31 टेस्ट खेलने वाले वसीम जाफर का पत्ता कैसे कटा, चीफ सिलेक्टर की रेस का सबसे बड़ा इनसाइड गेम
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने सोमवार, 19 अक्टूबर को पूर्व भारतीय स्पिनर प्रज्ञान ओझा को आधिकारिक तौर पर सीनियर पुरुष चयन समिति का नया अध्यक्ष घोषित कर दिया है। 4 अक्टूबर को अजीत अगरकर का कार्यकाल खत्म होने के बाद ओझा को अंतरिम अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, और उनकी अगुवाई में ही न्यूजीलैंड के खिलाफ टी-20, वनडे, टेस्ट सीरीज सहित भारत 'ए' दौरे की चार टीमों का चयन किया गया था।
इस पद की दौड़ में पार्थिव पटेल के नाम की भी सुगबुगाहट थी, लेकिन उन्होंने आवेदन नहीं किया। वहीं वेस्ट जोन से खाली हुए पद के लिए पूर्व सलामी बल्लेबाज वसीम जाफर ने औपचारिक आवेदन किया था, लेकिन क्रिकेट सलाहकार समिति (CAC) ने इंटरव्यू के बाद जाफर की जगह दो टेस्ट मैच खेलने वाले रमेश पोवार पर भरोसा जताया।
बीसीसीआई के स्थापित नियमों के मुताबिक पांच सदस्यीय चयन समिति में सबसे अधिक टेस्ट खेलने वाला सदस्य ही चीफ सिलेक्टर बनता है। ऐसे में रमेश पोवार के शामिल होते ही 24 टेस्ट खेल चुके प्रज्ञान ओझा समिति में सबसे वरिष्ठ बन गए और उनके अध्यक्ष बनने की राह साफ हो गई, जबकि अगर 31 टेस्ट खेल चुके वसीम जाफर का चयन होता तो नियमतः वही नए चीफ सिलेक्टर बनते।
पूर्व भारतीय क्रिकेटर और मशहूर कमेंटेटर आकाश चोपड़ा ने अपने यूट्यूब चैनल पर विस्तार से विश्लेषण करते हुए बताया कि जाफर को दरकिनार कर ओझा को कमान सौंपने के पीछे बीसीसीआई की रणनीति क्या रही होगी।
आकाश के अनुसार, भारतीय क्रिकेट इस समय वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) फाइनल, आगामी वर्ल्ड कप और 2028 टी-20 वर्ल्ड कप जैसे बेहद अहम वैश्विक टूर्नामेंटों के मुहाने पर खड़ा है, जिसके लिए पूर्व चीफ सिलेक्टर अजीत अगरकर के कार्यकाल में ही टीम का रोडमैप और ब्लूप्रिंट तैयार हो चुका था। प्रज्ञान ओझा पिछले एक साल से इस सिस्टम का अभिन्न हिस्सा रहे हैं और उन्हें टीम के कॉम्बिनेशन, फ्यूचर प्लान और खिलाड़ियों की भूमिका की पूरी समझ है।
ऐसे में बोर्ड बड़े टूर्नामेंटों से ऐन पहले किसी बाहरी व्यक्ति को सीधे चीफ सिलेक्टर बनाकर पूरी व्यवस्था को अचानक बदलना नहीं चाहता था। इसके अलावा रमेश पोवार जहां कोचिंग और बीसीसीआई के सिस्टम में पहले से जुड़े रहे हैं, वहीं वसीम जाफर के पास सीधे तौर पर चयन प्रक्रिया और बोर्ड सेटअप का पूर्व अनुभव नहीं था, जिसके चलते निरंतरता और स्थिरता को प्राथमिकता देते हुए प्रज्ञान ओझा को चीफ सिलेक्टर की कुर्सी सौंपी गई।