दिल्ली में प्रदूषण से निपटने के लिए मेट्रो चलाएगी 20 अतिरिक्त फेरे, एंटीस्मॉग गन और निर्माण स्थलों पर सख्त पहरा

दिल्ली में प्रदूषण से निपटने के लिए मेट्रो चलाएगी 20 अतिरिक्त फेरे, एंटीस्मॉग गन और निर्माण स्थलों पर सख्त पहरा

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और उसके आसपास के पूरे एनसीआर क्षेत्र में एक बार फिर प्रदूषण का स्तर खतरनाक श्रेणी में पहुंचता जा रहा है, जिससे आम जनता का सांस लेना मुहाल होता जा रहा है। सर्दियों की आहट के साथ ही हवा की रफ्तार कम होने और पराली के धुएं के मिलने से वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) लगातार रेड जोन में बना हुआ है। इस गंभीर स्थिति से निपटने और नागरिकों को जहरीली हवा से राहत दिलाने के लिए प्रशासन अब पूरी तरह एक्टिव मोड में आ गया है। दिल्ली सरकार और पर्यावरण विभाग के निर्देशों के बाद राजधानी में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के कड़े नियमों को लागू कर दिया गया है। इसी कड़ी में यात्रियों को सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल सफर का विकल्प देने के लिए दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने अपनी सेवाओं में बड़ा विस्तार करते हुए रोजाना 20 अतिरिक्त फेरे चलाने का ऐतिहासिक और व्यावहारिक फैसला लिया है। इसके साथ ही सड़कों पर धूल उड़ने से रोकने के लिए एंटी-स्मॉग गन की संख्या बढ़ाने और सभी प्रमुख निर्माण स्थलों पर भारी पहरा बिठाकर सख्त मॉनिटरिंग की जा रही है।

दिल्ली मेट्रो का बड़ा कदम, प्रतिदिन चलेंगे 20 अतिरिक्त फेरे ताकि सड़कों पर घटे निजी वाहनों का दबाव

प्रदूषण के इस गंभीर संकट के समय परिवहन के साधनों से होने वाले धुएं के उत्सर्जन को कम करने के लिए सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करना सबसे बड़ा उपाय माना जाता है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए DMRC ने यात्रियों की भारी भीड़ को प्रबंधित करने और निजी वाहनों के इस्तेमाल को हतोत्साहित करने के लिए अपनी लाइनों पर रोजाना 20 अतिरिक्त फेरे (Trips) बढ़ाने का बड़ा ऐलान किया है। दिल्ली मेट्रो के अधिकारियों के अनुसार, ये अतिरिक्त फेरे उन व्यस्त समय (Peak Hours) के दौरान चलाए जाएंगे जब दफ्तर जाने वाले और लौटने वाले लोगों की संख्या सबसे ज्यादा होती है। ऐसा करने से मेट्रो ट्रेनों के भीतर भीड़भाड़ कम होगी और लोगों को सुगम तथा आरामदायक यात्रा का अनुभव मिलेगा। जब शहर के लाखों लोग अपनी गाड़ियों और टू-व्हीलर्स को छोड़कर मेट्रो का सफर चुनेंगे, तो सड़कों पर वाहनों की संख्या में भारी कमी आएगी, जिससे ऑटोमोबाइल से निकलने वाले खतरनाक कार्बन कणों और धुएं के स्तर को सीधे तौर पर नियंत्रित किया जा सकेगा।

सड़कों और पेड़ों पर पानी का छिड़काव तेज, एंटी-स्मॉग गन और एंटी-डस्ट कैंपेन की शुरुआत

सड़कों पर गाड़ियों के टायरों और हवा की वजह से उड़ने वाली धूल (Road Dust) दिल्ली के प्रदूषण में लगभग तीस से चालीस प्रतिशत तक का योगदान देती है। इस सबसे बड़ी समस्या से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए नगर निगम और लोक निर्माण विभाग (PWD) ने शहर भर में एंटी-स्मॉग गन और भारी क्षमता वाले वाटर स्प्रिंकलर वाहनों की तैनाती को कई गुना बढ़ा दिया है। मुख्य मार्गों, फ्लाइओवरों और चौराहों पर दिन-रात पानी का छिड़काव किया जा रहा है ताकि सड़कों की धूल हवा में न घुल सके। इसके अलावा, जिन पेड़ों पर धूल की मोटी परत जम चुकी है, उन्हें विशेष मशीनों के जरिए नहलाया जा रहा है ताकि हरियाली फिर से सांस लेने लायक हवा को सोख सके। दिल्ली सरकार ने पर्यावरण निगरानी टीमों को भी जमीनी स्तर पर उतार दिया है जो हर इलाके में जाकर यह सुनिश्चित कर रही हैं कि कहीं भी खुले में धूल न उड़े और निर्धारित नियमों का सख्ती के साथ पालन किया जाए।

निर्माण स्थलों पर कड़ा पहरा और GRAP के नियमों का उल्लंघन करने वालों पर भारी जुर्माना

प्रदूषण नियंत्रण के मोर्चे पर किसी भी प्रकार की कोताही से बचने के लिए राजधानी के सभी बड़े और छोटे कंस्ट्रक्शन साइट्स पर प्रशासन ने बेहद सख्त पहरा बिठा दिया है। नियमों के मुताबिक, किसी भी निर्माण स्थल पर खुली हवा में भवन सामग्री (बजरी, रेत, सीमेंट) को खुले में छोड़ने पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई है और उन्हें चारों तरफ से ग्रीन नेट से ढकना अनिवार्य कर दिया गया है। निर्माण अपशिष्ट (Demolition Waste) को तय नियमों के तहत ही एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जा सकता है। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) और स्थानीय निकायों की फ्लाइंग स्क्वाड टीमें लगातार औचक निरीक्षण कर रही हैं। यदि कोई भी बिल्डर या ठेकेदार नियमों का उल्लंघन करते हुए पाया जाता है, तो उस पर भारी-भरकम आर्थिक जुर्माना लगाने के साथ-साथ तुरंत निर्माण कार्य रुकवाने जैसी कठोर कार्रवाई की जा रही है ताकि धूल के कणों को हवा में मिलने से रोका जा सके।

आम नागरिकों से अपील, प्रदूषण के खिलाफ इस जंग में सरकार का साथ दें

प्रदूषण के इस दानव को केवल सरकारी प्रयासों या प्रशासनिक पाबंदियों के दम पर नहीं हराया जा सकता, जब तक कि राजधानी का हर एक नागरिक अपनी नैतिक जिम्मेदारी नहीं समझेगा। विशेषज्ञों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक लोग खुद आगे आकर कार पूल (Car Pooling) का इस्तेमाल नहीं करेंगे, सार्वजनिक परिवहन को अपनी जीवनशैली का हिस्सा नहीं बनाएंगे और कूड़ा जलाने जैसी लापरवाहियों से तौबा नहीं करेंगे, तब तक हवा की सेहत में सुधार होना मुश्किल है। दिल्ली सरकार और पर्यावरण मंत्रियों ने बार-बार यह अपील की है कि लोग जितना हो सके वर्क फ्रॉम होम या मेट्रो-बस का विकल्प चुनें। प्रशासन की तरफ से उठाए गए ये कड़े कदम और मेट्रो के अतिरिक्त फेरे तभी सार्थक साबित होंगे जब जनता भी इस अभियान में अपना भरपूर सहयोग देगी। आने वाले कुछ हफ्तों में मौसम के मिजाज और हवा की गति को देखते हुए प्रशासन और भी सख्त कदम उठाने के लिए पूरी तरह तैयार है, ताकि दिल्ली के आसमान को एक बार फिर साफ और नीला बनाया जा सके।