फिलीपींस के सेबू शहर में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का ऐतिहासिक और भारत की बढ़ती वैश्विक ताकत पर दिया गया ओजस्वी संबोधन
भारत की विदेश और रक्षा नीति आज दुनिया के पटल पर एक नए और शक्तिशाली अवतार में उभरकर सामने आ रही है। फिलीपींस के ऐतिहासिक और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण शहर सेबू (Cebu) में आयोजित एक उच्चस्तरीय अंतरराष्ट्रीय रक्षा सम्मेलन को संबोधित करते हुए भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक ऐसा बयान दिया, जिसने पूरी दुनिया के कूटनीतिक गलियारों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में गर्व के साथ कहा कि 'अब भारत बोलता है तो दुनिया कान लगाकर सुनती है'। उनका यह बयान केवल एक राजनीतिक टिप्पणी नहीं है, बल्कि यह नए और आत्मनिर्भर भारत की उस मजबूत हकीकत का जीवंत प्रमाण है, जो अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी शर्तों और राष्ट्रीय हितों के आधार पर बेबाकी से अपनी बात रखना अच्छी तरह जानता है। रक्षा मंत्री के इस भाषण के बाद वैश्विक मीडिया और रक्षा विशेषज्ञों के बीच भारत के बढ़ते कूटनीतिक और सैन्य प्रभाव को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
वैश्विक कूटनीति में भारत की बदलती भूमिका और बदलते दौर का स्पष्ट संदेश
अपने संबोधन के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दुनिया को यह अहसास कराया कि आज का भारत किसी भी वैश्विक दबाव में झुकने वाला देश नहीं है, बल्कि वह दुनिया की बड़ी महाशक्तियों के समकक्ष आँख में आँख डालकर बात करने की क्षमता रखता है। अतीत के दशकों में जब भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी बात रखता था, तो उसे उतनी तवज्जो नहीं मिलती थी जितनी आज मिलती है। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले कुछ वर्षों में भारत ने अपनी आर्थिक, तकनीकी और सैन्य ताकत का जो लोहा मनवाया है, उसके कारण आज ग्लोबल साउथ (Global South) से लेकर पश्चिमी देशों तक हर कोई भारत के दृष्टिकोण को बेहद गंभीरता से सुनता है। चाहे वैश्विक आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति हो या अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन को मजबूत करने की बात, भारत आज दुनिया के लिए एक 'संकटमोचक' और 'विश्वबंधु' के रूप में अपनी मजबूत भूमिका निभा रहा है।
इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा, शांति और रणनीतिक साझेदारी पर भारत का स्पष्ट विजन
फिलीपींस के सेबू में दिए गए इस भाषण का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा इंडो-पैसिफिक (Indo-Pacific) क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और नौवहन की स्वतंत्रता (Freedom of Navigation) से जुड़ा था। पिछले कुछ वर्षों में दक्षिण चीन सागर और हिंद महासागर क्षेत्र में जिस प्रकार की भू-राजनीतिक उथल-पुथल मची हुई है, उसमें फिलीपींस जैसे आसियान (ASEAN) देश भारत की तरफ एक भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार के रूप में देख रहे हैं। रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत इस क्षेत्र में किसी भी देश की विस्तारवादी नीतियों या दादागिरी के सख्त खिलाफ है और वह अंतरराष्ट्रीय कानूनों, समुद्री संप्रभुता तथा संप्रभु देशों की अखंडता का पूर्ण समर्थन करता है। भारत और फिलीपींस के बीच रक्षा उपकरणों के आदान-प्रदान, ब्रह्मोस मिसाइल सौदों और संयुक्त सैन्य अभ्यासों ने इस क्षेत्र में शक्ति संतुलन को बनाए रखने में बहुत बड़ी भूमिका निभाई है।
रक्षा क्षेत्र में 'मेक इन इंडिया' और आत्मनिर्भर भारत की गूंज अब विदेशों में भी सुनाई दे रही है
राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में केवल कूटनीति तक ही खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि भारतीय रक्षा उद्योग की उपलब्धियों को भी गर्व के साथ दुनिया के सामने रखा। कभी दुनिया का सबसे बड़ा रक्षा आयातक देश रहने वाला भारत आज तेजी से रक्षा निर्यातक (Defense Exporter) देश के रूप में बदल रहा है। 'आत्मनिर्भर भारत' और 'मेक इन इंडिया' (Make in India) अभियान के तहत देश में ही अत्याधुनिक हथियारों, तोपों, युद्धपोतों, रडार प्रणालियों और ब्रह्मोस जैसी सुपरसोनिक मिसाइलों का निर्माण किया जा रहा है। सेबू में जब रक्षा मंत्री ने यह बताया कि भारत अब मित्र देशों को भी उच्च गुणवत्ता वाले रक्षा उपकरण किफायती दामों पर मुहैया कराने में सक्षम है, तो वहां मौजूद विदेशी प्रतिनिधियों और सैन्य अधिकारियों ने इस उपलब्धि की खुले दिल से सराहना की।
अंतरराष्ट्रीय पटल पर नए भारत का उदय और भविष्य के वैश्विक समीकरणों पर इसका प्रभाव
फिलीपींस के सेबू से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा दिया गया यह बयान इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि भारत अब अपनी रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करता है। दुनिया के तमाम देश आज आर्थिक अनिश्चितताओं और क्षेत्रीय तनावों के दौर से गुजर रहे हैं, ऐसे में एक स्थिर, लोकतांत्रिक और मजबूत भारत का वैश्विक नेतृत्व करना पूरी मानवता के लिए एक बड़ी उम्मीद की किरण बन गया है। जब भारत बोलता है और दुनिया कान लगाकर सुनती है, तो यह हर भारतीय के लिए गर्व का विषय होता है, क्योंकि यह आवाज 140 करोड़ देशवासियों के अटूट विश्वास, सैनिकों के पराक्रम और देश की बढ़ती आर्थिक व सैन्य शक्ति की गूंज होती है, जो आने वाले समय में वैश्विक राजनीति की दिशा और दशा दोनों को तय करने वाली है।