UP में जमीन मालिकों की बल्ले-बल्ले: लागू हुई रियल टाइम खतौनी, QR कोड से एक सेकंड में होगी जांच
उत्तर प्रदेश में जमीन और खेती-किसानी से जुड़े राजस्व रिकॉर्ड को पारदर्शी बनाने की दिशा में योगी सरकार ने ऐतिहासिक क्रांति ला दी है। राज्य में अब 'रियल टाइम खतौनी' की नई आधुनिक व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू कर दी गई है, जिसका करीब 99.86 प्रतिशत कार्य राजस्व विभाग द्वारा सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि जमीन की खरीद-बिक्री, नामांतरण या किसी भी तरह के बदलाव के तुरंत बाद रिकॉर्ड स्वतः ही डिजिटल रूप से अपडेट हो जाएंगे, जिससे काश्तकारों और भूस्वामियों को तहसीलों के चक्कर काटने और लेखपालों के आगे-पीछे दौड़ने से हमेशा के लिए निजात मिल जाएगी।
सबसे खास बात यह है कि अब नई खतौनी पर सुरक्षा मानकों को बढ़ाते हुए विशेष क्यूआर कोड (QR Code) और सक्षम अधिकारी के डिजिटल हस्ताक्षर अंकित किए जा रहे हैं, जिसके चलते स्मार्टफोन से स्कैन करते ही दस्तावेज की सत्यता और प्रामाणिकता चंद सेकंड में सामने आ जाएगी और फर्जीवाड़े की गुंजाइश पूरी तरह समाप्त हो जाएगी।
जमीन मालिक की असमय मृत्यु के बाद उनके वारिसानों के नाम अभिलेखों में चढ़ाने यानी वरासत की प्रक्रिया को भी सरकार ने पूरी तरह ऑनलाइन और फेसलेस बना दिया है। राजस्व विभाग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में अब तक रिकॉर्ड 65 लाख से अधिक वरासत के मामले ऑनलाइन निस्तारित कर दर्ज किए जा चुके हैं, जिससे लाखों परिवारों को सरकारी दफ्तरों की जटिल कागजी दौड़ से बड़ी राहत मिली है।
इसके साथ ही सरकार ने उत्तर प्रदेश के सभी राजस्व गांवों के भू-नक्शों और पारंपरिक शजरों का शत-प्रतिशत डिजिटलीकरण भी पूरा कर लिया है, जिनमें से 98 प्रतिशत डिजिटल नक्शों को सीधे खतौनी रिकॉर्ड के साथ लिंक कर दिया गया है। खेतों के सटीक रकबे और सह-खातेदारों के बीच हिस्सेदारी तय करने के लिए 'अंश निर्धारण' का काम भी युद्धस्तर पर अंतिम चरण में है। रियल टाइम खतौनी, ऑनलाइन वरासत और डिजिटल भू-नक्शों के इस त्रिकोणीय समन्वय से दशकों पुराने अदालती भूमि विवादों, अवैध कब्जों और फर्जी बैनामों पर प्रभावी लगाम कसना तय माना जा रहा है।