पहलगाम हमले के बाद बंद था बॉर्डर, फिर 49 पाकिस्तानी तीर्थयात्रियों को सड़क रास्ते से क्यों जाने दिया?

पहलगाम हमले के बाद बंद था बॉर्डर, फिर 49 पाकिस्तानी तीर्थयात्रियों को सड़क रास्ते से क्यों जाने दिया?

पाकिस्तान से ऐतिहासिक गुरुद्वारों के दर्शन के लिए भारत पहुंचे 49 सिख श्रद्धालुओं का जत्था वीरवार को अटारी-वाघा सीमा के रास्ते अपने वतन लौट गया। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (डीएसजीएमसी) की पहल पर श्रद्धालुओं को सड़क मार्ग से जाने की विशेष रियायत दी, जिससे उन्हें महंगे हवाई सफर के आर्थिक बोझ से बड़ी निजात मिली है। इस दल में पेशावर, पंजा साहिब, लाहौर और ननकाना साहिब के तीर्थयात्री शामिल थे।

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद सुरक्षा कारणों से अटारी-वाघा सीमा को सामान्य मुसाफिरों के लिए बंद रखा गया है। मौजूदा समय में दोनों देशों के बीच 1974 के धार्मिक तीर्थयात्रा प्रोटोकॉल के तहत ही खास मौकों पर श्रद्धालुओं को आवाजाही की छूट मिलती है।

यह जत्था 8 अक्टूबर को लाहौर-ताशकंद-नई दिल्ली के हवाई रास्ते से भारत पहुंचा था। श्रद्धालुओं के वीजा की मियाद 6 नवंबर को पूरी हो रही थी और तय योजना के मुताबिक उन्हें फ्लाइट से ही लौटना था। डीएसजीएमसी के मुख्य सलाहकार (एनआरआई मामले) परमजीत सिंह चंडोक ने केंद्रीय गृह मंत्रालय से संपर्क साधकर श्रद्धालुओं को वाघा सीमा से सड़क मार्ग जरिए लौटने की इजाजत दिलवाई।

जत्थे के मुखिया पपिंदर सिंह ने दोनों देशों की सरकारों का शुक्रिया अदा किया। उन्होंने कहा कि सीमा पार छूट मिलने से श्रद्धालुओं का सफर बेहद सुगम और किफायती हो गया। अपनी यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने अमृतसर के सचखंड श्री हरमंदिर साहिब में श्री गुरु रामदास जी के प्रकाश पर्व में शिरकत की। इसके साथ ही करीब 40 श्रद्धालुओं ने उत्तराखंड के दुर्गम तीर्थ गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब के दर्शन किए।

तीर्थयात्रियों ने दिल्ली के ऐतिहासिक गुरुद्वारा बंगला साहिब, रकाब गंज साहिब और सीस गंज साहिब में अरदास की। दल ने आनंदपुर साहिब में तख्त श्री केसगढ़ साहिब में भी मत्था टेका और भारत में बसे अपने सगे-संबंधियों से मुलाकात की। सड़क मार्ग से रवानगी के बाद यात्रियों ने अपनी वापसी की एयर टिकटें रद्द करा दी हैं और डीएसजीएमसी अब उनकी टिकट राशि के रिफंड की प्रक्रिया पूरी कराने में जुटी है।