस की भारी लूट, दक्षिण चीन सागर से खाड़ी देशों तक खरीदने की मची होड़
वैश्विक रक्षा बाजार में भारत ने एक ऐसा ऐतिहासिक मुकाम हासिल कर लिया है, जिसने ड्रैगन और बीजिंग की नींद उड़ा दी है। भारत और रूस के संयुक्त प्रयास से तैयार दुनिया की सबसे घातक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल 'ब्रह्मोस' को अपने बेड़े में शामिल करने के लिए अब दुनिया के कई शक्तिशाली मुस्लिम देशों के बीच होड़ मच गई है। सामरिक रूप से बेहद संवेदनशील दक्षिण चीन सागर की लहरों से लेकर फारस की खाड़ी के रेतीले मैदानों तक, हर कोई भारत के इस 'ब्रह्मास्त्र' का मुरीद हो चुका है। पारंपरिक रूप से चीनी या पश्चिमी हथियारों पर निर्भर रहने वाले ये देश अब भारतीय मिसाइल प्रणाली पर अटूट भरोसा जता रहे हैं, जो इस बात का सबूत है कि नई दिल्ली अब ग्लोबल डिफेंस एक्सपोर्ट का नया किंग बन चुका है।
चीन के आक्रामक विस्तारवाद के खिलाफ गेम चेंजर बनी ब्रह्मोस मिसाइल
दक्षिण चीन सागर में चीन की दादागिरी और आक्रामक सैन्य हरकतों से परेशान दक्षिण-पूर्व एशिया के मुस्लिम बहुल देशों के लिए ब्रह्मोस एक अचूक ढाल बनकर उभरी है। भारत का पहला विदेशी ग्राहक फिलीपींस बना, जिसके साथ साल 2022 में 375 मिलियन डॉलर का ऐतिहासिक रक्षा सौदा हुआ था। फिलीपींस को इसके शोर-बेस्ड एंटी-शिप वेरिएंट की डिलीवरी भी शुरू हो चुकी है और इसके बेहतरीन प्रदर्शन की वैश्विक स्तर पर तारीफ हो रही है। फिलीपींस की इस कामयाबी को देखकर अब इंडोनेशिया और मलेशिया जैसी क्षेत्रीय महाशक्तियां भी ब्रह्मोस एंटी-शिप मिसाइल सिस्टम को अपनी सेना का हिस्सा बनाने के लिए कतार में सबसे आगे खड़ी हैं, ताकि चीनी नौसेना की घुसपैठ को कड़ा जवाब दिया जा सके।
मलेशिया से लेकर वियतनाम तक ब्रह्मोस का जलवा, अरब देशों ने भी दिखाए तेवर
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, ब्रह्मोस के एयर-लॉन्च्ड वेरिएंट को लेकर मलेशिया ने अपने Su-30MKM लड़ाकू विमानों के लिए भारी दिलचस्पी दिखाई है। इसके अलावा थाईलैंड, सिंगापुर और ब्रुनेई जैसे देश भी इस होड़ में शामिल हैं। वहीं, वियतनाम के साथ भारत का करीब 450 से 700 मिलियन डॉलर का एक महासौदा फाइनल होने के बेहद करीब है, जिसमें वियतनामी सेना और नौसेना दोनों के लिए मिसाइल सिस्टम शामिल हो सकते हैं। इस सौदे को रूस की तरफ से भी हरी झंडी मिल चुकी है। दूसरी तरफ, फारस की खाड़ी के सबसे अमीर और ताकतवर खाड़ी देश जैसे संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और सऊदी अरब भी भारत के इस मारक हथियार को खरीदने के लिए बेताब हैं। ईरान समर्थित विद्रोहियों के खतरों के बीच अपने तेल प्रतिष्ठानों और समुद्री व्यापारिक मार्गों को सुरक्षित रखने के लिए कतर, ओमान और मिस्र जैसे देश भी ब्रह्मोस की मांग कर रहे हैं।
आखिर क्यों ब्रह्मोस के सामने पानी भरते हैं दुनिया के बड़े-बड़े एयर डिफेंस सिस्टम?
ब्रह्मोस को दुनिया की सबसे खतरनाक मिसाइल इसकी अद्वितीय मारक क्षमता और बेजोड़ तकनीक बनाती है, जिसका तोड़ फिलहाल किसी देश के पास नहीं है:
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ध्वनि से तीन गुना तेज रफ्तार: यह मिसाइल मैक 2.8 से मैक 3.0 की सुपरसोनिक रफ्तार (ध्वनि की गति से लगभग तीन गुना तेज) से हमला करती है। इतनी तीव्र गति के कारण दुनिया का कोई भी आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम इसे बीच हवा में इंटरसेप्ट या नष्ट नहीं कर सकता।
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रडार को चकमा देने वाली स्टील्थ तकनीक: ब्रह्मोस में उन्नत स्टील्थ टेक्नोलॉजी और 'सी-स्किमिंग' की अद्भुत क्षमता है। यह समुद्र या जमीन की सतह से महज कुछ मीटर की ऊंचाई पर उड़ती है, जिससे दुश्मन के रडार इसे तब तक नहीं देख पाते जब तक कि यह सीधे निशाने पर न टकरा जाए।
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दागो और भूल जाओ (Fire and Forget): इसे जल, थल, नभ और पनडुब्बी जैसे किसी भी प्लेटफॉर्म से दागा जा सकता है। एक बार लॉन्च होने के बाद यह अपने लक्ष्य को खुद ढूंढकर नेस्तनाबूद कर देती है।
'ऑपरेशन सिंदूर' की महासफलता ने दुनिया को किया हैरान
ब्रह्मोस मिसाइल की वैश्विक मांग रातों-रात नहीं बढ़ी है, बल्कि इसके पीछे इसकी अचूक सटीकता का एक लंबा और बेहतरीन ट्रैक रिकॉर्ड रहा है। हाल ही में संपन्न हुए 'ऑपरेशन सिंदूर' ने इस मिसाइल की साख में चार चांद लगा दिए। इस विशेष ऑपरेशन और लाइव परीक्षण के दौरान ब्रह्मोस ने दुश्मन के सबसे अभेद्य और कड़े सुरक्षा चक्र को छिन्न-भिन्न करते हुए पिन-पॉइंट सटीकता के साथ अपना जलवा दिखाया। ऑपरेशन सिंदूर की इस महासफलता ने उन वैश्विक खरीदारों के मन से सारे संशय दूर कर दिए जो पहले इस तकनीक को परखना चाहते थे। इस प्रदर्शन के बाद ही दुनिया के करीब 14 से 17 देशों ने भारत से संपर्क साध कर ब्रह्मोस डील में अपनी गहरी रुचि व्यक्त की है।
पाकिस्तान का झूठा प्रोपगैंडा फेल, चीनी हथियारों के बाजार पर भारत का कब्जा
भारत की इस ऐतिहासिक रक्षा और कूटनीतिक कामयाबी से पाकिस्तान और चीन के खेमे में भारी खलबली मची हुई है। पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रह्मोस की तकनीक और उसके नेविगेशन सिस्टम को लेकर कई बार मनगढ़ंत और झूठी खबरें फैलाने की साजिश रची, ताकि दुनिया के मुस्लिम देशों को इसे खरीदने से रोका जा सके। वहीं चीन ने भी अपने सरकारी मीडिया और कूटनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों पर दबाव बनाने का पूरा प्रयास किया। लेकिन अंतरराष्ट्रीय मंचों पर चीन और पाकिस्तान का यह सारा प्रोपगैंडा औंधे मुंह गिर गया। दुनिया भर के सैन्य विशेषज्ञों ने माना कि ब्रह्मोस की विश्वसनीयता (Reliability) 99% से भी अधिक है। यही वजह है कि लैटिन अमेरिकी देश जैसे ब्राजील, चिली, अर्जेंटीना, वेनेजुएला और दक्षिण अफ्रीका भी अब भारत के इस मिसाइल तंत्र के मुरीद हो चुके हैं।