आखिरी तीर तक थमी रहीं सांसें, भारत ने शूट-ऑफ में जीता एशियाई खेलों का गोल्ड

आखिरी तीर तक थमी रहीं सांसें, भारत ने शूट-ऑफ में जीता एशियाई खेलों का गोल्ड

जापान के आइची-नागोया में जारी 20वें एशियाई खेल 2026 से भारत के लिए बुधवार की सुबह ऐतिहासिक खुशखबरी लेकर आई है। भारतीय तीरंदाजों ने अपना स्वर्णिम अभियान जारी रखते हुए मिश्रित टीम स्पर्धा के सांस थमा देने वाले फाइनल में दक्षिण कोरियाई दिग्गजों को धूल चटा दी।

साहिल जाधव और चिकिता तनिपार्थी की भारतीय जोड़ी ने दबाव भरे शूट-ऑफ में जबर्दस्त धैर्य दिखाते हुए देश की झोली में सोने का तमगा डाला। इस ऐतिहासिक जीत के साथ ही भारत ने तीरंदाजी मिश्रित टीम स्पर्धा में 2028 के लॉस एंजिल्स ओलंपिक खेलों का आधिकारिक कोटा भी अपने नाम कर लिया है। एशियाई खेल 2026 में यह भारत का कुल आठवां स्वर्ण पदक है और बुधवार के दिन का दूसरा गोल्ड मेडल साबित हुआ। इस स्वर्णिम सफलता के बाद भारत की कुल पदक तालिका 54 पदकों (8 स्वर्ण सहित) तक पहुंच चुकी है।

नब्ज थाम देने वाला फाइनल: 157-157 की बराबरी के बाद शूट-ऑफ में फैसला

स्वर्ण पदक के इस महामुकाबले में भारतीय युवा जोड़ी चिकिता और साहिल ने शुरुआत से ही अपनी अचूक निशानेबाजी का जलवा बिखेरा। पहले सेट में भारतीय जोड़ी ने 40-39 की करीबी बढ़त बनाई, जिसे दूसरे सेट में और मजबूत करते हुए स्कोर 80-78 कर दिया। तीसरे सेट में भी भारतीय तीरंदाजों ने अपनी लय नहीं खोई और 118-117 के साथ एक अंक की बढ़त बरकरार रखी। हालांकि चौथे सेट में दक्षिण कोरिया की जुंगयून पार्क और चोई यून ग्यू ने वापसी करते हुए परफेक्ट 40 अंक साध लिए, जबकि भारत 39 अंक ही जुटा पाया। इसके चलते कुल स्कोर 157-157 की बराबरी पर आ गया और मुकाबले का फैसला शूट-ऑफ से करने की नौबत आ गई।

शूट-ऑफ का ड्रामा: 10 का परफेक्ट स्कोर और कोरियाई चूक से मिला गोल्ड

शूट-ऑफ में दबाव अपने चरम पर था। भारत की ओर से पहली तीरंदाज चिकिता तनिपार्थी ने सटीक निशाना साधते हुए 10 अंक बटोरे। जवाब में दक्षिण कोरिया की पार्क ने भी 10 का निशाना लगाया, जिसका तीर केंद्र के ज्यादा करीब था। इसके बाद साहिल जाधव ने बिना विचलित हुए दबाव में एक और परफेक्ट 10 जड़ दिया, हालांकि उनका तीर भी पार्क के इनर-10 से थोड़ा दूर रहा। अब मुकाबला पूरी तरह दक्षिण कोरिया के अंतिम तीरंदाज चोई यून ग्यू के हाथ में था।

अगर चोई 10 मारते तो कोरिया जीत जाता, लेकिन भारी मानसिक दबाव में चोई का तीर 9 अंक वाले रिंग में जा लगा। इसी के साथ भारत ने शूट-ऑफ 20-19 से जीतकर कुल स्कोर 158-157 के साथ स्वर्ण पदक अपने नाम दर्ज कर लिया। इससे पूर्व भारतीय जोड़ी ने सेमीफाइनल में थाईलैंड को 156-155 के अंतर से पराजित कर फाइनल का टिकट कटाया था।

महिला कंपाउंड टीम का भी ऐतिहासिक कारनामा: चीन को हराकर विश्व रिकॉर्ड की बराबरी

मिश्रित टीम की इस स्वर्णिम छलांग से ठीक एक दिन पहले भारतीय महिला कंपाउंड तीरंदाजी टीम ने भी आइची-नागोया की धरती पर तिरंगा लहराया था। ज्योति सुरेखा वेन्नम, प्रीथिका प्रदीप और चिकिता तनिपार्थी की भारतीय तिकड़ी ने फाइनल में चीन को 238-234 के बड़े अंतर से मात देकर स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया था। चारों राउंड में चीनी खिलाड़ियों को पूरी तरह बैकफुट पर धकेलने वाली भारतीय महिलाओं ने 238 के विशाल स्कोर के साथ साल 2014 में दक्षिण कोरिया द्वारा बनाए गए विश्व रिकॉर्ड की बराबरी भी कर ली। इस तरह तीरंदाजी स्पर्धा में यह भारत का दूसरा स्वर्ण पदक रहा, जिसमें चिकिता तनिपार्थी ने दोनों ही गोल्ड मेडल जीतने में अपनी अहम भूमिका निभाई।