वोटर लिस्ट संशोधन की SIR प्रक्रिया के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे ओवैसी

वोटर लिस्ट संशोधन की SIR प्रक्रिया के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे ओवैसी

देश की राजधानी नई दिल्ली और राष्ट्रीय राजनीति के गलियारों से इस वक्त एक बहुत बड़ी, हलचल पैदा कर देने वाली और विधिक-राजनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील खबर सामने आ रही है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने भारतीय चुनाव आयोग (ECI) द्वारा चलाई जा रही विशेष गहन पुनरीक्षण यानी 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) प्रक्रिया के खिलाफ देश की सबसे बड़ी अदालत का रुख किया है। ओवैसी ने सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल करते हुए चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूचियों में किए जा रहे बदलावों और नाम हटाए जाने के तरीकों पर बेहद गंभीर सवाल खड़े किए हैं। विपक्षी नेताओं द्वारा चुनाव आयोग के इस कदम के खिलाफ चलाए जा रहे मुहिम के बीच ओवैसी के इस विधिक दांव ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के प्रशासनिक तंत्र में हड़कंप मचा दिया है।

सीजेआई की पीठ के समक्ष याचिका का जिक्र: जानिए ओवैसी के वकील ने तत्काल सुनवाई को लेकर अदालत में क्या तर्क दिए?

असदुद्दीन ओवैसी की ओर से उनके अधिवक्ता निजामुद्दीन पाशा ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची की पीठ के समक्ष इस याचिका का उल्लेख किया (Mentioning)। वकील ने पीठ को अवगत कराया कि चुनाव आयोग जिस तरह से विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में वोटर लिस्ट की जांच व संशोधन (SIR) कर रहा है, उससे लाखों जायज मतदाताओं के नाम कटने की आशंका पैदा हो गई है। उन्होंने मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध किया कि चूंकि सुप्रीम कोर्ट में राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और अन्य याचिकाओं समेत एसआईआर (SIR) से जुड़े कई समान मामले सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हैं, इसलिए ओवैसी की इस याचिका को भी उसी बैच के साथ टैग करके 15 अक्टूबर (गुरुवार) को ही तत्काल सुना जाए। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए याचिका की फाइल की समीक्षा करने और उसे अन्य याचिकाओं के साथ जोड़ने पर सहमति जता दी है।

क्या है SIR प्रक्रिया पर पूरा विवाद और क्यों ओवैसी समेत पूरा विपक्ष है हमलावर?

चुनाव आयोग द्वारा शुरू की गई विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर विपक्षी पार्टियों और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि इसकी आड़ में पारदर्शी प्रक्रिया का पालन किए बिना एकतरफा तरीके से नागरिकों के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं। ओवैसी का कहना है कि वोटर लिस्ट से किसी का भी नाम हटाने से पहले उसे व्यक्तिगत नोटिस मिलना चाहिए और पारदर्शी वजह बताई जानी चाहिए, लेकिन कई इलाकों में विशेष समुदायों और कमजोर वर्गों के नाम मनमाने ढंग से काटे जा रहे हैं। ओवैसी ने तर्क दिया है कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव भारतीय संविधान के मूल ढांचे का हिस्सा हैं, और अगर फर्जी या पारदर्शी प्रक्रिया अपनाए बिना वोटिंग अधिकार छीने गए, तो यह सीधे तौर पर नागरिकों के मौलिक अधिकारों पर कुठाराघात होगा। इसी आधार पर उन्होंने अदालत से एसआईआर की वर्तमान कार्यप्रणाली पर रोक लगाने या इसके लिए कड़े न्यायिक दिशा-निर्देश तय करने की गुहार लगाई है।

देश की राजधानी में गरमाया राजनीतिक पारा, कल सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर टिकीं देश की निगाहें

सुप्रीम कोर्ट के इस संभावित रुख और आगामी सुनवाई ने देश की राजनीति में एक नया भूचाल ला दिया है। एक तरफ जहां सड़क से लेकर जंतर-मंतर तक चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सर्वोच्च अदालत में कानूनी लड़ाई भी तेज हो गई है। यदि 15 अक्टूबर को होने वाली इस संयुक्त सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट एसआईआर प्रक्रिया पर कोई सख्त निर्देश जारी करता है या चुनाव आयोग से बूथ-वार जवाब मांगता है, तो इसका असर आने वाले कई राज्यों के चुनावों और पूरी चुनाव प्रणाली पर पड़ना तय है। यही वजह है कि कल सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की पीठ से आने वाले आदेश पर पूरे देश की राजनीतिक हस्तियों, कानूनी विशेषज्ञों और आम जनता की निगाहें टिकी हुई हैं।