जिला परिषद की 31 और 8 पंचायत समितियों की तस्वीर पूरी तरह साफ; देखिए पूरी विजेता सूची
राजस्थान की प्रशासनिक गलियारों, प्रशासनिक दक्षता और अपनी कार्यशैली के लिए देश भर में सुर्खियों में रहने वाली चर्चित आईएएस अधिकारी और टोंक जिले की तेज-तर्रार जिला कलेक्टर टीना डाबी (IAS Tina Dabi) एक बार फिर से सुर्खियों के केंद्र में आ गई हैं। इस बार मामला किसी प्रशासनिक योजना या उद्घाटन का नहीं, बल्कि टोंक जिले के स्थानीय निकाय चुनावों और पंचायत राज संस्थाओं में आरक्षण तथा निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़ा हुआ एक बेहद रोमांचक वाकया है। टोंक जिला मुख्यालय पर उस वक्त अजीबोगरीब और कौतूहल भरा माहौल बन गया जब खुद जिला कलेक्टर टीना डाबी ने एक मासूम बच्चे के हाथों से लॉटरी निकलवाकर जिला परिषद की सीटों और पंचायत समितियों के आरक्षण का फैसला किया। इस अनोखी और पारदर्शी लॉटरी प्रक्रिया के पूरी होते ही टोंक जिले की 31 जिला परिषद सीटों और 8 पंचायत समितियों की तस्वीर पूरी तरह से साफ हो गई है, जिससे कई दिग्गजों के समीकरण या तो संवर गए हैं या फिर बिगड़ गए हैं। इस विशेष, विस्तृत और इनसाइड रिपोर्ट के माध्यम से हम गहराई से जानेंगे कि टीना डाबी द्वारा निकाली गई इस लॉटरी का पूरा गणित क्या है, किस क्षेत्र में किसे क्या मिला और इस प्रशासनिक प्रक्रिया के बाद स्थानीय सियासत में किस प्रकार की सुगबुगाहट शुरू हो गई है।
टोंक कलेक्ट्रेट में दिखा अनूठा नजारा: जब IAS टीना डाबी ने बच्चे से निकलवाई पर्ची और थम गईं सबकी सांसें
स्थानीय निकाय और पंचायती राज चुनावों से पहले सीटों के आरक्षण (Reservation of Seats) की प्रक्रिया को पूरी तरह से निष्पक्ष, पारदर्शी और विवादों से दूर रखने के लिए प्रशासन द्वारा विशेष इंतजाम किए जाते हैं। टोंक जिले में भी आरक्षण की स्थिति तय करने के लिए जिला प्रशासन ने कलेक्ट्रेट सभागार में एक खुली बैठक बुलाई थी, जिसमें तमाम राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि, स्थानीय नेता और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद थे। सभी की निगाहें इस बात पर टिकी थीं कि किस वार्ड या पंचायत समिति में महिला, एससी, एसटी या ओबीसी के लिए सीट आरक्षित होगी। पूरी पारदर्शिता बनाए रखने के लिए जिला कलेक्टर टीना डाबी ने एक अनूठी पहल करते हुए वहां मौजूद एक छोटे मासूम बच्चे को आगे बुलाया और उसके हाथों से लॉटरी की पर्चियां निकलवाईं। जैसे-जैसे बच्चे ने एक-एक करके पर्चियां निकालीं और टीना डाबी ने उनके नामों की घोषणा की, सभागार में मौजूद लोगों की सांसे थमी रहीं। इस पारदर्शी तरीके से हुए फैसले ने किसी भी पक्ष को अंगुली उठाने का मौका नहीं दिया और प्रक्रिया पूरी तरह शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई।
जिला परिषद की 31 सीटों का पूरा आरक्षण गणित: जानिए किस वर्ग के लिए खुली किस्मत के दरवाजे
टोंक जिले में जिला परिषद की कुल 31 सीटें हैं, जिन पर आगामी चुनाव होने हैं। इन 31 सीटों के आरक्षण की तस्वीर साफ होने के बाद कई संभावित उम्मीदवारों की राजनीतिक चालें तय होने लगी हैं। टीना डाबी की देखरेख में हुई इस लॉटरी प्रक्रिया के बाद सामान्य वर्ग, अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के साथ-साथ महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों का पूरा कोटा निर्धारित कर दिया गया है। जिला परिषद की इन सीटों पर कब्जा जमाने के लिए राजनीतिक दलों ने अभी से अपनी कमर कस ली है। जिन ग्रामीण इलाकों में लंबे समय से कयास लगाए जा रहे थे कि अमुक सीट आरक्षित होगी या सामान्य, उस पर से पर्दा उठने के बाद अब गांव की चौपालों और बैठकों में चुनावी चर्चाएं अपने चरम पर पहुंच गई हैं। हर पार्टी अब ऐसे चेहरों की तलाश में जुट गई है जो इस नए आरक्षण समीकरण के हिसाब से सबसे मजबूत उम्मीदवार साबित हो सकें।
8 पंचायत समितियों की तस्वीर भी हुई साफ: टोंक, निवाई, उनियारा और देवली में राजनीतिक सरगर्मी तेज
जिला परिषद के साथ-साथ टोंक जिले के अंतर्गत आने वाली सभी 8 प्रमुख पंचायत समितियों (जैसे टोंक, निवाई, उनियारा, देवली, टोडारायसिंह, पीपलू आदि) के आरक्षण की स्थिति भी इस लॉटरी प्रक्रिया के बाद पूरी तरह से साफ हो चुकी है। पंचायत समिति स्तर पर प्रधान की कुर्सी हासिल करने के लिए ब्लॉक स्तर के नेताओं ने अभी से अपनी गोटियां बिछानी शुरू कर दी हैं। जिन तहसीलों और ब्लॉकों में सीटें महिलाओं या पिछड़ों के लिए आरक्षित हुई हैं, वहां के स्थानीय दिग्गज नेताओं को अब अपने परिवार या करीबी समर्थकों के बीच से नए चेहरों को आगे लाना होगा। कलेक्टर टीना डाबी द्वारा अपनाई गई इस पारदर्शी लॉटरी प्रणाली की तारीफ विपक्षी दलों के नेताओं ने भी खुले दिल से की है, क्योंकि इससे प्रशासन पर किसी भी तरह के पक्षपात का आरोप लगाने की गुंजाइश पूरी तरह से खत्म हो गई है।
ग्रामीण सियासत में भूचाल: टिकट के दावेदारों ने शुरू की दौड़भाग और जोड़तोड़ की राजनीति
जैसे ही आईएएस टीना डाबी के हाथों से टोंक जिला परिषद और पंचायत समितियों की आरक्षण सूची आधिकारिक रूप से जारी हुई, जिले के राजनीतिक तापमान में अचानक भारी उबाल आ गया है। जिन नेताओं की वार्ड सीटें सुरक्षित या उनकी पसंद के अनुसार आरक्षित हो गईं, उनके घरों पर अभी से बधाइयों और जश्न का दौर शुरू हो चुका है, वहीं जिन दिग्गजों की सीटें बदल गईं या आरक्षित वर्ग में चली गईं, उनके माथे पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा सकती हैं। राजनीतिक दलों के जिला अध्यक्ष और प्रभारी अब इस बात का मंथन कर रहे हैं कि बदले हुए समीकरणों के बीच किस प्रकार से उम्मीदवारों का चयन किया जाए ताकि आगामी चुनावों में अधिकतम सीटों पर जीत दर्ज की जा सके। ग्रामीण अंचलों में चाय की दुकानों से लेकर प्रशासनिक दफ्तरों तक अब केवल इसी बात की चर्चा है कि इस बार का पंचायत चुनाव बेहद कड़ा और दिलचस्प होने वाला है।
प्रशासनिक पारदर्शिता की मिसाल: निष्पक्ष चुनाव की ओर टोंक प्रशासन का मजबूत कदम
कुल मिलाकर देखा जाए तो आईएएस टीना डाबी द्वारा जिस निष्पक्षता और पारदर्शी तरीके से टोंक जिला परिषद और पंचायत समितियों का यह लॉटरी और आरक्षण ड्रा संपन्न कराया गया है, वह अन्य जिलों के लिए भी एक बेहतरीन मिसाल पेश करता है। चुनाव से पहले इस प्रकार के विवादों से दूर रहकर सभी औपचारिकताएं पूरी कर लेना प्रशासन की कार्यकुशलता को दर्शाता है। अब जबकि तस्वीर पूरी तरह साफ हो चुकी है और मैदान सज चुका है, तो देखना यह बेहद रोमांचक होगा कि आने वाले दिनों में टोंक की इन ग्रामीण सीटों पर कौन सी पार्टी बाजी मारती है और जनता का आशीर्वाद किसके सिर पर सजता है। फिलहाल, सभी की निगाहें चुनाव आयोग द्वारा घोषित होने वाली मुख्य मतदान तिथियों पर टिकी हुई हैं।