दाउद के खासमखास का फ्लैट ED ने किया था सील, दबंगों ने ताला तोड़ किया कब्जा, देखते रह गए अफसर
देश की वित्तीय राजधानी मुंबई में कानून व्यवस्था और केंद्रीय जांच एजेंसियों के इकबाल को खुली चुनौती देने वाली एक बेहद चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे प्रशासनिक और पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है। अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम और उसके सिंडिकेट से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तीय पोषण के मामलों में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पिछले दिनों एक बड़ी कार्रवाई करते हुए डी-कंपनी के बेहद खासमखास और एक कुख्यात गुर्गे की करोड़ों रुपये की अचल संपत्ति यानी फ्लैट को अपने कब्जे में लेकर आधिकारिक तौर पर सील कर दिया था। केंद्रीय एजेंसी द्वारा की जाने वाली ऐसी उच्च-स्तरीय सीलिंग की कार्रवाई के बाद उस संपत्ति की सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन और संबंधित एजेंसियों की होती है, और वहां किसी भी प्रकार के बाहरी हस्तक्षेप की अनुमति नहीं होती है। लेकिन इन तमाम सुरक्षा प्रावधानों और नियमों को ताक पर रखते हुए कुछ स्थानीय दबंगों और भू-माफियाओं ने एक सुनियोजित साजिश के तहत उस सील किए गए फ्लैट का ताला तोड़ दिया और रातों-रात उस पर अपना अवैध कब्जा जमा लिया। हैरानी की बात तो यह है कि जब इस दुस्साहसिक घटना को अंजाम दिया जा रहा था, तब संबंधित महकमे और सुरक्षा तंत्र के अधिकारी अनजान बने रहे और जब तक मामले की भनक प्रशासनिक अधिकारियों को लगी, तब तक दबंग वहां पूरी तरह से काबिज हो चुके थे।
मुंबई में केंद्रीय एजेंसी की सील पर बड़ा हमला और कानून व्यवस्था पर सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने मुंबई के संवेदनशील इलाकों में पनप रहे संगठित अपराध और दबंगई के गठजोड़ पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रवर्तन निदेशालय जैसी देश की शीर्ष जांच एजेंसी द्वारा की गई कार्रवाई के बाद सील की गई संपत्ति पर इस तरह से अवैध कब्जा होना यह साबित करता है कि स्थानीय स्तर पर असामाजिक तत्वों और भू-माफियाओं के हौसले कितने बुलंद हो चुके हैं। जिस फ्लैट को डी-कंपनी के अवैध धन के स्रोतों को ध्वस्त करने और कानून के शिकंजे में कसने के लिए सील किया गया था, उसी संपत्ति को चंद घंटों में हथिया लेना इस बात का संकेत है कि अपराधी अब कानून के डर से पूरी तरह बेपरवाह हो चुके हैं। घटना सामने आने के बाद जब अधिकारी मौके का मुआयना करने पहुंचे तो वे भी इस बात को देखकर हैरान रह गए कि केंद्रीय एजेंसी की सील और नोटिस को किस बेबाकी से तोड़ा गया है। स्थानीय पुलिस और जांच एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी या फिर इस पूरे मामले में किसी अंदरूनी लापरवाही की सुगबुगाहट ने इस विवाद को और अधिक गहरा दिया है। आम जनता और निवेशकों के बीच भी इस बात को लेकर चर्चा गर्म है कि यदि केंद्रीय जांच एजेंसियों द्वारा सील की गई संपत्तियों की ही सुरक्षा इस तरह से खतरे में पड़ जाएगी, तो आम नागरिकों की संपत्तियों की सुरक्षा का क्या हाल होगा।
डी-कंपनी के नेटवर्क और स्थानीय दबंगों के गठजोड़ की परतें खोलने में जुटी एजेंसियां
मामले की गंभीरता को देखते हुए अब प्रवर्तन निदेशालय के साथ-साथ मुंबई पुलिस की कई विशेष शाखाएं और खुफिया एजेंसियां इस सनसनीखेज मामले की अंदरूनी जांच में जुट गई हैं। शुरुआती जांच में यह बात सामने आ रही है कि इस अवैध कब्जे के पीछे कोई साधारण अपराधी नहीं, बल्कि मुंबई के बड़े भू-माफिया और अंडरवर्ल्ड से जुड़े पुराने सिंडिकेट के स्लीपर सेल हो सकते हैं, जो डी-कंपनी की बची-खुची संपत्तियों को हड़पने की फिराक में रहते हैं। अधिकारियों का मानना है कि डी-कंपनी के इन गुर्गों की संपत्तियों पर मालिकाना हक जताने या अवैध तरीके से किराया वसूलने के लिए एक बड़ा रैकेट काम कर रहा है, जो जांच एजेंसियों की आंखों में धूल झोंकने के नए-नए तरीके तलाशता रहता है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ताला तोड़ने वाले वे कौन लोग थे और उन्हें स्थानीय स्तर पर किसका राजनीतिक या प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त था, क्योंकि बिना किसी बड़े समर्थन के केंद्रीय एजेंसी द्वारा सील की गई संपत्ति के पास फटकना भी आम आदमी के लिए नामुमकिन होता है। इस मामले में उन तमाम स्थानीय लोगों और सुरक्षाकर्मियों से भी पूछताछ की जा रही है जिनकी जिम्मेदारी उस इलाके की निगरानी करने की थी। जांच एजेंसियों का कड़ा रुख यह संकेत दे रहा है कि इस अवैध कब्जे को जल्द ही खाली करवाया जाएगा और ताला तोड़ने वाले इन दबंगों पर एनएसए या मकोका जैसे कड़े कानूनों के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन की फजीहत और भविष्य की बड़ी कार्रवाई के संकेत
दाऊद के खासमखास के इस फ्लैट पर हुए अवैध कब्जे ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि अपराधियों के मन से कानून का डर खत्म करने के लिए अभी प्रशासनिक स्तर पर और कितनी कठोर कार्रवाई की आवश्यकता है। अधिकारी अब इस बात को लेकर बेहद सतर्क हो गए हैं कि भविष्य में किसी भी केंद्रीय एजेंसी द्वारा सील की जाने वाली संपत्तियों की सुरक्षा के लिए त्रि-स्तरीय सुरक्षा घेरा तैयार किया जाए ताकि कोई भी दबंग या असामाजिक तत्व नियमों को तोड़कर ऐसा दुस्साहस न कर सके। इस घटना के बाद से मुंबई के राजनीतिक गलियारों में भी सुगबुगाहट तेज हो गई है और विपक्षी दल इस बात को लेकर सरकार पर निशाना साध रहे हैं कि अगर केंद्रीय एजेंसियों की सील सुरक्षित नहीं है, तो आम जनता की सुरक्षा की गारंटी कौन लेगा। बहरहाल, प्रवर्तन निदेशालय और स्थानीय पुलिस ने इस मामले में एक नया आपराधिक मुकदमा दर्ज कर लिया है और फ्लैट को दोबारा से अपने सख्त कब्जे में लेने की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। दबंगों द्वारा किया गया यह कब्जा भले ही कुछ समय के लिए सुर्खियों में आ गया हो, लेकिन कानून के लंबे हाथों से बचना इन आरोपियों के लिए अब मुमकिन नहीं होगा और आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ और चौंकाने वाले बड़े खुलासे होने की पूरी संभावना है।