पत्नी ने रखा करवा चौथ व्रत, शराब पीकर घर आया पति या करता है गलत बर्ताव, तो कैसे पूरा होगा उपवास?
करवा चौथ की रात जब चंद्रमा के निकलने का समय होता है और छलनी से पति का चेहरा देखने की परंपरा निभाई जाती है, यदि उस मुख्य क्षण में पति नशे की हालत में है या होश में नहीं है, तो महिलाओं के मन में यह घबराहट होने लगती है कि वे अपना व्रत कैसे खोलें। ऐसे में शास्त्रों के जानकारों और मनोवैज्ञानिकों का यह सर्वसम्मत सुझाव है कि घबराने या रोने-कलपने के बजाय व्यावहारिक और शांत चित्त से निर्णय लें। यदि पति की स्थिति ऐसी नहीं है कि वह सामान्य रूप से पूजा में शामिल हो सके, तो आप चंद्रमा को अर्घ्य देकर अपनी छत या बालकनी में ही व्रत का पारण कर सकती हैं। कई बार महिलाएं अपने पति की तस्वीर (फोटो) को देखकर या भगवान शिव-पार्वती और चंद्रमा का ध्यान करके भी अपने जल ग्रहण के संकल्प को पूरा कर लेती हैं, क्योंकि व्रत का उद्देश्य किसी प्रकार का दिखावा नहीं बल्कि आपकी आंतरिक आस्था है। यदि परिस्थिति बहुत अधिक बिगड़ रही हो और पति हिंसक या अत्यधिक अभद्र व्यवहार कर रहा हो, तो अपनी सुरक्षा और मानसिक शांति को सर्वोपरि रखते हुए घर के किसी बुजुर्ग सदस्य, माता-पिता या विश्वासी परिवारजन की मदद लेने में कोई संकोच नहीं करना चाहिए।
समाज की दबी हुई आवाज और महिलाओं का मानसिक संबल
हमारे समाज में आज भी कई परिवार ऐसे हैं जहां घरेलू हिंसा, शराब की लत और पतियों के दुर्व्यवहार को 'घर की बात' कहकर दबा दिया जाता है, और महिलाओं को यह कहकर चुप करा दिया जाता है कि सब कुछ सहन करना ही उनका भाग्य है। लेकिन आधुनिक दौर में महिलाओं को यह समझने की आवश्यकता है कि सहनशीलता की भी एक सीमा होती है। करवा चौथ का व्रत आपको सहनशक्ति सिखाता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप अपने आत्मसम्मान का गला घोंट दें। यदि कोई पति अपनी पत्नी के इस पवित्र व्रत के दिन भी उसका आदर नहीं करता और शराब के नशे में चूर होकर घर की मर्यादा को तार-तार करता है, तो दोष उस महिला का नहीं बल्कि उस पुरुष की मानसिकता का है। ऐसी स्थिति में महिलाओं को खुद को कमजोर महसूस करने के बजाय अपने भीतर आंतरिक शक्ति जगानी चाहिए। आपका व्रत आपके अपने नैतिक बल और परिवार के प्रति आपके प्रेम का प्रतीक है, जिसे किसी शराबी या गैर-जिम्मेदार व्यक्ति के बुरे व्यवहार से खंडित नहीं किया जा सकता।
आत्मसम्मान और व्रत की पवित्रता का संतुलन: एक जरूरी संदेश
अंततः करवा चौथ का यह पावन पर्व हमें यह सिखाता है कि रिश्ते केवल एकतरफा समर्पण से नहीं बल्कि दोनों पक्षों के आपसी आदर और जिम्मेदारी से चलते हैं। यदि आपका जीवनसाथी किसी बुरी आदत का शिकार है और आपका लगातार अपमान करता है, तो इस विशेष दिन पर पूजा-पाठ और व्रत के साथ-साथ आपको भविष्य के लिए अपनी सीमाओं और आत्मसम्मान पर भी गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। प्रेम और सुधार की गुंजाइश हमेशा बनी रहनी चाहिए, और यदि पति नशे की हालत में गलती का अहساس करे तो उसे क्षमा करना बड़प्पन है, लेकिन यदि यह रोज की आदत बन चुका है तो आपको कानूनी और सामाजिक रूप से भी अपनी सुरक्षा के कदम उठाने चाहिए। इस करवा चौथ पर आप केवल अपने व्रत के नियमों को ही पूरा न करें, बल्कि अपने मन को मजबूत करें, ईश्वर पर भरोसा रखें और यह विश्वास रखें कि आपके जीवन के अंधकार को दूर करने के लिए चंद्रमा की शीतलता के साथ-साथ आपकी अपनी आत्म-शक्ति ही सबसे बड़ा संबल बनेगी।