कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खरगे ने क्यों कहा ऐसा? संघ से फंड का हिसाब भी मांगा

कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खरगे ने क्यों कहा ऐसा? संघ से फंड का हिसाब भी मांगा

कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। राज्य सरकार में सूचना प्रौद्योगिकी एवं जैव प्रौद्योगिकी (IT-BT) मंत्री प्रियंक खरगे ने आरएसएस की कार्यप्रणाली और उसके वित्तीय ढांचे पर बेहद तीखा हमला बोला है। एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान खरगे ने तंज कसते हुए कहा कि 'आरएसएस वाले तो बहुत अच्छे लोग हैं, वे समाज सेवा का दावा करते हैं।' लेकिन इस बयान के तुरंत बाद उन्होंने संघ के पारदर्शिता के दावों की धज्जियां उड़ाते हुए सवाल दागा कि आखिर इस संगठन के पास सैकड़ों गतिविधियों, शाखाओं और बड़े-बड़े आयोजनों के लिए फंड कहां से आता है? खरगे ने संघ से अपने तमाम वित्तीय स्रोतों, चंदे के ब्योरे और पूर्ववर्ती सरकारों के दौरान मिली सरकारी जमीनों का पूरा हिसाब सार्वजनिक करने की मांग कर दी है। उनके इस आक्रामक रुख के बाद कर्नाटक के राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है।

चंदे की पारदर्शिता और सरकारी संपत्तियां: खरगे ने संघ के वित्तीय मॉडल पर दागे सीधे सवाल

प्रियंक खरगे ने अपने बयान में संघ के गैर-पंजीकृत संगठन होने की स्थिति पर मुख्य रूप से उंगली उठाई है। उन्होंने कहा कि एक तरफ आरएसएस खुद को एक सांस्कृतिक और गैर-सरकारी संगठन बताता है जो औपचारिक रूप से कहीं पंजीकृत भी नहीं है, वहीं दूसरी तरफ उसके पास खरबों की चल-अचल संपत्तियां और विशाल ढांचा मौजूद है। खरगे ने मांग की है कि संघ अपने आयकर रिटर्न, विदेशी और घरेलू चंदे तथा ट्रस्टों के खातों का ऑडिट सार्वजनिक करे। इसके अलावा, उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार के कार्यकाल में नियम-कायदों को दरकिनार करके राज्य के विभिन्न जिलों में आरएसएस और उससे जुड़े संगठनों को कौड़ियों के भाव बेशकीमती सरकारी जमीनें आवंटित की गईं। मंत्री ने स्पष्ट किया कि कर्नाटक सरकार इन सभी जमीनों के आवंटन की निष्पक्ष समीक्षा कर रही है और यदि नियमों का उल्लंघन पाया गया तो उन आवंटनों को रद्द भी किया जाएगा।

कांग्रेस बनाम भाजपा: बयानों के बाण से गरमाई कर्नाटक की राजनीति

प्रियंक खरगे के इस बयान के सामने आते ही भारतीय जनता पार्टी और आरएसएस के समर्थकों ने जोरदार पलटवार किया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि प्रियंक खरगे और कांग्रेस पार्टी अपनी प्रशासनिक विफलताओं और अंदरूनी कलह से जनता का ध्यान भटकाने के लिए बार-बार राष्ट्रवादी संगठनों को निशाना बनाती है। भाजपा का दावा है कि आरएसएस पिछले 100 वर्षों से देश सेवा, आपदा राहत और चरित्र निर्माण के कार्यों में निस्वार्थ भाव से लगा हुआ है और इसके लिए उसे किसी के प्रमाण पत्र की आवश्यकता नहीं है। वहीं दूसरी ओर, कांग्रेस समर्थक खरगे के रुख को सुशासन और वित्तीय पारदर्शिता के लिए जरूरी कदम बता रहे हैं। खरगे का यह भी कहना है कि जब देश की आम जनता और छोटे से छोटे ट्रस्ट को हर एक रुपये का हिसाब देना पड़ता है, तो संघ जैसी विशाल संस्था को कानून से ऊपर क्यों रखा जाए?

प्रशासनिक जांच या महज राजनीतिक बयानबाजी: क्या होगा कर्नाटक सरकार का अगला कदम

कर्नाटक में आरएसएस को लेकर जारी यह विवाद अब केवल जुबानी जंग तक सीमित नहीं रहने वाला है। राज्य सरकार के रुख से यह साफ संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले दिनों में संघ से जुड़ी विभिन्न संस्थाओं को मिली जमीनों और संपत्तियों की आधिकारिक जांच शुरू हो सकती है। प्रियंक खरगे पहले भी सरकारी परिसरों, आवासीय स्कूलों और हॉस्टलों में संघ की गतिविधियों या शाखाओं के संचालन पर प्रतिबंध लगाने की वकालत कर चुके हैं। अब देखना यह होगा कि कर्नाटक सरकार इस बयान के बाद कोई जांच समिति का गठन करती है या यह मामला केवल राजनीतिक मंचों पर बहस का मुद्दा बना रहेगा। बहरहाल, खरगे के इस कदम ने न केवल राज्य बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर संघ की फंडिंग और उसकी कानूनी स्थिति को लेकर एक नई बहस को जन्म दे दिया है।