राजस्थान निकाय चुनाव: जीत के बाद भी भाजपा को अपनों के गढ़ में झटका

राजस्थान निकाय चुनाव: जीत के बाद भी भाजपा को अपनों के गढ़ में झटका

राजस्थान में स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजे सामने आते ही भारतीय जनता पार्टी ने समग्र तौर पर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को पछाड़कर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के चर्चित 'जेन जी' आंदोलन की तपिश के बाद हुए इस पहले बड़े इम्तिहान में सत्ताधारी दल ने कई जगह बढ़त जरूर बनाई, लेकिन इस जीत के भीतर पार्टी के लिए कुछ कड़वे सियासी झटके भी छिपे हैं।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृह जिले भरतपुर में जहां निर्दलीय उम्मीदवारों ने समूचा गणित बिगाड़ दिया, वहीं सूबे के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के प्रभाव वाले इलाके बारां में आम आदमी पार्टी ने सीधे सत्ता पर कब्जा जमाकर राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। इसी स्थिति को लेकर विपक्षी और युवा संगठन अब सरकार पर हमलावर नजर आ रहे हैं।

'स्कूल ठीक करो' मुहिम के बीच सीजेपी का तंज: शिक्षा और रोजगार की अनदेखी का नतीजा

नीट पेपर लीक प्रकरण के बाद दिल्ली के जंतर-मंतर पर व्यापक प्रदर्शन करने वाली कॉकरोच जनता पार्टी इन दिनों राजस्थान के भीतर 'स्कूल ठीक करो' अभियान को बेहद आक्रामक ढंग से चला रही है। हाल ही में एक सरकारी स्कूल का जायजा लेने पहुंची संगठन की टीम पर हमले का मामला भी गरमाया था। नतीजों के ऐलान के बाद सीजेपी के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने तंज कसते हुए कहा कि निकाय चुनाव में मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री दोनों के गृह जिलों की कमान सत्ताधारी दल के हाथों से फिसल गई। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में जोड़ा कि यदि जमीनी स्तर पर शिक्षा और रोजगार के सवालों को इसी तरह नजरअंदाज किया गया तो भविष्य में हालात और ज्यादा गंभीर हो सकते हैं। वहीं संगठन के दूसरे सह-संयोजक सौरभ दास ने इस चुनावी उलटफेर को युवाओं की बढ़ती चेतना और उनकी ताकत का सीधा संकेत करार दिया।

भरतपुर में निर्दलीयों का एकतरफा जलवा: 36 वार्ड जीतकर थामी सत्ता की डोर

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृह क्षेत्र भरतपुर नगर निगम के नतीजों ने हर किसी को हैरान कर दिया है। यहां कुल 65 वार्डों के चुनावी मैदान में निर्दलीय उम्मीदवारों ने बाजी मारते हुए 36 वार्डों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की है, जबकि 3 वार्ड अन्य छोटे दलों के खाते में गए हैं। भाजपा यहां 20 वार्ड जीतकर कांग्रेस (7 वार्ड) के मुकाबले काफी बेहतर स्थिति में जरूर दिखी, लेकिन पूर्ण बहुमत के आंकड़े से काफी दूर रह गई। स्थानीय स्तर पर निर्दलीयों के इस जबर्दस्त उभार ने साबित कर दिया है कि निकाय राजनीति में स्थानीय चेहरों और जनसरोकारों का दबदबा आज भी पारंपरिक दलगत राजनीति पर भारी पड़ सकता है।

बारां में आम आदमी पार्टी का ऐतिहासिक खाता: 15 साल बाद ढहा कांग्रेस का किला

शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के प्रभाव क्षेत्र बारां नगर परिषद से आए नतीजों ने सभी राजनीतिक दलों को चौंका दिया है। यहां आम आदमी पार्टी ने पहली बार 60 वार्डों में से 31 पर शानदार जीत दर्ज करके स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया। पिछले 15 वर्षों से लगातार सत्ता पर काबिज कांग्रेस पार्टी को केवल 18 वार्डों में जीत के साथ दूसरे स्थान पर संतोष करना पड़ा। दूसरी तरफ, सत्ताधारी भाजपा यहां महज 9 सीटें जीतकर तीसरे स्थान पर खिसक गई। बारां में 'आप' की इस सीधी जीत को स्थानीय जनता के बुनियादी मुद्दों और युवाओं के नए राजनीतिक रुझान से जोड़कर देखा जा रहा है।