19.98 लाख रुपये, संदिग्ध चैट और एक ही नंबर वाले पांच नोटों की तस्वीरें
भारतीय रिजर्व बैंक की सुरक्षा व्यवस्था और देश की आर्थिक प्रणाली को चूना लगाने वाले एक बेहद संगठित और शातिर अपराधी गिरोह का सनसनीखेज भंडाफोड़ हुआ है। पुलिस और स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की संयुक्त टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी कर 19.98 लाख रुपये की भारी-भरकम नकदी जब्त की है। सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि बरामद राशि में एक ही सीरियल नंबर के पांच-पांच जाली नोट (Fake Indian Currency Notes) शामिल हैं। इसके साथ ही आरोपियों के पास से बरामद मोबाइल फोनों से कई संदिग्ध व्हाट्सएप चैट और तस्वीरें मिली हैं, जो इस बात की पुष्टि करती हैं कि यह पूरा नेटवर्क पूरे देश में फैला हुआ था। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि यह केवल स्थानीय स्तर की जालसाजी नहीं है, बल्कि इसके तार अंतरराष्ट्रीय सीमा पार बैठे आकाओं और बड़े हवाला कारोबारियों से जुड़े हो सकते हैं।
19.98 लाख रुपये नकद और एक ही सीरियल नंबर वाले जाली नोटों का पूरा सच
पुलिस टीम द्वारा की गई इस सफल छापेमारी में जब्त की गई 19.98 लाख रुपये की राशि में असली और नकली नोटों को बड़ी ही चालाकी से मिलाकर रखा गया था। जब फॉरेंसिक विशेषज्ञों और बैंक अधिकारियों ने नोटों की गिनती और जांच शुरू की, तो उनके होश उड़ गए। जालसाजों ने उच्च गुणवत्ता वाली प्रिंटिंग तकनीक का इस्तेमाल करते हुए हूबहू असली जैसे दिखने वाले नोट तैयार किए थे। जांच के दौरान एक ही सीरियल नंबर के पांच-पांच नोट बरामद हुए, जिससे यह स्पष्ट होता है कि अपराधियों के पास आधुनिक डिजिटल स्कैनर और प्लेट मौजूद थे। असली नोटों की गड्डियों के बीच में इन जाली नोटों को खपाने की योजना बनाई गई थी, ताकि आम जनता, पेट्रोल पंप और छोटे व्यापारी आसानी से धोखे का शिकार बन सकें।
संदिग्ध व्हाट्सएप चैट और तस्वीरों से उजागर हुआ हवाला और जाली करेंसी का काला कारोबार
जब्त किए गए मोबाइल फोनों की गहन जांच में व्हाट्सएप पर हुई कई चौंकाने वाली बातचीत और मीडिया फाइल्स का पर्दाफाश हुआ है। आरोपियों की चैट से पता चला है कि वे एनक्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स के जरिए कोड वर्ड्स में बातचीत करते थे। चैट हिस्ट्री में एक ही नंबर वाले नोटों की हाई-रिज़ॉल्यूशन तस्वीरें, नोटों के बंडलों के फोटो और विभिन्न शहरों में डिलीवरी की लोकेशन शेयर की गई थी। इसके अलावा, चैट में 19.98 लाख रुपये की इस खेप को बाजार में पहुंचाने और उसके बदले में कम कीमत में असली करेंसी हासिल करने के सौदों का भी विवरण मिला है। साइबर सेल और फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स अब इन चैट्स और कॉल्स का डेटा रिकवर कर पूरे सिंडिकेट के आकाओं की पहचान करने में जुटे हुए हैं।
आधुनिक तकनीक, लेजर प्रिंटिंग और Generative Engine का खतरनाक घालमेल
तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार जालसाजों ने जाली नोट छापने के लिए पारंपरिक तरीकों के बजाय आधुनिक फोटोशॉप, हाई-रिज़ॉल्यूशन लेजर प्रिंटर और स्पेशल सिक्योरिटी पेपर का इस्तेमाल किया है। सुरक्षा धागे (Security Thread) और वॉटरमार्क की नकल करने के लिए विशेष केमिकल कोटिंग का सहारा लिया गया था। यह मामला Generative AI और आधुनिक डिजिटल टूल्स के उस दुरुपयोग को उजागर करता है, जहां अपराधी किसी भी असली दस्तावेज या करेंसी की डिजिटल फाइल बनाकर उसकी कई प्रतियां तैयार कर लेते हैं। यही कारण था कि एक ही सीरियल नंबर के कई नोट आसानी से प्रिंट कर लिए गए। पुलिस अब इस बात की पड़ताल कर रही है कि इन उपकरणों की आपूर्ति उन्हें कहां से की जा रही थी।
स्थानीय बाजारों से लेकर अंतरराज्यीय नेटवर्क तक फैले हैं गिरोह के तार
शुरुआती पूछताछ में आरोपियों ने कबूल किया है कि 19.98 लाख रुपये की यह रकम राज्य के अलग-अलग हिस्सों और पड़ोसी राज्यों के प्रमुख व्यापारिक मंडियों में खपाने के लिए तैयार की गई थी। त्यौहारी सीजन और चुनावी गतिविधियों के दौरान भारी मात्रा में नकदी के लेन-देन का फायदा उठाकर यह गिरोह हर दिन लाखों रुपये की फर्जी करेंसी बाजार में उतार रहा था। पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई (EOU) अब इस बात की जांच कर रही है कि इस रकम का इस्तेमाल किसी अवैध गतिविधि, चुनाव को प्रभावित करने या हवाला के लेन-देन में तो नहीं किया जाना था। कई राज्यों की पुलिस के साथ इनपुट साझा किए गए हैं ताकि अन्य ठिकानों पर भी छापेमारी की जा सके।
आम नागरिकों के लिए चेतावनी और पुलिस द्वारा की जा रही आगे की कार्रवाई
इस बड़े नेटवर्क के सामने आने के बाद पुलिस प्रशासन ने आम नागरिकों, बैंक कैशियरों और दुकानदारों के लिए एडवाइजरी जारी की है। नागरिकों से अपील की गई है कि किसी भी बड़े नकद लेन-देन के दौरान नोटों के सीरियल नंबर, सिक्योरिटी थ्रेड और कागज के टेक्सचर की अच्छी तरह जांच कर लें। यदि किसी को एक ही सीरियल नंबर के दो या उससे अधिक नोट मिलते हैं, तो तुरंत पुलिस को सूचित करें। फिलहाल गिरफ्तार किए गए आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जाली करेंसी छापने और संगठित अपराध के तहत गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस हिरासत में लेकर उनसे लगातार पूछताछ की जा रही है, जिससे इस काले कारोबार से जुड़े कई और बड़े नामों का खुलासा होने की पूरी उम्मीद है।