Up kiran,Digital Desk : सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार और उसके कर्मचारियों के बीच लंबे समय से चल रहे महंगाई भत्ते (Dearness Allowance) के विवाद में बड़ा आदेश पारित किया है। शीर्ष अदालत ने कर्मचारियों के बकाया भुगतान की निगरानी के लिए न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा समिति का गठन भी किया है।
DA भुगतान लागू करने योग्य अधिकार, 2008-2019 का बकाया जल्द मिलेगा
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि महंगाई भत्ता कोई अतिरिक्त सुविधा नहीं बल्कि कर्मचारियों के न्यूनतम जीवन स्तर को बनाए रखने का अधिकार है। अदालत ने निर्देश दिया कि वर्ष 2008 से 2019 तक का बकाया भुगतान किया जाना चाहिए। अंतरिम आदेश में यह भी कहा गया कि कुल बकाए की कम से कम 25% राशि 6 मार्च तक जारी कर दी जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि वर्ष में दो बार DA पाने का कोई प्रावधान नहीं है और सेवानिवृत्त कर्मचारी भी इस आदेश के तहत लाभ के हकदार होंगे।
चार सदस्यीय समिति गठित, बकाया राशि की निगरानी
न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा की खंडपीठ ने राज्य सरकार को शेष 75% बकाया राशि के लिए चार सदस्यीय समिति गठित करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि DA की गणना अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (AICPI) से जोड़कर वैधानिक रूप से की जाए और राज्य बाद में इसे संशोधित नहीं कर सकता।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर राजनीतिक प्रतिक्रिया
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कहा,
“पश्चिम बंगाल सरकार लंबे समय से कर्मचारियों के साथ प्रताड़ना कर रही थी। अब उन्हें 25% राशि 6 मार्च तक भुगतान करनी होगी।”
वहीं नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने कहा,
“यह लंबित मुद्दा आज सुलझ गया। DA की मांग सही है, और कर्मचारियों को उनका हक मिलेगा। अप्रैल के बाद इस मुद्दे में कोई देरी नहीं होगी।”
_2035515898_100x75.png)
_962655107_100x75.png)
_2016052594_100x75.png)
_547369316_100x75.png)
_768307007_100x75.png)