करोलबाग से खरीदा फोन, कुमारस्वामी के बंगले से हुआ खेल? सिद्धारमैया 'स्टिंग ऑपरेशन' की आंच दिल्ली पहुंची
कर्नाटक की राजनीति में आया भूचाल अब राज्य की सीमाओं को लांघकर देश की राजधानी दिल्ली तक पहुंच गया है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उनके करीबियों से जुड़े कथित 'स्टिंग ऑपरेशन' मामले में आए दिन नए और चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। जांच एजेंसियों और सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस पूरे स्टिंग ऑपरेशन की साजिश का ताना-बाना दिल्ली के मशहूर इलेक्ट्रॉनिक मार्केट करोलबाग से बुना गया था। दावा किया जा रहा है कि इस ऑपरेशन के लिए इस्तेमाल में लाए गए हाई-टेक स्पाई गैजेट्स और सेकेंड-हैंड मोबाइल फोन करोलबाग की एक दुकान से नकद भुगतान करके खरीदे गए थे। इसके बाद, इस पूरी योजना का मुख्य केंद्र केंद्रीय मंत्री और जेडीएस नेता एचडी कुमारस्वामी का दिल्ली स्थित लुटियंस जोन का आधिकारिक बंगला बना, जहां कथित तौर पर इस डेटा की प्रोसेसिंग और रणनीतिक बैठकें की गईं। इस खुलासे के बाद दिल्ली से लेकर बेंगलुरु तक सियासी हलचल बेहद तेज हो गई है।
कैसे रची गई स्टिंग की पूरी पटकथा और दिल्ली के तार जुड़ने से क्यों मची राज्य की राजनीति में खलबली
इस पूरे प्रकरण की शुरुआत तब हुई जब कर्नाटक के राजनीतिक गलियारों में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार को घेरने के लिए कुछ विवादित ऑडियो और वीडियो क्लिप्स सामने आईं। इन क्लिप्स में भ्रष्टाचार और कथित रिश्वतखोरी के दावों को लेकर सनसनीखेज बातें कही गई थीं। हालांकि, जब इस स्टिंग ऑपरेशन की बैकट्रैकिंग और डिजिटल फॉरेंसिक जांच शुरू की गई, तो इसकी परतें एक-एक कर खुलने लगीं। जांच टीम को पता चला कि इस स्टिंग में इस्तेमाल किए गए मुख्य डिवाइस और सिम कार्ड्स को एक्टिवेट करने के लिए फर्जी दस्तावेजों का सहारा लिया गया था, जिन्हें दिल्ली के करोलबाग इलाके से खरीदा गया था। इस स्टिंग को अंजाम देने के पीछे जिन मुख्य चेहरों का नाम सामने आ रहा है, उनके संपर्क दिल्ली में जेडीएस और भाजपा के शीर्ष राजनीतिक हलकों से जुड़ रहे हैं। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि यह सिद्धारमैया सरकार को अस्थिर करने के लिए रचा गया एक सुनियोजित षड्यंत्र है।
सिद्धारमैया का तीखा हमला और कुमारस्वामी की सफाई: आरोपों-प्रत्यारोपों के दौर से गरमाया दिल्ली का माहौल
इस पूरे विवाद पर कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि उनकी सरकार किसी भी राजनीतिक ब्लैकमेलिंग के सामने झुकने वाली नहीं है। उन्होंने विपक्षी दलों पर राजनीतिक लाभ के लिए फर्जी और एडिटेड क्लिप्स का सहारा लेने का आरोप लगाया। सिद्धारमैया ने चुटकी लेते हुए कहा कि जब कोई जनसमर्थन खो देता है, तो वह करोलबाग से खरीदे गए जासूसी कैमरों और दिल्ली के बंगलों में बैठकर साजिशें रचने पर मजबूर हो जाता है। दूसरी तरफ, केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे कांग्रेस का 'डैमेज कंट्रोल' करार दिया है। कुमारस्वामी का कहना है कि उनके बंगले का नाम जबरन इस मामले में घसीटा जा रहा है ताकि सरकार के अपने भ्रष्टाचार से जनता का ध्यान भटकाया जा सके। उन्होंने चुनौती दी कि यदि कांग्रेस सरकार में हिम्मत है तो वे इस पूरे मामले की केंद्रीय जांच एजेंसी से जांच करवा लें।
दिल्ली फॉरेंसिक लैब और साइबर सेल की एंट्री: आगे क्या हो सकते हैं कानूनी और राजनीतिक परिणाम
चूंकि इस मामले में फर्जी आईडी पर खरीदे गए मोबाइल फोन, करोलबाग का लिंक और अंतरराज्यीय साजिश के तार शामिल हैं, इसलिए दिल्ली पुलिस की साइबर सेल और कर्नाटक पुलिस की सीआईडी (CID) संयुक्त रूप से इस मामले के फॉरेंसिक साक्ष्यों की जांच में जुट गई हैं। डिजिटल फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स अब उन सर्वर्स और क्लाउड ड्राइव्स को ट्रैक कर रहे हैं जहां से इन वीडियो और ऑडियो फाइलों को लीक या सर्कुलेट किया गया था। इस मामले की आंच दिल्ली पहुंचने के बाद संसद भवन के गलियारों में भी इसकी गूंज सुनाई देने लगी है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह साबित हो जाता है कि फर्जी दस्तावेजों पर खरीदे गए उपकरणों से अवैध जासूसी और स्टिंग अंजाम दिया गया, तो इसमें शामिल लोगों पर आईटी एक्ट और आपराधिक षड्यंत्र (Criminal Conspiracy) की गंभीर धाराएं लग सकती हैं। आने वाले दिनों में यह विवाद कर्नाटक के साथ-साथ केंद्र की राजनीति को भी गरमाए रखने वाला है।