मजदूरों और कामगारों के लिए वरदान बनी नई योजना! जनवरी से इन 12 शहरों में शुरू होगी 5 रुपए वाली रसोई

मजदूरों और कामगारों के लिए वरदान बनी नई योजना! जनवरी से इन 12 शहरों में शुरू होगी 5 रुपए वाली रसोई

उत्तर प्रदेश के मेहनतकश मजदूरों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को महंगाई के दौर में बड़ी राहत देने के लिए योगी सरकार एक महत्वाकांक्षी कदम उठाने जा रही है। राज्य सरकार 'मां अन्नपूर्णा भोजन योजना' के जरिए जरूरतमंदों को मात्र 5 रुपये में भरपेट और पौष्टिक भोजन मुहैया कराएगी। शासन की मंशा है कि दिन-रात पसीना बहाने वाले श्रमिकों को न्यूनतम कीमत पर पौष्टिक आहार मिले, जिससे उनके स्वास्थ्य और बजट दोनों को संबल मिल सके।

इस योजना के तहत हर दिन सुबह और शाम दोनों वक्त भोजन वितरण का पुख्ता प्रबंध किया जाएगा। शुरुआत में श्रम विभाग के अंतर्गत पंजीकृत श्रमिकों और घरेलू कामगारों को प्राथमिकता देने की रूपरेखा तैयार की गई है। सरकार का लक्ष्य नए साल में जनवरी माह से पहले चरण के तहत चयनित 12 प्रमुख जिलों में इन सामुदायिक रसोइयों का संचालन पूरी तरह शुरू करने का है। इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर लाभार्थियों के चयन के अंतिम दिशा-निर्देश तैयार किए जा रहे हैं।

पांच रुपये की इस किफायती थाली में पोषक तत्वों का पूरा ध्यान रखा गया है। भोजन की थाली में गरमा-गरम दाल, दो मौसमी सब्जियां, चार रोटियां, एक कटोरी चावल, अचार और स्वाद के लिए एक मिठाई परोसी जाएगी। इतने कम दाम में संतुलित और संपूर्ण भोजन मिलने से शहरों में काम करने वाले दिहाड़ी मजदूरों को सीधे तौर पर आर्थिक राहत मिलेगी।

शुरुआती चरण के लिए प्रदेश के 12 बड़े शहरों को चिह्नित किया गया है। इनमें राजधानी लखनऊ के अलावा कानपुर, आगरा, वाराणसी, मेरठ, गाजियाबाद, मुरादाबाद, अलीगढ़, गोरखपुर, अयोध्या, शाहजहांपुर और रायबरेली शामिल हैं। तय योजना के मुताबिक प्रत्येक भोजन केंद्र पर सुबह एक हजार और शाम को एक हजार लोगों को खाना खिलाने का लक्ष्य है, यानी हर रसोई केंद्र से रोजाना औसतन दो हजार जरूरतमंदों को रियायती दर पर भोजन उपलब्ध कराया जाएगा।

योजना को धरातल पर उतारने के लिए शासन से जरूरी वित्तीय स्वीकृति मिल चुकी है और अब भोजन पकाने व वितरण का जिम्मा संभालने वाली अनुभवी एजेंसियों के चयन की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। खाद्य एवं रसद मंत्री मनोज पांडेय ने बताया कि लाभार्थियों के पात्रता मानदंड जल्द अंतिम रूप ले लेंगे, जिसमें वास्तविक मेहनतकशों को प्राथमिकता दी जाएगी ताकि योजना का लाभ सीधे पंक्ति के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके।