दवाइयों के बिल पर लगा 'महा-कट'; सरकार का ऐतिहासिक फैसला, ये दवाएं हुईं बिल्कुल टैक्स फ्री

दवाइयों के बिल पर लगा 'महा-कट'; सरकार का ऐतिहासिक फैसला, ये दवाएं हुईं बिल्कुल टैक्स फ्री

केंद्र सरकार द्वारा दवाओं पर वस्तु एवं सेवा कर (GST) की नई दरें लागू किए जाने के बाद से गंभीर व पुरानी बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को बड़ी आर्थिक राहत मिली है। नए कर स्लैब के तहत जिन दवाओं पर पहले 12 से 18 प्रतिशत तक टैक्स वसूला जाता था, उन्हें घटाकर अब सीधे 5 प्रतिशत के दायरे में ला दिया गया है। इसके साथ ही कैंसर और दुर्लभ बीमारियों से जुड़ी 36 अति-महत्वपूर्ण जीवन रक्षक दवाओं को पूरी तरह से टैक्स फ्री (शून्य प्रतिशत जीएसटी) कर दिया गया है।

दवा कारोबारियों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस नीतिगत फैसले का सबसे बड़ा फायदा उन परिवारों को मिलेगा, जहां बुजुर्ग या अन्य सदस्य लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियों की नियमित दवाएं लेते हैं। टैक्स दरों में कटौती और राष्ट्रीय औषध मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) के मूल्य नियंत्रण तंत्र के संयुक्त असर से कैंसर, ब्लड प्रेशर, शुगर, थायराइड, एंग्जायटी और अस्थमा की आवश्यक दवाओं की एमआरपी में 10 प्रतिशत से अधिक की सीधी गिरावट दर्ज की गई है। इसके अलावा कई जरूरी सर्जिकल उपकरण भी पहले से काफी सस्ते हो गए हैं।

लखनऊ दवा व्यापार मंडल (गिरिराज) के वरिष्ठ उपाध्यक्ष व प्रवक्ता विकास रस्तोगी ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि हाइपरटेंशन, डायबिटीज और थायराइड जैसी बीमारियों का इलाज आजीवन चलता है। कई मध्यमवर्गीय परिवारों में एक से अधिक मरीज इन बीमारियों से पीड़ित होते हैं, जिससे हर महीने दवाइयों का बिल घरेलू बजट पर भारी पड़ता था। टैक्स स्लैब के 12 से घटकर 5 प्रतिशत पर आने से हर महीने दवा खरीदने वाले मरीजों के जेब खर्च में उल्लेखनीय कमी आई है।

इस कटौती का सीधा असर जमीनी स्तर पर दिखने लगा है। दुर्लभ बीमारियों, जेनेटिक डिसऑर्डर, हृदय रोग और कैंसर से पीड़ित मरीजों की मासिक बचत में बड़ा इजाफा हुआ है। सुलतानपुर निवासी जगदंबा प्रसाद तिवारी, जो डायबिटीज, बीपी और हृदय रोग से पीड़ित हैं और डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान (RMLIMS) के कार्डियोलॉजी विभाग में नियमित चेकअप कराते हैं, उन्होंने बताया कि पहले उनकी दवाओं का मासिक खर्च लगभग 3,000 रुपये आता था। नए टैक्स रेट लागू होने के बाद वही दवाएं उन्हें 2,640 रुपये में मिलीं। इस 360 रुपये की मासिक कमी से उन्हें सालाना 4,300 रुपये से अधिक की सीधी बचत होगी।

अस्थमा इनहेलर से लेकर हार्ट की दवा तक सब सस्ती

इसी तरह सांस की बीमारियों और अस्थमा से ग्रसित मरीजों को इनहेलर व नियमित दवाओं पर बड़ा फायदा मिल रहा है। गोमती नगर निवासी अरुणा मिश्रा पिछले पांच वर्षों से लोहिया संस्थान के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग में अस्थमा का इलाज करा रही हैं। उनके इनहेलर पर हर महीने 1,550 रुपये यानी सालाना 18,600 रुपये खर्च होते थे। टैक्स घटने के बाद केवल इनहेलर के खर्च में सालाना करीब 2,232 रुपये की बचत दर्ज हुई है, जबकि बीपी की नियमित दवाओं पर भी उन्हें साल भर में लगभग 2,200 रुपये का अतिरिक्त लाभ मिल रहा है। कुल मिलाकर, क्रॉनिक बीमारियों के मरीजों के लिए यह फैसला बजट के लिहाज से संजीवनी साबित हुआ है।