'शून्य' के तंज से बची कांग्रेस, नागपुर की जीत बनी संजीवनी बूटी, बेंगलुरु-दरभंगा में मुंह की खाई
चार राज्यों की 28 विधान परिषद (MLC) सीटों पर हाल ही में आए चुनावी नतीजों ने देश के सियासी गलियारों में एक नया राजनीतिक भूचाल ला दिया है। शुरुआती मतगणना में जब कांग्रेस उत्तर प्रदेश, बिहार और अपने शासन वाले राज्य कर्नाटक में एक भी सीट हासिल करने में नाकाम रही, तो सत्ताधारी दल भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर 'अंडा' (शून्य) मिलने का जोरदार तंज कसा। हालांकि, 40 घंटे से अधिक समय तक चली मैराथन मतगणना के बाद महाराष्ट्र की उपराजधानी नागपुर स्नातक सीट से आए अप्रत्याशित फैसले ने बाजी पलट दी। नागपुर में कांग्रेस उम्मीदवार अभिजीत वंजारी ने भाजपा के पूर्व विधायक सुधाकर कोहले को पराजित कर इस सीट पर दोबारा कब्जा जमा लिया। देवेंद्र फडणवीस और नितिन गडकरी के इस मजबूत गढ़ से मिली ऐतिहासिक जीत ने कांग्रेस को चारों राज्यों में शून्य पर आउट होने के भारी अपमान से बचा लिया, जिसे पार्टी के लिए बड़ी 'संजीवनी बूटी' माना जा रहा है। इसके विपरीत, कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु शिक्षक सीट और बिहार के दरभंगा में मिली करारी शिकस्त ने पार्टी के रणनीतिकारों को झकझोर कर रख दिया है।
नागपुर में जीत का बड़ा चमत्कार: फडणवीस-गडकरी के गढ़ में कांग्रेस की ऐतिहासिक वापसी
महाराष्ट्र की उपराजधानी नागपुर को लंबे समय से संघ (RSS) और भाजपा का सबसे मजबूत राजनीतिक किला माना जाता रहा है। लेकिन नागपुर विभाग स्नातक सीट के लिए हुए कड़े मुकाबले में कांग्रेस प्रत्याशी अभिजीत वंजारी ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी भाजपा प्रत्याशी सुधाकर कोहले को 3,271 वोटों के अंतर से शिकस्त देकर इस सीट को बरकरार रखा। वंजारी को कुल 67,231 वोट मिले, जबकि भाजपा उम्मीदवार को 63,960 वोटों पर ही संतोष करना पड़ा। इस जीत का राजनीतिक महत्व इसलिए भी कई गुना बढ़ गया क्योंकि नतीजे घोषित होने से ठीक पहले भाजपा के शीर्ष नेतृत्व द्वारा कांग्रेस के 'जीरो' पर सिमटने का दावा किया जा रहा था। नागपुर के इस ऐतिहासिक फैसले ने विपक्षी महाविकास अघाड़ी (MVA) को नई राजनीतिक ऊर्जा दी है और कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह भर दिया है।
बेंगलुरु में बैकफुट पर सत्तारूढ़ कांग्रेस: NDA गठबंधन ने कर्नाटक में किया सूपड़ा साफ
नागपुर में जहां खुशियों का माहौल रहा, वहीं कर्नाटक से आई खबर ने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को बड़ा झटका दिया। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के नेतृत्व वाली सत्तारूढ़ कांग्रेस राज्य की चारों विधान परिषद सीटों पर बुरी तरह हार गई। सबसे बड़ा झटका बेंगलुरु टीचर्स (शिक्षक) निर्वाचन क्षेत्र में लगा, जहां कांग्रेस के सिटिंग एमएलसी पुत्तन्ना को भाजपा-जेडीएस गठबंधन के प्रत्याशी ए.पी. रंगनाथ ने 908 वोटों से हरा दिया। बेंगलुरु की इस प्रतिष्ठित सीट पर हार और अन्य तीन सीटों पर एनडीए (NDA) प्रत्याशियों की जीत ने यह साबित कर दिया कि राज्य में सत्तारूढ़ होने के बावजूद कांग्रेस शहरी शिक्षित और शिक्षक मतदाताओं के विश्वास को बचाए रखने में असफल साबित हो रही है।
बिहार के दरभंगा में प्रशांत किशोर की पार्टी का धमाका: कांग्रेस-आरजेडी की जमीन खिसकी
बिहार के राजनीतिक पटल पर विधान परिषद चुनाव के नतीजों ने क्षेत्रीय राजनीति की पूरी तस्वीर ही बदलकर रख दी है। मिथिलांचल के केंद्र माने जाने वाले दरभंगा में प्रशांत किशोर की नई नवेली 'जन सुराज पार्टी' ने शानदार जीत दर्ज कर अपना चुनावी खाता खोल लिया। दरभंगा शिक्षक सीट पर जन सुराज उम्मीदवार ने भारी मतों से विजय हासिल की, जबकि कांग्रेस और मुख्य विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) का प्रदर्शन बेहद शर्मनाक रहा। दरभंगा में विपक्षी महागठबंधन का यह सूपड़ा साफ होना इस बात का स्पष्ट संदेश है कि बिहार का पढ़ा-लिखा और युवा वर्ग अब पारंपारिक जातीय समीकरणों और कांग्रेस की पुरानी कार्यशैली से हटकर तीसरे विकल्प को चुनने के लिए तैयार दिख रहा है।
यूपी में सपा का बड़ा प्रदर्शन और चारों राज्यों के नतीजों का कूटनीतिक संदेश
इन विधान परिषद चुनावों का असर उत्तर प्रदेश में भी व्यापक रूप से देखा गया, जहां 11 सीटों में से भाजपा को 6 सीटों पर जीत मिली, जबकि अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी (SP) ने 5 सीटों पर शानदार कब्जा जमाया। विशेष रूप से वाराणसी शिक्षक सीट पर सपा की जीत ने प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र के आसपास अपनी मजबूत पकड़ दर्ज कराई। कुल मिलाकर, इन चार राज्यों की 28 MLC सीटों पर बैलेट पेपर से हुए चुनावों में एनडीए गठबंधन ने 16 से अधिक सीटें जीतकर अपनी श्रेष्ठता साबित की। हालांकि, कांग्रेस के लिए नागपुर की एकमात्र जीत भले ही ढाल बनकर आई हो, लेकिन बेंगलुरु और दरभंगा के नतीजों ने पार्टी आलाकमान के सामने आने वाले आगामी विधानसभा चुनावों से पहले एक कड़ा और बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।