विदेशी फंडिंग, चीन से तार और 184 करोड़ का जुर्माना... सुप्रीम कोर्ट पहुंचा न्यूजक्लिक केस, जानें इंसाइड स्टोरी
अंग्रेजी न्यूज पोर्टल 'न्यूजक्लिक' (NewsClick) से जुड़ा विवाद और विदेशी फंडिंग का मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे पर पहुंच गया है। दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा दिए गए झटके के बाद न्यूजक्लिक की मूल कंपनी पीपीके न्यूजक्लिक मीडिया प्राइवेट लिमिटेड ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा लगाए गए 184 करोड़ रुपये से अधिक के भारी जुर्माने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की है। यह मामला न केवल वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा है, बल्कि इसमें विदेशी ताकतों के जरिए देश के खिलाफ नैरेटिव गढ़ने के गंभीर आरोप भी शामिल हैं। केंद्रीय जांच एजेंसियों का दावा है कि कंपनी को करोड़ों रुपये का अवैध विदेशी फंड मिला था, जिसका उपयोग गैर-कानूनी गतिविधियों और भारत विरोधी प्रोपेगैंडा को बढ़ावा देने के लिए किया गया।
चीन से कनेक्शन और 184 करोड़ रुपये के भारी जुर्माने की पूरी इनसाइड स्टोरी
प्रवर्तन निदेशालय (ED) और दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की जांच में इस मामले में चौंकाने वाले खुलासे हुए थे। जांच एजेंसियों के मुताबिक, न्यूजक्लिक को अमेरिका स्थित एक करोड़पति व्यवसायी नेविल रॉय सिंघम के जरिए फंड प्राप्त हुआ था, जिसके सीधे संबंध चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) के प्रचार नेटवर्क से जुड़े बताए जाते हैं। आरोप है कि न्यूजक्लिक ने एफडीआई (FDI) नियमों का उल्लंघन करते हुए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के नाम पर करोड़ों रुपये भारत मंगाए। फेमा (FEMA) के तहत कार्रवाई करते हुए सक्षम प्राधिकारी ने न्यूजक्लिक और उसके संस्थापक प्रबीर पुरकायस्थ पर 184 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया था। इसी पेनल्टी और जब्ती के आदेश को चुनौती देने के लिए अब यह पूरा मामला देश के शीर्ष न्यायविदों के सामने पहुंचा है।
दिल्ली हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत, अब सुप्रीम कोर्ट में उठेंगे संवैधानिक और कानूनी सवाल
इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने न्यूजक्लिक की याचिका पर सुनवाई करते हुए ईडी की कार्रवाई पर रोक लगाने या राहत देने से साफ इनकार कर दिया था। हाईकोर्ट के इस सख्त रुख के बाद ही संस्था ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी याचिका में न्यूजक्लिक के वकीलों का तर्क है कि उनके खिलाफ की गई कार्रवाई राजनीति से प्रेरित है और यह मीडिया की स्वतंत्रता पर सीधा हमला है। उनका कहना है कि सभी फंड वैध बैंकिंग चैनलों के जरिए आए थे और उनके ऊपर लगाए गए वित्तीय अनियमितता के आरोप बेबुनियाद हैं। वहीं दूसरी तरफ, सरकारी वकीलों का कहना है कि प्रेस की आजादी की आड़ में अवैध विदेशी फंडिंग और देश की संप्रभुता से खिलवाड़ करने की इजाजत किसी को नहीं दी जा सकती।
राष्ट्रीय सुरक्षा, मीडिया की आजादी और निष्पक्ष जांच पर टिकी हैं पूरे देश की निगाहें
सुप्रीम कोर्ट में इस हाई-प्रोफाइल मामले की आने वाली सुनवाई पर कानूनी जानकारों, राष्ट्रीय सुरक्षा विश्लेषकों और मीडिया जगत की पैनी नजर बनी हुई है। कोर्ट यह तय करेगा कि क्या वित्तीय नियमों का उल्लंघन और विदेशी संस्थाओं से प्राप्त राशि वास्तव में देश की सुरक्षा व्यवस्था के लिए खतरा थी या यह केवल एक प्रक्रियात्मक चूक का मामला है। यदि सुप्रीम कोर्ट से न्यूजक्लिक को राहत नहीं मिलती है, तो संस्था के अस्तित्व के साथ-साथ इसके प्रमोटरों के लिए मुश्किलें बेहद बढ़ जाएंगी। यह केस देश में संचालित डिजिटल मीडिया संस्थानों के लिए विदेशी फंडिंग के नियमों को लेकर एक बड़ा कानूनी नजीर साबित होने वाला है।