'घुटन से मरने से बेहतर है आत्मसम्मान की मौत...' राजस्थान कांग्रेस में बगावत, विश्वेंद्र सिंह का इस्तीफा

'घुटन से मरने से बेहतर है आत्मसम्मान की मौत...' राजस्थान कांग्रेस में बगावत, विश्वेंद्र सिंह का इस्तीफा

राजस्थान की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। पीसीसी (PCC) चीफ गोविंद सिंह डोटासरा के साथ तीखी जुबानी जंग और सार्वजनिक विवाद के बाद राजस्थान के दिग्गज नेता और पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने शुक्रवार को कांग्रेस को करारा झटका देते हुए पार्टी से आधिकारिक तौर पर इस्तीफा दे दिया है।

राज्य इकाई द्वारा उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश करने की सुगबुगाहट के बीच ही सिंह ने यह 'मास्टरस्ट्रोक' चल दिया। उनका यह इस्तीफा सिर्फ एक पत्र नहीं है, बल्कि राजस्थान कांग्रेस के भीतर चल रही खींचतान और गुटबाजी का सबसे बड़ा सार्वजनिक खुलासा है।

पार्टी में हो रही थी 'घुटन', चाटुकारिता पर साधा सीधा निशाना

विश्वेंद्र सिंह ने सोशल मीडिया के जरिए अपना दर्द और गुस्सा दोनों जाहिर किए। अपने इस्तीफे में उन्होंने बेहद तल्ख लहजे में कहा कि कांग्रेस अब चाटुकारों की पार्टी बन गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी की गलत नीतियों और चमचागिरी के माहौल में उन्हें 'घुटन' महसूस हो रही थी। एक कद्दावर नेता के तौर पर उन्होंने यह संदेश साफ कर दिया कि बिना स्वाभिमान के ऐसे घुटन भरे माहौल में रहने से लाख गुना बेहतर है कि आत्मसम्मान के साथ पार्टी को ही अलविदा कह दिया जाए।

'सच कहना पाप है, तो यह मैं बार-बार करूंगा'

अपने त्यागपत्र में सिंह ने एक बेहद भावुक और कड़ा संदेश लिखा। उन्होंने कहा, "मैंने जीवन में हमेशा अपने इष्ट गिरिराज महाराज और अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनकर फैसले लिए हैं।" उन्होंने आलाकमान को आईना दिखाते हुए लिखा कि जिस पार्टी को उन्होंने अपना पूरा जीवन बलिदान कर दिया, अगर वह उनकी निष्ठा और ईमानदारी का यह सिला दे रही है, तो वे स्तब्ध हैं।

सिंह ने दो टूक शब्दों में कहा कि उनके पूर्वजों ने कभी कुकर्मों और गलत बातों से समझौता नहीं किया। अगर सच को सच कहना और झूठ का विरोध करना पाप है, तो वे यह पाप बार-बार करेंगे। उन्होंने साफ लिखा कि वे न गलत करते हैं और न ही सहते हैं, उनका जीवन जनता का है और उनकी रगों का खून हमेशा अपने मतदाताओं और कार्यकर्ताओं के लिए बहता रहेगा। उन्होंने अपने पत्र का समापन 'जय गिरिराज महाराज, जय हिंद, जय भारत' के साथ किया।