अचानक खत्म हो जाए गैस तो न लें टेंशन: बिना एड्रेस प्रूफ 4 घंटे में घर पहुंचेगा का ये खास सिलेंडर
दीपावली के त्योहार की खुशियों के बीच हर घर की रसोई में लजीज पकवानों और मिठाइयों की तैयारी जोर-शोर से चल रही है। मेहमानों की आवाजाही और लगातार खान-पान के चलते इस मौसम में सामान्य दिनों की तुलना में एलपीजी गैस की खपत काफी बढ़ जाती है। ऐसे व्यस्त माहौल में अगर ऐन वक्त पर घरेलू गैस सिलेंडर खाली हो जाए, तो त्योहार का पूरा रंग फीका पड़ सकता है। हालांकि, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL) के इंडेन ग्राहकों को ऐसी किसी आपात स्थिति में घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है, क्योंकि कंपनी के दो खास छोटे सिलेंडर आपकी रसोई को बिना रुकावट चालू रखेंगे।
इंडियन ऑयल अपने उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए 5 किलोग्राम और उससे छोटे आकार के एलपीजी सिलेंडर फ्री ट्रेड एलपीजी (FTL) श्रेणी के तहत बाजार में उपलब्ध कराता है, जिन्हें 'छोटू' और 'मुन्ना' नाम से जाना जाता है। मुन्ना सिलेंडर विशेष रूप से उन उपभोक्ताओं के लिए बेहद मुफीद है, जिनकी दैनिक खपत कम होती है। हॉस्टल में रहने वाले छात्र, कामकाजी महिलाएं, प्रवासी श्रमिक और छोटे स्ट्रीट वेंडर इसे कम जगह में भी बेहद आसानी से इस्तेमाल कर सकते हैं। वहीं दूसरी तरफ 5 किलो वाला 'छोटू' सिलेंडर छोटे परिवारों और त्योहारों के दौरान अतिरिक्त गैस बैकअप रखने वाले घरों के लिए सबसे मुफीद और भरोसेमंद विकल्प बनकर उभरा है।
पोर्टेबल सिलेंडरों की सबसे बड़ी खूबी क्या
इन पोर्टेबल सिलेंडरों की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इन्हें लेने के लिए किसी तरह के स्थानीय पते के प्रमाण (लोकल एड्रेस प्रूफ) की कोई बाध्यता नहीं रखी गई है। उपभोक्ता इन्हें नजदीकी इंडेन गैस एजेंसी के अलावा इंडियन ऑयल के चुनिंदा पेट्रोल पंपों, अधिकृत किराना स्टोर्स और सुपरमार्केट से भी सीधे खरीद सकते हैं या रिफिल करवा सकते हैं। उपभोक्ताओं की सुविधा को और आसान बनाते हुए इंडियन ऑयल ने छोटू सिलेंडर के लिए एक्सप्रेस होम डिलीवरी की सुविधा भी शुरू की है, जिसका मकसद महज चार घंटे के भीतर ग्राहक के दरवाजे तक रिफिल पहुंचाना है।
मौजूदा एलपीजी दरों की बात करें तो 14.2 किलोग्राम वाले सामान्य घरेलू सिलेंडर की दर 942 रुपये के स्तर पर बनी हुई है, जबकि 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत 10 रुपये की बढ़ोतरी के साथ 2,820 रुपये दर्ज की गई है। तेल विपणन कंपनियां हर महीने की पहली तारीख को कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय दरों, डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति और स्थानीय करों की समीक्षा के आधार पर गैस की नई कीमतें निर्धारित करती हैं।